Uttarakhand

भाजपा विधायक पर कोर्ट का चाबुक

विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम ऐसा स्थल है जहां से भगवान शिव और सप्तऋषियों ने अपनी तपस्या की शुरुआत की थी। कहा यह भी जाता है कि इसी जगह से शिवलिंग को पूजा जाने लगा था। आजकल यह तपोस्थली एक ऐसे कारनामे के चलते चर्चाओं में है जिसकी अपेक्षा जनप्रतिनिधियों से तो कतई नहीं की जा सकती है। उत्तराखण्ड के इतिहास में शायद यह पहला मामला है जब सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के एक विधायक ने नियमों के तहत शुरू किए गए विकास कार्यों पर रोक लगाने और टेंडर निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिख दिया। इससे भी ज्यादा अफसोसजनक यह कि देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करने वाले अधिकारी ने विधायक के पत्र पर अमल करते हुए विकास कार्यों पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया। विधायक द्वारा नौकरशाही पर नियंत्रण कर अपनी मनमानी कराने का यह अजीबो-गरीब मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो न्यायालय ने प्रशासन के कार्यों में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर न केवल नाराजगी जताई, बल्कि विकास कार्यों पर रोक लगाने के आदेश निरस्त कर दिए

 


निविदाओं को निरस्त करने संबंधित विधायक मोहन सिंह मेहरा का पत्र

‘यह देखकर दुख होता है कि जिन लोगों को जिस किसी मामले में कोई चिंता या क्षमता नहीं है, वे प्रशासन में हस्तक्षेप करने के लिए अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। प्रशासन इस तरह के दबाव में रहता है और बिना विवेक के काम करता है।’ उक्त सख्त टिप्पणी कर उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने प्रशासन के कार्यों में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर नाराजगी जताई है। सियासी पहुंच का इस्तेमाल कर प्रशासन पर नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए दबाव बनाने की नेताओं की प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट की यह नाराजगी प्रदेश के जनप्रतिनिधियों का असली चेहरा भी सामने लाती है। यह मामला अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। जहां एक मामले में सुनवाई करते हुए 21 सितंबर को हाईकोर्ट नैनीताल ने सरकारी विभागों में नेताओं के अनाधिकृत दखल को कानून संवत नहीं मानते हुए कड़ी फटकार लगाई है। उत्तराखण्ड में चर्चा का विषय बने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने जागेश्वर के विधायक मोहन सिंह मेहरा और अल्मोड़ा के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मामला जिला पंचायत में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप योजना का है। जहां के पांच विकास कार्यों पर निविदाएं आमंत्रित की गई थी। यह निविदाएं 10 मार्च 2023 को जारी की गई थी। ये योजनाएं कुल 82 लाख 44 हजार रुपए की थी जिनमें 15 लाख 23000 में ग्राम काफली में सुरक्षा दीवार निर्माण, 16 लाख 45000 में ग्राम पंचायत मटकन्या (घुरकुना) में सुरक्षा दीवार और चकवाल निर्माण, 24 लाख 77000 में ग्राम पंचायत गैराड मल्ला की अनुसूचित जाति बस्ती में धरमघर के धर्म सिंह के घर तक खड़ंजा निर्माण, 13 लाख 99000 में ग्राम सभा तितरमुची में पुलिया एवं मार्ग निर्माण, 12 लाख में ग्राम मनीआगर के भूमकिया ताके में खेल मैदान निर्माण होना था। यह टेंडर राजकीय ठेकेदार राजेंद्र दुर्गापाल के नाम 24 मार्च को आवंटित हुआ था।

 

इस दौरान राजेंद्र दुर्गापाल ने अपने नाम हुए टेंडर के चलते उक्त योजनाओं में काफी विकास कार्य भी कर दिए थे लेकिन अचानक चार माह बाद स्थानीय विधायक मोहन सिंह मेहरा को याद आया कि वह टेंडर राजेंद्र

