Uttarakhand

पुलिस और अपराधियों का कॉकटेल

‘मित्र पुलिस’ के नाम से पुकारे जाने वाली उत्तराखण्ड पुलिस बल का दामन अपने कुछ दागी अधिकारियों और कर्मचारियों के चलते दागदार हो चला है। बलात्कार करने, अधीनस्थ महिला पुलिसकर्मी संग जबरन शारीरिक सम्बंध बनाने से लेकर सीधे आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों चलते मित्र पुलिस पर जनता का विश्वास तेजी से कम होता जा रहा है

उत्तराखण्ड में पुलिसकर्मियों पर आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के आरोप कोई नई बात नहीं है। विगत 24 वर्षों से पुलिस विभाग पर भ्रष्टाचार, घपले और भर्ती घोटाले के आरोप तो लगे ही थे,
पुलिसकर्मियों की आपराधिक वारदातों में संलिप्तता के बेहद गम्भीर आरोप अपने आप में चौंकाता है। 2019 के लोकसभा चुनाव आचार संहिता के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा करोड़ों की लूट का मामला आज भी चर्चाओं में है तो हाल ही में एक कारोबारी से लाखों की लूट का मामला सामने आया है जिसमें पुलिस के कर्मचारी लूटेरों के साथी निकले हैं। इन मामलांे से जहां पुलिस की छवि को खासा नुकसान हो रहा है, वहीं आम जनता के बीच पुलिस पर से भरोसा भी उठने लगा है।

विगत 31 जनवरी को ऋषिकेश के एक कारोबारी यशपाल सिंह असवाल द्वारा प्रेमनगर पुलिस थाने में शिकायत दी गई कि छह लोगों ने जिनमें एक पुलिस की वर्दी में था, ने उनसे साढ़े सात लाख रुपए लूट लिए, फिर ढाई लाख रुपए वापस करके पांच लाख लूटकर भाग गए। पुलिस के अनुसार कारोबारी यशपाल असवाल को कुंदन नेगी नाम के व्यक्ति ने सम्पर्क किया और बताया कि उसके तीन साथियों राजेश रावत, राजेश चौहान और राजकुमार के पास 20 हजार अमेरिकी डॉलर हैं जिन्हें वे सस्ते दामों पर रुपए में बदलना चाहते हैं। यशपाल असवाल कुंदन नेगी की बातों में आ गए और 8 लाख में 20 हजार अमेरिकी डॉलर का सौदा तय कर लिया। 31 जनवरी को यशपाल असवाल तय सौदे के अनुसार डॉलर खरीदने के लिए देहरादून पहुंचे जहां कुंदन नेगी द्वारा उनको प्रेमनगर थाना क्षेत्र के झाझरा स्थित हनुमान मंदिर के पास बुलाया। असवाल की मुलाकात राजेश रावत, राजेश चौहान और राजकुमार के साथ एक अन्य व्यक्ति हसीन उर्फ अन्ना से हुई। सभी के बीच डॉलर का सौदा होने लगा कि तभी वहां पर एक पुलिस वर्दीधारी व्यक्ति और सादे कपड़ों में दो लोग आए और उनको धमकाते हुए उनके हाथों से साढ़े सात लाख रुपयों से भरा बैग छीन लिया। बाद में ढाई लाख रुपए असवाल को वापस करके पांच लाख रुपए छीनकर भाग गए।

अपने साथ हुई लूट के बाद यशपाल असवाल प्रेमनगर थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दी। एक पुलिस वर्दीधारी व्यक्ति के वारदात में शामिल होने की बात सामने आने पर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और पुलिस द्वारा मामले में मुकदमा दर्ज करते हुए तत्काल जांच शुरू कर आईआरबी द्वितीय के सिपाही अब्दुल रहमान, सिपाही सालम और प्रेमनगर थाने के सिपाही इकरार के साथ-साथ लूट के मास्टर माइंड हसीन उर्फ अन्ना, प्रेम मोहन के साथ-साथ कुंदन नेगी, राजकुमार, राजेश रावत और राजेश कुमार चौहान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। वारदात में शामिल तीनों पुलिसकर्मियों को निलम्बित भी किया जा चुका है और उनको सेवामुक्त करने की कार्यवाही आरम्भ की जा रही है।

दरअसल यह पूरा मामला सुनियोजित ठगी का है। इस मामले के मास्टर मांइड बताए जा रहे हसीन उर्फ अन्ना और सिपाही अब्दुल रहमान द्वारा सारा खोल रचा गया ओैर ऋषिकेश से डॉलर के नोट खरीदे और अखबार की गड्डियों को काटकर नीचे ऊपर डॉलर लगाकर उनकी गड्डी बनाई गई जिसकी कारोबारी को फोटो भेजी गई। करीब आधे रेट में डॉलर मिलने पर कारोबारी असवाल भी लालच में आए और ठगों से सौदा तय कर लिया। जब झाझरा में सौदा तय हो रहा था तभी किसी फिल्म की कहानी की तरह एक पुलिस की वर्दी और एक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी आए और कारोबारी को अवैध कारोबार करने के आरोप में धमकाया गया और उनसे रुपए छीन लिए। सिपाही अब्दुल ने कारोबारी को ढाई लाख रुपए लौटाते हुए किसी को न बताने की बात कहकर धमकाया और कारोबारी को छोड़ दिया। यह दृश्य अनेक फिल्मों में देखा जाता रहा है ठीक उसी तरह से इस ठगी का भी ताना-बाना रचा गया। लाखों की लूट में तीन-तीन पुलिसकर्मियों के शामिल होने से प्रदेश के पुलिस व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। बीते 24 बरसों में उत्तराखण्ड पुलिस पर कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमें पुलिसकर्मियों के आपराध में शामिल होने के आरोप लग चुके हैं।

