पौड़ी जिला पंचायत अपनी भ्रष्ट कार्यशैली के चलते अक्सर चर्चाओं में रहा है। पंचायत में भ्रष्टाचार का खेल खेलने वाले कोई और नहीं, बल्कि उसके मातहत अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि ही हैं। पंचायत के शीर्ष पद पर रहे जन प्रतिनिधियों ने अपने परिजनों को निर्माण कार्यों की रेवड़ियां बांटकर रक्त संबंधी कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं तो वहीं दूसरी तरफ पंचायत में तैनात अधिकारी अपनी पत्नियों को ही पुरस्कृत करने में लगे रहे। जिला पंचायत के कार्यों की जमकर बंदरबांट की गई। जिला पंचायत सदस्य गौरव रावत और आरटीआई कार्यकर्ता करण रावत इस मुद्दे को लेकर सड़कांे पर उतरे, मामले में जांच की मांग की। दो-दो अधिकारियों ने जांच कराई जिसमें करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। दोनों ही जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई कराने की शासन से सिफारिश की गई है। इतना ही नहीं मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा भ्रष्ट अधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश दिए गए हैं। लेकिन कार्रवाई करने की बजाय पंचायत राज विभाग आंख मूंद कर सोया हुआ है
3 अगस्त 2021
गढ़वाल के कमिश्नर रविनाथ रमन द्वारा कराई गई पौड़ी जिला पंचायत की जांच। तीन सदस्यीय जांच के आदेशों बाद सामने आया परिणाम जिसमें करोड़ों रुपए के घोटाले की हुई पुष्टि। साथ ही जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी संतोष खेतवाल और उनके सहायक अधिकारियों को दिया गया दोषी करार। तत्कालीन कमिश्नर रविनाथ रमन द्वारा जांच रिपोर्ट को 16 अगस्त 2021 को पंचायती राज सचिव के पास कार्रवाई के लिए भेजा गया।
28 अप्रैल 2023
पौड़ी के जिला पंचायत सदस्य गौरव रावत द्वारा की गई शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी आशीष चौहान ने जिला पंचायत पौड़ी की जांच मुख्य विकास अधिकारी को दिए आदेश।
27 सितंबर 2023
पौड़ी के जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट को कार्यवाही हेतु भेजा। पंचायतीराज सचिव के पास जिसमें जिला पंचायत पौड़ी में तैनात कनिष्ठ अभियंता सुदर्शन सिंह रावत और आलोक रावत की पत्नियों के बुटोला इंटरप्राइजेज के नाम पर किए गए भ्रष्ट्राचार की पुष्टि करते हुए कार्यवाही करने और वसूली किए जाने की की गई सिफारिश।
27 दिसंबर 2023
आरटीआई कार्यकर्ता करण रावत की शिकायत पर उत्तराखण्ड के सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तराम ने लोकसभा निर्वाचन 2024 के दृष्टिगत जिला पंचायत पौड़ी में कनिष्ठ अभियंता के पद पर तैनात सुदर्शन सिंह रावत से प्रभारी अभियंता का प्रभार हटाने तथा नियमित अभियंता की तैनाती किए जाने के पंचायती विभाग को दिए आदेश। चौंकाने वाली बात यह है कि कमिश्नर पौड़ी गढ़वाल, जिलाधिकारी और उत्तराखण्ड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पंचायती राज विभाग को दोहरी जांच रिपोर्ट देने के साथ ही जिला पंचायत पौड़ी के आरोपी कनिष्ठ अभियंता को पदभार से हटाने के आदेश देने के बावजूद भी आरोपियों का बाल बांका नहीं हो पाया है। यहां तक कि ढ़ाई साल बीत जाने के बाद भी करोड़ों रूपए के इस भ्रष्टाचार मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पंचायती राज विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी हैं।
पौड़ी जिला पंचायत में घोटाले की शुरुआत 2016 में उस समय हुई जब मैसर्स बुटोला इंटरप्राइजेज का रजिस्ट्रेशन पौड़ी में करवाया गया। यह फर्म जिला पंचायत पौड़ी की उपाध्यक्ष रचना बुटोला के पति प्रवीण बुटोला के नाम से है। मैसर्स बुटोला इंटरप्राइजेज में कनिष्ठ अभियंता सुदर्शन सिंह रावत की पत्नी अपर्णा रावत और कनिष्ठ अभियंता आलोक रावत की पत्नी अंजू रावत 23-23 प्रतिशत की भागीदार हैं। इसके बाद जिला पंचायत पौड़ी में भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। अधिकारियों ने अपनी पत्नियों के नाम इस फर्म को एक ही वर्ष में लगभग 5 करोड़ के कार्य दे दिए। चौंकाने वाली बात यह रही कि विकास कार्यों की निविदा सर्वाधिक प्रकाशित अखबारों के बजाए बेहद सीमित प्रसार वाले समाचार पत्र ‘ई-पेपर, उत्तर भारत’ तथा ‘राष्ट्रीय सहारा’ के लखनऊ एडिशन में प्रकाशित कराए गए।