ठेकेदार दुर्गापाल द्वारा निर्माणाधीन आरसीसी रोड

दुर्गापाल को न होकर उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को होने चाहिए थे। मजेदार बात यह रही कि चार महीने तक भाजपा विधायक चुप्पी साधे रहे और 27 जुलाई 2023 को उन्होंने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को संबोधित करते हुए एक पत्र लिख डाला। इस पत्र में उन्होंने लिखा ‘निदेशालय समाज कल्याण विभाग उत्तराखण्ड के पत्रांक 4957 दिनांक 10 मार्च 2023 के कम अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का विकास योजना के अंतर्गत कुल पांच निर्माण कार्यों हेतु 42 लाख 44000 की धनराशि स्वीकृत की गई है। ज्ञात हुआ है कि उक्त परियोजनाओं की निविदाएं कार्यदाई संस्था जिला पंचायत अल्मोड़ा द्वारा आमंत्रित की जा चुकी है। उक्त के क्रम में आपसे अनुरोध है कि कार्यदाई संस्था जिला पंचायत अल्मोड़ा द्वारा आमंत्रित निविदाओं को तत्काल निरस्त करना सुनिश्चित करें।’

विकास कार्यों की निविदाएं होने के चार माह बाद अचानक यह उक्त फरमान जारी करने वाले भाजपा के स्थानीय विधायक मोहन सिंह मेहरा के पत्र पर कितनी जल्दबाजी में अल्मोड़ा के जिलाधिकारी ने एक्शन लिया उसे इससे समझा जा सकता है कि विधायक मेहरा ने 27 जुलाई 2023 को कार्य पर रोक लगाने का पत्र लिखा और इसी दिन बिना कोई जांच कराए जिलाधिकारी विनिता तोमर ने जिला पंचायत अल्मोड़ा के अपर मुख्य अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दे दिए। साथ ही जिलाधिकारी ने यह भी लिखा कि निविदाओं को तत्काल निरस्त कर माननीय विधायक को अवगत कराया जाए। इसके अगले दिन ही जिला पंचायत अल्मोड़ा के अपर मुख्य अधिकारी ने धौलादेवी और हवालबाग ब्लॉक के कनिष्ठ अभियंता को ठेकेदार राजेंद्र दुर्गापाल को आवंटित सभी 5 कार्यों पर रोक लगाने के आदेश दे दिए।

ठेकेदार राजेंद्र दुर्गापाल द्वारा कराए जा रे विकास कार्य

इसके बाद ठेकेदार राजेंद्र दुर्गापाल ने सबसे पहले अल्मोड़ा जिला पंचायत के अपर जिलाधिकारी मुख्य अधिकारी को 21 अगस्त 2023 को पत्र लिखकर अपने विकास कार्यों पर रोक हटाने की गुजारिश की। लेकिन जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी द्वारा जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने 8 सितंबर 2023 को जिला समाज कल्याण अधिकारी अराधना त्रिपाठी को पत्र लिखकर अपने साथ न्याय की गुहार लगाई। जहां विधायक मेहरा के पत्र पर एक दिन में ही आनन-फानन में एक्शन ले लिया गया, वहीं दुर्गापाल के पत्र को कितना हल्के में लिया गया। इसको इससे समझा जा सकता है कि 9 सितंबर के पत्र को 12 सितंबर को रिसीव किया गया। पत्र को रिसीव किए जाने के बाद भी कुछ नहीं किया गया। इस पर प्रशासन के रवैये से आजिज आकर ठेकेदार राजेंद्र दुर्गापाल ने इस मामले को हाईकोर्ट नैनीताल में चुनौती दी जिसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले पर जिलाधिकारी अल्मोड़ा और जागेश्वर विधायक मोहन सिंह मेहरा को कड़ी फटकार लगाते हुए 24 अपै्रल 2024 को तलब किया है। न्यायालय ने इस मामले में ठेकेदार राजेंद्र दुर्गापाल को राहत देते हुए कार्यों पर लगी रोक हटा दी है।

