जैसे-जैसे राज्यसभा चुनाव पास आ रहे हैं वैसे-वैसे कांग्रेस का कुनबा कम होता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता लगातार बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। जिसके चलते कांग्रेस के हाथों से बाजी जाती हुई दिख रही है। इस आवाजावी के बीच कांग्रेस छोड़ने वाले सभी नेताओं का बीजेपी द्वारा अपनी पार्टी में स्वागत किया जा रहा है। जितने भी नेता कांग्रेस छोड़ रहे हैं उन सभी के बीजेपी में शामिल होने की लगातार खबरें आ रही हैं। इसी क्रम में आज गांधी परिवार के करीबी और ब्राह्मणों में गहरी पैठ रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके साथ पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, विशाल पटेल और संजय शुक्ला, सतपाल पलिया, भोपाल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैलाश मिश्रा भी भाजपा में शामिल हो गए हैं।
कांग्रेस की हार के कारण बीजेपी कांग्रेस की पीठ को तोड़ कर पार्टी के सदस्यों को अपने कुनबे में लगातार शामिल कर रही है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज बीजेपी ने लगभग 10 कांग्रेस के नेताओं को सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीड़ी शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा की सदस्य्ता ग्रहण करवाई गई है।
क्यों टूटा सुरेश पचौरी से कांग्रेस का रिश्ता
सुरेश पचौरी और कंग्रेस का रिश्ता काफी पुराना है। सुरेश पचौरी 56 साल तक कांग्रेस में रहे हैं। यह राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बेहद करीबी नेता रहे हैं, लेकिंन इतने सालों के बाद इन्होने भी कांग्रेस को छोड़ दिया है और बीजेपी को अपना लिया है। राज्यसभा चुनावों के इतना नजदीक आने के बाद कांग्रेस के नेताओं का गट बदलना कांग्रेस को बेहद भारी पड़ रहा है। इनके दाल बदल ने के पीछे रीज़न बताया जा रहा है कि वे खुद को काफी दिनों से अपमानित और उपेक्षित महसूस कर रहे थे। वे बीते कई सालों तक पार्टी में हाशिए पर रहे। वजह उनकी वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के साथ अदावत है। सुरेश पचौरी का भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि देश को जोड़ने का दावा करने वाले राहुल गांधी ने हाल ही में प्रदेश में यात्रा निकाली है।
न्याय जोड़ो यात्रा
काफी समय से राहुल गांधी की न्याय यात्रा पूरे देश में चल रही है। इन दिनों यह यात्रा राजस्थान में है। मध्य प्रदेश से ही राहुल गांधी 7 मार्च को राजस्थान में दाखिल हुए। 5 दिन की यात्रा में राहुल गांधी ने मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, राजगढ़, शाजापुर, उज्जैन, रतलाम, धार और सैलाना को कवर किया। कांग्रेस नेताओं ने यात्रा को सफल बताया। लेकिन अपनी पार्टी में सुरेश पचौरी जैसे दिग्गज नेता की नाराजगी को भांप नहीं पाए।
सुरेश पचौरी
सुरेश पचौरी अपने ज़माने के एजुकेशनिस्टों में जाने जाते हैं इन्होने भोपाल के मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद इन्होने आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज से एलएलबी भी किया। वर्ष 1972 में भारतीय युवा कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया, और फिर 1981-83 के समय मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव रहे। वर्ष 1984-85 में वह युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
उन्होंने भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव भी बने इसके बाद वर्ष 1984 में वह राज्यसभा में प्रथम बार निर्वाचित हुए एवं उसके उपरांत 1990, 1996 और 2000 में पुनर्निर्वाचित किए गए। वर्ष 1995-96 में उन्हें रक्षा मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद हासिल किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में मंत्रालय के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन और संसदीय कार्य मंत्रालय में भी 24 मई 2004 से 6 अप्रैल 2008 तक सेवा की। यह वर्ष 2008 से 2011 के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह कांग्रेस सेवादल के भी अध्यक्ष रहे हैं।
सुरेश पचौरी के द्वारा केवल दो बार ही राजनीतिक चुनाव लड़ा गया। पहली बार वर्ष 1999 में, उन्होंने भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी की उमा भारती को चुनौती दी और 1.6 लाख से ज्यादा वोटों से हार गए। दूसरी बार इन्होने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर से शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री और दिवंगत सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा, इस बार भी इन्हे हार का सामना करना पड़ा।