होली के दिन मध्यप्रदेश में घटे राजनीतिक घटनाक्रम बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कांग्रेस छोड़ बीजेपी जॉइन ली। इसके साथ ही सिंधिया के समर्थक विधायक भी उनके साथ आ गए। ऐसे 22 विधायक थे, जिन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। सभी विधायकों को ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बताया जा रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ सकती है। अगर आंकड़ों को देखें तो मध्यप्रदेश में फिलहाल बीजेपी का पलड़ा भारी है।

चर्चा ये भी है कि कांग्रेस मध्यप्रदेश में अपनी सरकार को यथावत रखने के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बना चुकी है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी खुद मध्यप्रदेश की कमान अपने हाथ में ले चुकी हैं। जो 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया है उनमें से कईयों को घर वापसी कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ और सोनिया गांधी ने अपने सारे राजनीतिक हथकंडे इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं।
चर्चा यह भी है कि 22 में से सात विधायक फिलहाल कमलनाथ के संपर्क में है। जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वह घर वापसी कर रहे हैं। हालांकि, यह खबर अपुष्ट सूत्रों के हवाले से बताई जा रही है। जबकि दूसरी तरफ भाजपा मध्यप्रदेश में अपनी सरकार बनाने के लिए येन केन प्रकारेण जुटी हुई है। कहा जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस से टूट कर आए 22 विधायकों को किसी भी कीमत में वापसी नहीं होने देने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई है। ऐसे में ऊंट किस करवट बैठ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता।

वहीं दूसरी तरफ आने वाले 16 मार्च को मध्यप्रदेश में विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है। उस दिन विधानसभा में कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करना पड़ सकता है। जिसमें कहा जा रहा है कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी। उसके बाद मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार बनाएगी। हालांकि, भाजपा में अभी से सीएम पद को लेकर तकरार की बात सामने आने लगी है। मध्य प्रदेश भाजपा के कुछ नेता मामा यानी शिवराज सिंह चौहान को सीएम बनाने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में नरेंद्र सिंह तोमर का एक गुट मामा को सीएम न बनाने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है।

यहा यह भी उल्लेखनीय है कि फिलहाल 228 विधायकों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास अपने 114 विधायकों समेत 7 अन्य का समर्थन हासिल है। ऐसे में उनके पास 121 विधायक हैं। वहीं अगर इन इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों की संख्या को विधासनभा की कुल सीटों में से घटा दें तो यह घटकर 206 रह जाएगी। ऐसे में बहुमत के लिए 104 सीटों की जरूरत होगी। जबकि भाजपा के पास पहले से ही 107 विधायक हैं जो बहुमत से भी तीन विधायक ज्यादा है।