जागेश्वर के भाजपा विधायक मोहन सिंह मेहरा का यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी एक ऐसा ही मामला सामने आ चुका है जिसमें वह एससीपी यानी स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत होने वाले विकास कार्य में अपनी मनमानी न होने के चलते बाधक बने हुए हैं। यह मामला धौलादेवी विकासखंड के अनुसूचित जाति के गांवों के विकास कार्यों से जुड़ा हुआ है। जहां कुल 8 से 10 योजनाएं स्वीकृत कराई गई थी। इन योजनाओं का करीब 40 लाख रुपया धौलादेवी ब्लॉक के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए स्वीकृत किया गया था। वहां इस कार्य के टेंडर भी लगा दिए गए थे। बहुत से ठेकेदारों ने टेंडर खरीद भी लिए थे। लेकिन बताया जा रहा है कि विधायक मोहन सिंह मेहरा के खास ठेकेदारों को वहां टेंडर नहीं जारी हो सके। अपने खास ठेकेदारों को टेंडर न मिलने के चलते उन विकास कार्यों को ब्लॉक से हटाकर अब जिला पंचायत अल्मोड़ा के हवाले कर दिया गया है। यहां भी टेंडर के मामलों में विवाद हो गया है। विवाद का कारण वही बताया जा रहा है।

वह यह कि धौलादेवी ब्लॉक में विधायक जो अपनी मनमानी नहीं कर पाए वह जिला पंचायत में करने की कोशिश में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि विधायक मोहन सिंह मेहरा अपने खासम-खास ठेकेदारों को यह कार्य दिलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। शायद यही वजह है कि उन्होंने अधिकारियों पर इसके लिए दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो विधायक मोहन सिंह मेहरा के कई ठेकेदार खास हैं जिन्हें वह विधायक निधि से लेकर जिला पंचायत और विकास खंडों में आवंटित होने वाले विकास कार्यों के टेंडर दिलाने में दिलचस्पी रखते हैं। हालांकि विधायक मेहरा की जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में एक सौम्य व्यवहार के जनप्रतिनिधि की छवि है। वे जिला पंचायत अल्मोड़ा का अध्यक्ष रहते अपने अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाते थे जिसकी बदौलत ही वह विधायक बने थे।

कांग्रेस ने उठाया ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल
अल्मोड़ा जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जागेश्वर के विधायक मोहन सिंह मेहरा के खिलाफ जनआक्रोश रूकने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र में विधायक द्वारा विकास कार्यों को रोकने का आरोप लगाते हुए आक्रोशित होकर लमगड़ा चौराहे में विधायक का पुतला फूंका। पुतला फूंककर भविष्य में नियम कानून को मद्देनजर रखकर भविष्य में सही काम करने की सलाह दी। साथ ही न्यायालय के आदेश के लिए संबंधित न्यायाधीशों को धन्यवाद दिया। अल्मोड़ा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुड्डू भोज ने कहा कि जागेश्वर के विधायक का मामला सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ की पोल खोलने के लिए काफी है। यह मामला तो सामने आ गया लेकिन ऐसे बहुत से मामले हैं जो अभी भी सामने आने बाकी हैं। भाजपा सरकार लगातार संविधान व कानून की धज्जियां उड़ाकर काम करने का प्रयास कर रही है। इस देश में संविधान का सम्मान करते हुए न्यायालय ने बेहद सही बात कही है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने न्यायालय से भविष्य में भी इसी प्रकार निर्णय करते हुए आम जनमानस के हितों की रक्षा करने का निवेदन भी किया।

मैं पिछले 16-17 सालों से ठेकेदारी कर रहा हूं। लेकिन कभी भी मेरे सामने इस तरह का व्यवहार किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं किया जिस तरह से स्थानीय विधायक मोहन सिंह मेहरा ने किया है। वह अपने ही ठेकेदारों और कार्यकर्ताओं को विकास कार्य दिलाने के लिए मेरे साथ षड्यंत्र कर रहे हैं। नियम कानून के तहत कॉन्टेक्ट साइन होने के बाद मेरे कार्यों का अनुबंध कराया गया था। लेकिन मुझे कोई भी कारण बताए बिना ही मेरे विकास कार्य पर रोक लगा देना कहां तक उचित है। ऐसे में जबकि मैंने अपने विकास कार्यों में काफी पैसा लगा दिया है। मेरे कई विकास कार्य अभी भी चल रहे हैं। हमारे लिए तो ठेकेदारी ही रोजगार का एक साधन है। कोरोनाकाल में हमारा सब कुछ ठप हो गया था। लेकिन उसके बाद जब ठेकेदारी करने लगे तो स्थानीय विधायक को यह रास नहीं आया। जब मेरे विकास कार्यों पर रोक लगा दी गई तो मैंने जिला अधिकारी और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र लिखकर अपने विकास कार्य शुरू करने की मांग की थी। जब मेरी मांग पर किसी ने सुनवाई नहीं की तो मुझे मजबूरन न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। जिन लोगों के खिलाफ में न्यायालय में जाकर न्याय पाया हूं वे लोग सत्तापक्ष के हैं, वह कभी भी मेरे साथ कोई अनहोनी कर सकते हैं। फिलहाल मुझे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता हो रही है। सरकार से मेरा अनुरोध है कि मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा कराई जाए।
राजेंद्र दुर्गापाल, राजकीय ठेकेदार अल्मोड़ा

