मध्य प्रदेश के इंदौर में पोलोग्राउंड में स्थित बिजली कंपनी के सहायक इंजीनियर को लोकायुक्त ने 40 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। इंजीनियर ने बंद पड़े ट्रांसफार्मर को दोबारा चालू करने के लिए यह रिश्वत मांगी थी। पकड़े गए इंजीनियर का नाम मोहन सिंह सिकरवार है।
बताया जाता है कि एबी रोड स्थित कृष्णा पैराडाइज मल्टी का ट्रांसफार्मर पिछले दो-तीन दिन से बंद पड़ा हुआ था। मल्टी के संचालक राजेंद्र राठौर ने ट्रांसफार्मर को चालू करने के लिए आवेदन किया, लेकिन सहायक इंजीनियर आवेदक से 40 हजार रुपए लिए बिना काम करने को तैयार नहीं था। राजेंद्र ने इस बात की शिकायत लोकायुक्त एसपी सव्यसाची सराफ को दी। इसके बाद डीएसपी प्रवीण सिंह बघेल एवं अन्य अधिकारियों ने इसके लिए एक टीम गठित की। जब राजेंद्र पैसे लेकर दफ्तर पहुंचा तो डीएसपी की टीम ने वहां दस्तक दी। उसके बाद सहायक इंजीनियर के चेहरे के रंग उड़ गए। उसके बाद वह अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाने लगा, कहने लगा साहब, मैं तो सीधा आदमी हूं, यह पैसे अपने लिए नहीं, बल्कि ऊपर वाले बड़े अफसरों को देने के लिए मांगे हैं।

जब अधिकारियों ने ऊपर के अफसरों से बात की तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि वह तो सिकरवार को जानते तक नहीं। कार्यपालन यंत्री भजन कुमार ने कहा कि उसे तो इस पद पर आये अभी 10 दिन ही हुए हैं। वह सरासर झूठ बोल रहा है। इससे पहले भी बिजली विभाग में रिश्वत की कई शिकायतें आ चुकी हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि “हर प्रकार के लोड की रिश्वत राशि अलग होती है। 5 एचपी तक लोड के लिए 7000 रुपए, 10 एचपी के लिए 10000 रुपए, 20 एचपी लोड के लिए 50000 हजार तक रिश्वत ली जाती है”।