बताया जाता है कि 30 लाख से ज्यादा रुपए कोटद्वार के भवन में लगाए गए। एक ही निर्माण कार्य को तीन-तीन बार दिखाया गया। यही नहीं बल्कि जिला पंचायत पौड़ी में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता आलोक रावत की पत्नी को मैसर्स बुटोला इंटरप्राइजेज में पार्टनर बनाने के बाद अपने सगे भाई अखिलेश रावत जो कि पौड़ी जनपद के स्कूल में संविदाकर्मी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, को नियम विरुद्ध ठेकेदारी का रजिस्ट्रेशन करा कर जिला पंचायत में फर्जी तरीके से 70 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान करवा दिया गया। याद रहे कि किसी भी निर्माण विभाग में कार्यरत कर्मचारी का रक्त संबंधी उसी विभाग में ठेकेदारी नहीं कर सकता है। अभी कुछ समय पहले ही जल निगम में कार्यरत अभियंता का निलंबन भी ऐसे ही एक प्रकरण को लेकर हुआ था। जिसमें उक्त अभियंता ने अपने पुत्र को जल निगम में ठेका दिलवाया था। जिला पंचायत पौड़ी में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता सुदर्शन सिंह रावत (अतिरिक्त प्रभार अभियंता) एवं आलोक रावत के द्वारा 10 लाख के संपर्क मार्गों में मैकेनिकल मींस (मशीनों के द्वारा सड़क निर्माण) की बजाय मैन्युअल मींस (हाथों से सड़क निर्माण) के आधार पर भुगतान किया गया। सभी 10 लाख के संपर्क मार्गों में अधिकतर ऐसे ही भुगतान किया गया। इससे जिला पंचायत पौड़ी को राजस्व का काफी नुकसान उठाना पड़ा। जिला पंचायत पौड़ी को प्रत्येक 10 लाख के सड़क संपर्क मार्ग में करीब चार लाख का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।
जिला पंचायत पौड़ी में एक ही योजना का नाम बदलकर एक ही कार्य को तीन-तीन बार दिखाया गया। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के समीप जिला पंचायत पौड़ी अपने कर्मचारियों के टाइप 3 आवासों का निर्माण करवा रही है जिसमें बाद में नाम परिवर्तित करके मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय की ओर प्रथम भाग का नाम दिया गया। उक्त भवन के निर्माण के लिए 10-10 लाख के 8 टेंडर लगाए गए। इसमें घोटाला हुआ। कलजीखाल ब्लॉक का सकनी बड़ी नामक गांव घोटाले की वजह से चर्चाओं में रहा। यहां मातृशक्ति ने बिना किसी सरकारी मदद से श्रमदान करके सकनी बड़ी-सकनी छोटी-मेथाना तक सड़क मार्ग निर्माण कराया। जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केसर सिंह नेगी ने किया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इसी संपर्क मार्ग के नाम पर 60 लाख से ज्यादा की निधि का गबन जिला पंचायत के द्वारा किया गया। इस सड़क मार्ग को जिला पंचायत निधि का दिखाया गया, जबकि वह महिलाओं द्वारा श्रमदान से किया गया था। सोलर लाइट के टेंडर में भी करोड़ों का घोटाला हुआ। सोलर लाइट के टेंडर में बिना किसी की संस्तुति के सोलर लाइट फर्म से सीधे लेने की बजाय ठेकेदारों से लाइट लगवाई गई। जिन लाइट की कीमत 11000 के करीब थी वही लाइट 19600 से ज्यादा में लगाई गई। एक ही हेड राइटिंग में सारे टेंडर भरें गए। सभी टेंडर 50 से 70 प्रतिशत तक डाउन किए गए। इसके अलावा 10-10 लाख के तीन टेंडर ब्लॉक खिरसू के चंडी गांव में एक गूल निर्माण मरम्मत के लिए लगाए गए। जबकि यह कार्य सिंचाई विभाग का है जिला पंचायत गूल का काम ही नहीं करती। इसके बावजूद टेंडर लगाया गया। हद तो तब हो गई जब पता चला कि बिना काम किए ही अगस्त 2019 में इसका पूर्ण भुगतान भी हो गया।
