समाजवादी पार्टी के बड़े नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा रचित एक गीत ‘अखिलेश आ रहे हैं’ पिछले दिनों सपा के अधिकृत सोशल मीडिया एकाउंट्स से जारी किया गया था। इस गाने को उत्तर प्रदेश की जनता ने हाथों-हाथ लेकर जहां एक तरफ अखिलेश यादव के नाम की धूम मचा डाली तो दूसरी तरफ भाजपा भीतर भारी बेचैनी पैदा करने का काम कर दिया। कोविड महामारी के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार की भारी विफलता से हताश पार्टी विधायकों, सांसदों और कार्यकर्ताओं में इस गाने के चलते उपजी हताशा को भांप अब भाजपा आलाकमान डैमेज कंट्रोल में जुट गया है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय प्रकाश नड्डा ने यूपी में चुनावी तैयारियों का श्री गणेश करते हुए गत् सप्ताह दिल्ली में पार्टी सांसदों की बैठक बुला उन्हें योगी सरकार के पक्ष में माहौल तैयार करने के निर्देश दिए। सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में मौजूद कई सांसदों ने योगी सरकार पर तीखे प्रहार कर अपनी भड़ास निकाली जरूर लेकिन पार्टी हित को सर्वोपरि मानते हुए शीघ्र ही जनता संग संवाद के लिए अपनी सहमति भी दे डाली। नड्डा ने इन सांसदों को चुनावी मंत्र देते हुए राष्ट्रवाद और सामाजिक सरोकार सरीखे मुद्दों पर जनता का ध्यान आकर्षित करने को कहा है। बकौल नड्डा जनता को समझाया जाना जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रवाद से जुड़े अपने हर वादे को पूरा कर दिखाया है। भाजपा सांसदों को कहा गया कि वे जम्मू-कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत करने जैसे मामलों को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित करें। भाजपा की इस रणनीति को भांपते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी खासे एक्टिव हो अपने पिछले शासनकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों को आगे रख चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
पार्टी सूत्रों की मानें तो साथ ही अखिलेश यादव प्रदेश के जातिगत समीकरणों को भी साधने में इन दिनों जुटे हैं। उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल संग गठजोड़ को लगभग तय कर डाला है तो कुर्मी वोट बैंक पर सेंधमारी के लिए उनका समझौता अपना दल के संस्थापक स्व ़ सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल संग फाइनल हो चुका है। खबर यह भी है कि आम आदमी पार्टी के नेता सांसद संजय सिंह से भी अखिलेश यादव की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं तमाम पारिवारिक मतभेद भुला अखिलेश अपने चाचा शिवपाल यादव को भी मिलकर चुनाव लड़ने के लिए मनाने में जुटे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रदेश का 21 प्रतिशत मुस्लिम और 10 प्रतिशत यादव वोट बैंक एक हो सपा के पक्ष में खड़ा हो गया तो भाजपा की राह बेहद कठिन हो जाएगी। इस 31 प्रतिशत वोट बैंक के साथ-साथ अखिलेश यादव का टारगेट मायावती के परंपरागत एससी-एसटी वोट बैंक पर सेंधमारी का भी है। मायावती के घटते राजनीतिक प्रभाव और लगभग शून्य सक्रियता के खासा विचलित यह वोट बैंक सपा साधने में जुटी है। जानकारों की मानें तो इस सबसे घबराई भाजपा अगले छह महीने अपनी पूरी ताकत यूपी में झोंकने जा रही है।