2019 में जब लोकसभा चुनाव चल रहे थे और प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लगी हुई थी, 4 अप्रैल को पुलिसकर्मियों ने एक बड़ी लूट को अंजाम दे डाला था। इस मामले में एक प्रोपर्टी डीलर अनुरोध पंवार से एक करोड़ रुपए लूटे जाने का आरोप तत्कालीन आईजी, पुलिस के सरकारी वाहन चालक और पुलिस के सिपाही के साथ-साथ एक दरोगा पर लगा था। इस लूट की अनुरोध पंवार की तरफ से डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। पुलिस ने इस मामले में जांच की और तमाम सीसीटीवी फूटेज के आधार पर आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। हालांकि इस मामले में दारोगा को एक माह के भीतर ही जमानत मिल गई और शेष दोनों सिपाहियों को भी न्यायालय से राहत मिल गई। पूरे जांच में पुलिस रुपया बरामद नहीं कर पाई और मामले में पीड़ित द्वारा बयान बदलने के चलते मामला दबा दिया गया।

इस क्रम में कुछ समय पूर्व ऊधमसिंह नगर जिले की किच्छा कोतवाली प्रभारी के खिलाफ कोतवाली के समस्त कर्मचारियों द्वारा एक पत्र सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ जिसमें किच्छा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक पर आरोप लगाया गया कि वे अपने अधीनस्त कर्मचारियों के खिलाफ अमर्यादित व्यवहार करने, मानसिक दबाव बनाने, अवैध खनन तथा शराब कारोबरियों पर दबाव बनाकर अवैध वसूली करने का काम करते हैं। इस पत्र को गुमनाम पत्र बताया जा रहा है और इसकी क्या सच्चाई है इसकी कोई पुख्ता जानकारी भी नहीं है लेकिन इस मामले में पुलिस द्वारा जांच करने की बात भी कही गई है।

वर्ष 2023 में कोतवाली रामनगर के प्रभारी निरीक्षक पर एक पर्यटन कारोबारी के साथ मारपीट करने और धमकाने के आरोप भी लग चुके हैं। इस मामले ने तूल पकड़ा तो तत्कालीन कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार द्वारा इस मामले में रामनगर कोतवाल को तत्कालन निलम्बित करने के आदेश दिए। हैरानी की बात यह हेै कि डीजीपी के आदेश बाद कोतवाल को निलम्बित तो किया गया लेकिन महज चार दिनों के बाद ही कोतवाल को न सिर्फ बहाल कर दिया गया, बल्कि उनका स्थानांतरण करने की बजाय उनको रामनगर कोतवाली का ही प्रभार दे दिया गया। बगैर किसी जांच प्रक्रिया के ही निलंबन रद्द करने से साफ हो गया कि पुलिस व्यवस्था में राजनीतिक रसूख और दबाव इतना बढ़ चुका है कि पुलिस महानिदेशक के आदेश की भी अवहेलना हो रही है।

ऐसा ही एक अन्य मामला भी खासा सुर्खियों में रहा है। जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा अपने सीनियर लिपिक द्वारा बलात्कार करने के सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। वर्ष 2015 में पिथौरागढ़ जिले की सहायक लिपिक के पद पर काम करने वाली महिला पुलिसकर्र्मी पर उनके प्रधान लिपिक नंदन सिंह राठौर द्वारा उनको परेशान करने और उनके साथ रेप करने के गम्भीर आरोप लगाया। हैरानी की बात यह है कि इस मामले की शिकायत करने के बावजूद उक्त महिला पुलिसकर्मी को ही चुप करवा दिया गया। इसके बाद भी महिलाकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो जुलाई 2023 को इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से की लेकिन वहां से भी कोई न्याय नहीं मिला। उक्त महिलाकर्मी का स्थानांतरण नैनीताल जिले में कर दिया गया। इसके बाद महिलाकर्मी ने तत्कालीन डीजीपी अशोक कुमार को भी इस मामले में शिकायती पत्र भेजा लेकिन उसको न्याय नहीं मिल पाया। हार कर उसने इसकी शिकायत राज्य महिला आयोग में की। आयोग के दखल बाद पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ द्वारा इस मामले में जांच कमेटी बनाई गई। जिसमें एक तरफा जांच करके मामले में आरोपी पुलिस बाबू को क्लीनचिट दे दी गई। राज्य महिला आयोग में एकतरफा जांच के खिलाफ फिर से शिकायत किए जाने पर डीएम पिथौरागढ़ ने जांच कमेटी बनाई जिसमें सामने आया कि आरोपी प्रधान लिपिक पुलिस द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करके अधीनस्थ महिलाकर्मी के साथ सम्बंध बनाए गए थे।

इसी तरह से वर्ष 2019 में हरिद्वार कुम्भ मेले के दौरान एक महिला संत द्वारा पुलिसकर्मी पर बलात्कार, मारपीट करने और गहने लूटने के गम्भीर आरोप लगाए गए थे। हैरानी की बात यह है कि एक महिला संत के साथ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध होने के बावजूद उसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई। अंत में थक-हारकर महिला संत को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा और न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया। जिसमें श्यामपुर थाने के पुलिस कान्स्टेबल दिलीप सिंह के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इसकी जांच अभी चल रही है। ऐसे ही कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें पुलिसकर्मियों की आपराधिक घटनाआंे में संलिप्तता रही है। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किए जाने की मांग उठती रही है और प्रदेश की पुलिस को मित्र पुलिस का दर्जा दिया गया है। लेकिन जिस तरह से पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर ही गम्भीर आरोप लग रहे हैं वह प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर ही सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

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