2024 के लोकसभा चुनाव ने दिखा दिया है कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आभा भले ही कम हुई हो लेकिन प्रदेश में मोदी का खुमार अभी उतना उतरा नहीं है कि भाजपा आसानी से सत्ता से बेदखल हो जाए। मोदी- धामी की जोड़ी उत्तराखण्ड में अभी भी प्रभावी है। ऐसे में कांग्रेस के लिए प्रदेश में दोबारा सत्ता पाना आसान नहीं है। इसका एहसास कांग्रेस के नेताओं को बखूबी है इसलिए वो अब जमीन पर जनता के साथ खड़ा दिखना चाहते हैं। इसकी शुरुआत प्रदेशभर में जनाक्रोश रैलियों के माध्यम से कांग्रेस करने लगी है। रूद्रपुर के बाद कांग्रेस का हल्द्वानी में जनाक्रोश रैली के रूप में दूसरा बड़ा प्रदर्शन था। सरकार के खिलाफ जनाक्रोश रैली के माध्यम से हल्द्वानी में कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला
उत्तराखण्ड में कांग्रेस सुप्तावस्था से निकलकर कुछ उठ खड़े होने की कोशिश करने लगी है। हालांकि कभी-कभी नेताओं के आपसी अंतर्विरोध और सार्वजनिक बयान इन कोशिशों पर पलीता जरूर लगा देते हैं। शायद ये कांग्रेस नेताओं को भी पता है कि आने वाला समय उनके लिए खासा चुनौती भरा है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर क्योंकि भारतीय जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर हैट्रिक बनाने की पूरी कोशिश करेगी। 2024 के लोकसभा चुनाव ने दिखा दिया है कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आभा भले ही कम हुई हो लेकिन उत्तराखण्ड में मोदी का खुमार अभी उतना उतरा नहीं है कि भाजपा आसानी से सत्ता से बेदखल हो जाए। मोदी-धामी की जोड़ी उत्तराखण्ड में अभी भी प्रभावी है। भले ही भाजपा के कई नेता हाशिए पर चले गए हों लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अभी भी भाजपा व कांग्रेस के नेताओं के लिए चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए प्रदेश में दोबारा सत्ता पाना आसान नहीं है। इसका एहसास कांग्रेस के नेताओं को बखूबी है शायद वो अब जमीन पर जनता के साथ खड़ा दिखना चाहते हैं और मित्र विपक्ष का जो आरोप कांग्रेस पर चस्पा हो गया है उसे अब वो मिटा कर सरकार के खिलाफ खुलकर दिखाना चाहती है। धामी सरकार के खिलाफ कई मुद्दे होने के बावजूद भी वो इन मुद्दों पर बयानों के स्तर पर ही सक्रिय दिख रही थी लेकिन धरातल पर उसका संघर्ष न के बराबर ही नजर आ रहा था।
उत्तराखण्ड सरकार के खिलाफ जनाक्रोश रैली के माध्यम से हल्द्वानी में कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला। जनाक्रोश रैली के जरिए जहां कांग्रेस ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया वहीं बड़े नेताओं ने एकजुटता दिखा कर संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस में किसी भी प्रकार का किसी भी स्तर पर मतभेद नहीं है। रूद्रपुर के बाद कांग्रेस का हल्द्वानी में जनाक्रोश रैली के रूप में दूसरा बड़ा प्रदर्शन था। हल्द्वानी की जनाक्रोश रैली में भले ही बडे़ नेता जुटे हों लेकिन हल्द्वानी विधानसभा में आयोजित इस भाजपा विरोधी रैली हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश की भी परीक्षा थी जिसके माध्यम से वो अपनी ताकत का एहसास कराने में काफी हद तक सफल भी रहे। लंबे अरसे बाद हल्द्वानी में अपनी ताकत का एहसास कराती नजर आई कांग्रेस की शिकायत रही है कि भाजपा सरकार आने के बाद अधिकारी विधायकों और जनता की नहीं सुन रहे।
जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर जिले के अधिकारी मनमाने तरीके से एकतरफा जनता विरोधी फरमान सुना रहे हैं जिस पर सत्तारूढ़ दल के प्रतिनिधि भी खुद को असहाय पा रहे हैं। तराई को उत्तराखण्ड का आंगन और हल्द्वानी को कुमाऊं का प्रवेश द्वार कहा जाता है। पहले आंगन रूद्रपुर और अब कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में कांग्रेस के आंदोलन की दस्तक बेवजह नहीं है। उत्तराखण्ड में नौकरशाही के हावी होने की चर्चाएं आम हैं। राजनेताओं के घटते रसूख ने नौकरशाही को हावी होने का मौका दिया है। शायद यही कारण है कि नैनीताल जिले का प्रशासन भी उसी राह पर चल पड़ा है। भाजपा की सरकार होने के कारण भाजपा नेता खुले तौर पर बोलने में खुद को असहज पाते हैं, वहीं कांग्रेस यहां पर मुखर है। हल्द्वानी वह शहर है जिसने स्व. डॉ. इंदिरा हृदयेश का वो कार्यकाल भी देखा था जिसमें विकास की कई नई इबारतंे लिखी गई