मेरी बात भूखा बच्चा सो रहा है आसमान ओढ़कर मां रोटी कमा रही है पत्थरों को तोड़कर जिनके पांव...
Editorial
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-121 विभाजन के पश्चात् साम्प्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण कम होने के बजाए लगातार बढ़ता गया,...
मेरी बात माहात्मा गांधी की बात करना, उनके विचारों पर चर्चा करना नए भारत में, विश्वगुरु बनने का दिवास्वप्न...
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-120 वर्ष 1987 में देश के 21 राज्यों में भारी सूखा पड़ा था। राजीव सरकार ने...
मेरी बात पहले वे आए कम्युनिस्टों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था। फिर...
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-119 देश की राजनीति पर 1989 के आम चुनाव के दौरान धार्मिक उन्माद पूरी तरह हावी...
मेरी बात ब्रिटिश भारत की बंगाल प्रेसिडेंसी के एक कस्बे मोतिहारी (अब बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले का मुख्यालय)...
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-118 वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत छाप छोड़ने में तो राजीव सफल हो रहे थे, लेकिन...
मेरी बात भारत में कानून द्वारा स्थापित किसी प्रक्रिया के अलावा कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को उसके...
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-117 ज्ञानी जैल सिंह तो बगैर कोई विवादित कदम उठाए 25 जुलाई, 1987 को पदमुक्त हो...
मेरी बात वैचारिक प्रतिबद्धता के बोझ तले दबकर हम बहुदा इतने दृष्टि बाधित हो जाते हैं कि अपने वैचारिक...
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-116 दैनिक ‘नवभारत टाइम्स’ में समाचार प्रकाशित करा पाने में विफल रहे विभूति नारायण राय ने...
मेरी बात बड़ी रौनक थी इस घर में, ये घर ऐसा नहीं था, गिले-शिकवे भी रहते थे, मगर ऐसा...
पिहत्तर बरस का भारत/भाग-115 राजीव गांधी के इस सख्त कदम से सहमी जयवर्धने सरकार ने तमिल समस्या का हल...
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-114 हालांकि बतौर वित्तमंत्री वी.पी. सिंह के ‘रेड राज’ से नाराज उद्योगपतियों और उनके समर्थक...