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माॅब लिंचिग पर मोदी को खुला पत्र लिखने वाले 50 फिल्मी हस्तियों पर मुकदमा दर्ज

 

दो माह पूर्व बिहार के मुजफ्फरपुर में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर खुला पत्र लिखने वाले लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में खुला पत्र लिखने वाले रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम और अपर्णा सेन समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है ।

गौरतलब है कि देश में बढ़ रहे मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) के मामलों पर इन लोगों ने चिंता जाहिर की थी । इन लोगों का कसूर यह था कि इन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख देश की हालात से अवगत कराया था । जिन पर मामला दर्ज कराया गया है उनपर आरोप है कि उन्होने देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को खराब करने का काम किया है।

बता दें कि स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की ओर से दो महीने पहले दायर की गई एक याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूर्य कांत तिवारी के आदेश के बाद यह मामला दर्ज हुआ है। ओझा ने कहा कि सीजेएम ने 20 अगस्त को उनकी याचिका स्वीकार कर ली थी। इसके बाद गुरुवार को मुजफ्फरपुर के सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हुई है। ओझा का आरोप है कि इन हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को कथित तौर पर धूमिल किया है।

याद रहे कि बढ़ती माॅब लिंचिंग की घटनाओं के बाद देश के अंदर हो रही नस्लीय और जातीय धार्मिक हिंसा पर नाराजगी जताते हुए इस पर सख्ती से रोक लगाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को दो माह पूर्व एक चिट्ठी भेजी गई थी। बाॅलीवुड के कुछ जाने-माने सितारों या निर्देशकों जैसे श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप, अपर्णा सेन, उनकी बेटी कोंकणा सेन शर्मा, शुभा मुद्गल, मणिरत्नम आदि 49 हस्तियों के इस चिट्ठी में हस्ताक्षर थे ।

23 जुलाई 2019 को लिखे गए इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि राम के नाम पर देशभर में हिंसा हो रही है, ‘जय श्री राम’ का नारा युद्धघोष बन चुका है। इसके अलावा चिठ्ठी में नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि 1 जनवरी 2009 से 29 अक्टूबर 2018 के दौरान देश में 254 धर्म आधारित हेट क्राइम को अंजाम दिया गया।

यही नहीं, 2016 में दलितों पर अत्याचार के 840 मामले सामने आए। प्रधानमंत्री से सवाल पूछते हुए इन कलाकारों ने लिखा है कि वो बताएं कि अपराधियों के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया? अपराधियों पर तो एक्शन हुआ हो या ना हुआ हो लेकिन पत्र लिखने वालो पर जरुर हो गया।

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