जिला पंचायत द्वारा 10 लाख के संपर्क मार्ग बिना टीएस एवं सर्वे के माप पुस्तिका में ही बना दिए गए। कई संपर्क मार्ग एक ही गांव में टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए 3-3 लाख की मास्टर रोल में दिखाकर पैसा हजम कर लिया गया जबकि कई योजनाओं को दो-दो ब्लॉक में दिखाकर पैसा हड़पा गया। यही नहीं बल्कि एक ही कार्य का नाम बदल कर दो बार भुगतान किए गए। शासनादेश के अनुसार 25 लाख से ज्यादा के टेंडरों के लिए ई-टेंडर की बाध्यता है। लेकिन जिला पंचायत पौड़ी में भ्रष्टाचार इतना व्यापक है कि यहां शासनादेश को भी नहीं माना जाता। गरुड़ चट्टी का व्यवस्थान शुल्क करियर है जिसकी निविदा न्यूनतम 1 करोड़ 20 लाख से शुरू होनी थी और इसका ई-टेंडर भी होना चाहिए था। लेकिन इसका ई-टेंडर नहीं कराया गया बल्कि टेंडर लखनऊ से छपने वाले राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित कराकर अपने ठेकेदारों के नाम पर 3 साल के लिए इसका आवंटन करा लिया गया। यह आवंटन भी फर्जी हैसियत के आधार पर बनाया गया। किसी भी निर्माण कार्य के लिए किए गए कार्य की लागत माप पुस्तिका (एमबी) में हमेशा रहता है। मगर पौड़ी जिला पंचायत हमेशा की तरह इसका अपवाद रही। जो 10 लाख के संपर्क मार्ग बने हैं उसमें सबका भुगतान 940300 आता है। सबका भुगतान एक ही रेट पर किया गया है जो कि संभव ही नहीं है, क्योंकि जुलाई 2019 में जो टेंडर लगाए गए उनका भुगतान बिना कोई काम किए हुआ है। जिला पंचायत पौड़ी के पास इतना समय ही नहीं है कि माप पुस्तिका बना पाते। अगर माप पुस्तिका बनाई जाती तो संभव है कि जिला पंचायत का भ्रष्टाचार उजागर हो जाता।
बात अपनी-अपनी
जिला पंचायत पौड़ी में सेवारत दो कनिष्ठ अभियंताओं को जांच में कर्मचारी सेवा नियमावली के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। सीडीओ की जांच रिपोर्ट को कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को भेज दिया गया है।
डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, पौड़ी
ये मामला मेरे सज्ञान में नहीं है और न ही मुझे इसकी जानकारी है।
शान्ति देवी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, पौड़ी
इस मामले में मुझे अभी कोई आदेश नहीं मिला और ये मामला निदेशालय स्तर से ही उनको अभियंता का चार्ज दिया गया है। अब जो भी कार्यावाही होनी है वह भी निदेशालय से ही होनी है।
सुनील कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, पौड़ी
जिला पंचायत पौड़ी के तदर्थ कनिष्ठ अभियंता सुदर्शन सिंह रावत पर आयुक्त गढ़वाल की जांच में 1.61 करोड़ तथा जिलाधिकारी पौड़ी द्वारा रक्त संबंधी शासनादेश का उल्लघंन कर 1.50 करोड़ रुपयों को अपनी धर्मपत्नी अपर्णा रावत की फर्म को अनुचित लाभ देने की पुष्टि, मानवाधिकार आयोग द्वारा जनवरी 2024 में की गई है। शासन को इस संबंध में कार्यवाही करने, विजिलेंस विभाग में आय से अधिक संपत्ति की जांच सुदर्शन सिंह रावत के विरुद्ध चल रही है। उच्च न्यायालय में भी जनहित याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई गतिमान है। इसके बावजूद शासन इन पर कार्रवाई करने से बच रहा है, यह समझ से परे है।
करण रावत, सामाजिक कार्यकर्ता
मेरे द्वारा 6 मार्च को मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया था और 13 मार्च से तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। उसके बाद जांच हुई। परंतु सीडीओ की जांच में कुछ बिंदु निकल कर आए हैं। लेकिन गहराई से आख्या नहीं दी गई। रक्त संबंधित कानून के उलंघन का कहीं जिक्र नहीं हुआ। आचरण नियमावली का उलंघन दर्शाया गया, परंतु किन-किन नियमों का उल्लंघन हुआ उसका जिक्र नहीं है। हमने एक नारा दिया था उत्तराखण्ड सरकार से कोई बैर नहीं और जिला पंचायत पौड़ी के भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं।
गौरव रावत, जिला पंचायत सदस्य, थेर पौड़ी
इस मामले की जांच कराएंगे और जो भी न्याय संगत होता वह किया जाएगा।
हरीश चंद्र सेमवाल, सचिव, पंचायती राज विभाग, उत्तराखण्ड
मैं इस मामले को देखता हूं।
विनय शंकर पाण्डे, कमिश्नर, गढ़वाल

