कोरोना काल के बीच पिछले साल नवंबर में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब जब असम ,पश्चिम बंगाल,केरल ,तमिलनाडु में इसी साल अप्रैल – मई में चुनाव होने हैं। ऐसे में इन दिनों एक तरफ जहां नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसानों का आंदोलन दो महीने से ज्यादा समय से जारी है वहीं अब जैसे – जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे – वैसे राज्यों के साथ – साथ देश की राजनीति भी गरमाने लगी है। असम विधानसभा चुनाव का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी सक्रियता से सूबे की सियासी सरगर्मी को बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां चुनाव से पहले पार्टी के कई विधायक पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के निधन के बाद पार्टी नेतृत्वविहीन है। नए नेता के नाम पर कांग्रेस पूरी तरह विभाजित है। इस बीच अब असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा है कि चुनाव से पहले पार्टी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करेगी। पार्टी ने कहा कि चुनाव के बाद महागठबंधन सत्ता तक पहुंचता है तो सभी दलों के साथ चर्चा के बाद तय किया जाएगा। हालांकि पार्टी की चुनावी रणनीति लोकसभा सांसद गौरव गोगोई के इर्दगिर्द ही रहेगी, ताकि भविष्य में उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जा सके।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के निधन के बाद कांग्रेस के पास कोई बड़ा नेता नहीं है। नए नेता के नाम पर पार्टी के भीतर सीएम पद के उम्मीदवार को लेकर मतभेद हैं। इसलिए पार्टी चुनाव में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मौजूदा स्थिति में पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ना है, तो बिना चेहरे के लड़ना होगा।
असम से जुड़े एआईसीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि असम में गौरव गोगोई के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। गौरव गोगोई अकेले ऐसे नेता है, जो असम के सभी भागों में असर रखते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और अपने पिता तरुण गोगोई के निधन के बाद गौरव गोगोई ने प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर सभाएं भी की हैं।
पार्टी नेता ने कहा कि चुनाव से पहले गौरव गोगोई को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने से असम कांग्रेस के अंदर गुटबाजी बढ जाएगी। इससे पार्टी को चुनाव में नुकसान होगा। इसलिए पार्टी उन्हें उम्मीदवार घोषित करने से परहेज कर रही है।लेकिन चुनाव प्रचार में उन्हें अहमियत देकर लोगों को संकेत जरुर देगी।
कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा के तमाम दावों के बावजूद महागठबंधन सत्ता की दहलीज तक पहुंच सकता है। इसके लिए वह दूसरे छोटे दलों को भी गठबंधन में शामिल करने की तैयारी कर रहा है,ताकि भाजपा और गठबंधन में सीधा मुकाबला हो। पार्टी नेता ने कहा कि मुकाबला त्रिकोणीय होता है, तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।