 

प्रदेश में भाजपा सरकार के विधायक अपनी मनमानी कर रहे हैं। वह यह भी नहीं देख रहे हैं कि वह नियम कानून के विरोध में है। जागेश्वर विधानसभा में भी ऐसा ही हुआ है। जहां टेंडर लगाने के लिए नियम कानून के तहत काम किया गया था लेकिन उन नियमों को देखा नहीं जा रहा है। तीन- तीन बार के टेंडर तक कैंसिल किए जा रहे हैं। भाजपा विधायक सिर्फ अपने कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए विकास निधि को बांट रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो विकास का पैसा जमीन पर लग ही नहीं रहा है। वह सिर्फ बंदरबाट में ही जा रहा है। जहां तक मोहन सिंह मेहरा वाला मामला है मैं उसमें कुछ नहीं कहूंगा लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जो टेंडर स्पेशल कंपोनेंट मद के तहत स्वीकृत हुए थे वे बकायदा जिला परिषद की निर्माण एजेंसी में टेंडर लगाकर किए गए थे। टेंडर अप्रूव भी हो गए थे। ठेकेदार का काम भी शुरू हो गया था लेकिन काम प्रारंभ होने के कुछ दिन बाद विधायक जी ने जो जिलाधिकारी को उस पर रोक लगवाने के लिए पत्र लिखा है वह किसी भी नियम कानून के दायरे में नहीं आता है। इस मामले की गंभीरता को इससे भी देखा जा सकता है कि जिस तरह से हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर जबरदस्त टिप्पणी की है वह हर प्रतिनिधि पर लागू होती है।
गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक जागेश्वर

 

मैं कोई राजेंद्र दुर्गापाल ठेकेदार को नहीं जानता। मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि एससीपी के काम आए थे और वह काम मुझे अपने 12 कार्यकर्ताओं में प्रत्येक को पांच-पांच लाख बांटने थे, जो नहीं दिए गए। पहले वह 60 लाख का काम था जिसमें मेरे द्वारा सभी 12 कार्यकर्ताओं को काम डिसाइड कर दिए थे। लेकिन बाद में 84 लाख की एक स्कीम स्वीकृत कराई गई, वह स्कीम क्योंकि मेरे विधानसभा क्षेत्र की थी इसलिए मैंने उसका विरोध किया। यह तब की बात है जब चंदन रामदास समाज कल्याण मंत्री हुआ करते थे। उनसे मैंने कहा तो उन्होंने समाज कल्याण विभाग को एक चिट्ठी लिखी थी और डीएम को भी कार्यों पर रोक लगाने के लिए कहा था। इसके अलावा हमने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी इस मामले की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री जी ने विभागीय सचिव को चिट्ठी लिखी है और उसी चिट्ठी के आधार पर इस मामले की जांच चल रही है। मैंने जो सीएम साहब को चिट्ठी लिखी वह मेरे पास है और जिस डीएम की चिट्ठी की आप बात कर रहे हैं वह चिट्ठी मेरे द्वारा नहीं लिखी गई थी, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कार्यालय से ही जिलाधिकारी को भेजी गई थी। मैं एक बार फिर अपनी बात दोहराते हुए कहता हूं कि किसी भी व्यक्ति को एकमुश्त 60 लाख या 84 लाख का काम नहीं दिया जाना चाहिए। मैं इसका विरोधी हूं। मैं चाहता हूं कि वही काम 12 लोगों को मिलता तो उन्हें 5-5 लाख रुपए मिलते और उनका रोजगार चलता।
मोहन सिंह मेहरा, विधायक जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र

You may also like

MERA DDDD DDD DD