थीं। अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसी बड़ी योजना का धरातल में उतरना, आधारशिला, हर गली मोहल्ले में पक्की सड़के मंडी का नया स्वरूप जो हल्द्वानी की तस्वीर कुछ हद तक बदल देती लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ हल्द्वानी में ये सिलसिला थम सा गया। हालांकि विकास एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है अगर नीयत साफ हो तो विकास किसी राजनीतिक बाधाओं को नहीं मानता। लेकिन हल्द्वानी के संदर्भ में ये मानना पड़ेगा कि विकास के पहिए अगर थमे नहीं तो उनकी चाल धीमी जरूर हुई है और इसी विकास की धीमी गति और प्रशासन का हावी होने की मंशा की परिणति थी कांग्रेस की जनाक्रोश रैली और उसमें उमड़ी भीड़। सुमित हृदयेश का कहना है कि जिला खनिज न्यास फंड से उनके द्वारा भेजी गई योजनाओं के लिए जिला प्रशासन धन आवंटित नहीं कर रहा है जबकि अन्य विधायकों के प्रस्ताव तुरंत स्वीकृत हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे की फाइल बस कागजों में ही घूम रही है। अंतरराष्ट्रीय जूं की तो अब सरकार चर्चा तक नहीं करती। हल्द्वानी के विकास को रोक कर भाजपा और उसकी सरकार हल्द्वानी की जनता से राजनीतिक बदला ले रही है। जिलाधिकारी एक हैडमास्टर की तरह व्यवहार कर रही हैं सड़क चौड़ीकरण के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है जो कि कतई स्वीकार्य नहीं है। उत्तराखण्ड कांग्रेस के अध्यक्ष करण माहरा का कहना है कि हर मोर्चे पर फेल भाजपा की सरकार में नौकरशाही बेलगाम हो गई है। महिला सम्मान की बात करने वाली भाजपा के शासनकाल में महिला सुरक्षित नहीं रह गई है। कानून-व्यवस्था चरमराने के साथ भाजपा से जुड़े लोग ही महिलाओं का शोषण कर रहे हैं और भाजपा सरकार और संगठन जिम्मेदारी लेने बजाए अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। भू-कानून के नाम पर एक तरफ तो मुख्यमंत्री सख्त भूमि कानून लाने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निजी कंपनियों को सरकार जमीन की बंदरबांट कर रही है। विधायक व पंचायत प्रतिनिधियों की बातों को नौकरशाही सुन नहीं रही है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि इस सरकार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। सरकार ने नदी-नाले तक बेचकर खनन विभाग को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अधिकारियों के जरिए सरकार जनप्रतिनिधियों का अपमान करवा रही है।
जनप्रतिनिधियों का कद कम करने की कोशिश की जा रही है जिसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी का कहना है कि सरकार ने खनन को व्यक्तिगत राजस्व पाने का जरिया बना दिया है। खनन प्रदेश से बाहरी संस्था को देकर स्थानीय बेरोजगारों के पेट पर लात मारने का काम भाजपा सरकार ने किया है। जनाक्रोश रैली में शामिल नेताओं ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। एमबी कॉलेज से बड़ी रैली के रूप में निकले कांग्रेसियों ने जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय पर धरना देकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सरकार को चेताया कि कांग्रेस, धामी सरकार के खिलाफ नरम रहने वाली नहीं है। हालांकि भाजपा नेताओं ने जनाक्रोश रैली को आधारहीन व महज राजनीतिक स्टंट बताया। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी की लोकप्रियता से कांग्रेस हताश है और इसी हताश में सरकार के खिलाफ अनर्गल आरोप लगा रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश रावत कांग्रेस की जनाक्रोश रैली को महज राजनीतिक स्टंट बताते हुए कहते हैं कि ये जनता को गुमराह कर सत्ता पाने का महज प्रयास है।

हल्द्वानी की जनाक्रोश रैली में कांग्रेस जहां सत्ता के खिलाफ हुंकार भरती नजर आई, वहीं अपना घर भी व्यवस्थित करती दिखी। कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम व जोश कांग्रेस में जान डाल गया, वहीं हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश का कद भी कांग्रेस की राजनीति में ऊंचा कर गया। हरीश रावत व प्रीतम सिंह की अनुपस्थिति के बावजूद कांग्रेस की जनाक्रोश रैली राजनीतिक हलकों में अपनी छाप छोड़ने में सफल रही वहीं कांग्रेस के अंदर की राजनीति में एकता का संदेश देने में सफल तो रही लेकिन कांग्रेस के अंदर सवाल अब भी बरकरार हैं कि ये एकता तात्कालिक है या फिर दीर्घकालिक?

