भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार को इस वर्ष प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को दिए जाने की घोषणा हो चुकी है। 75 वर्ष के मिथुन चक्रवर्ती की जिंदगी किसी रहस्यमयी वेबसीरीज से कम नहीं है। युवा अवस्था में नक्सल आंदोलन से प्रभावित गौरांग चक्रवर्ती इस आंदोलन का हिस्सा बन गया था। यही गौरांग नक्सली दुनिया से वापस लौट बॉलीवुड का सुपर स्टार मिथुन चक्रवर्ती बन सिने जगत में छा गया। 1976 में प्रदर्शित फिल्म ‘मृगया’ से अपने अभिनय का झंडा गाड़ने वाले मिथुन दा ने 1979 में पहली शादी रचाई जो मात्र चार माह में टूट गई। इसके तुरंत बाद उन्होंने ख्याति प्राप्त अभिनेत्री योगिता बाली संग विवाह रचा लिया। 1984 में प्रदर्शित फिल्म ‘जाग उठा इंसान’ की शूटिंग के दौरान मिथुन चक्रवर्ती और फिल्म की हिरोइन श्रीदेवी के मध्य प्यार हो गया। कहा जाता है कि दोनों ने गुपचुप शादी तक कर ली थी। हालांकि यह रिश्ता टिका नहीं और मिथुन योगिता बाली के पति बने रहे। 2014 से राजनीति में सक्रिय मिथुन दा एक बेहद सफल व्यवसायी भी हैं
दादा साहब फाल्के पुरस्कार इस साल मिथुन चक्रवर्ती को दिया जाएगा उनको यह पुरस्कार 8 अक्टूबर 2024 को 74वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दिया जाएगा। मिथुन ने फिल्म ‘मृगया’ (1976) से अपनी फिल्मी सफर की शुरुआत की। पहली ही फिल्म में नेशनल अवार्ड जीतकर
बॉलीवुड में अपना सिक्का जमाया। 1982 में आई फिल्म ‘डिस्को डांसर’ ने मिथुन के करियर में चार चांद लगा दिए। उन्होंने 350 से ज्यादा फिल्में की हैं। अब उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। आइए जानते हैं मिथुन दा के जीवन का सफर।
केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा करते हुए कहा कि ‘मैं यह ऐलान करते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि दादा साहब फाल्के चयन जूरी ने दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को भारतीय सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह पुरस्कार देने का फैसला लिया है। 8 अक्टूबर को 74वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिथुन चक्रवर्ती को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा है- ‘मुझे खुशी है कि श्री मिथुन चक्रवर्ती जी को इंडियन सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वो कल्चरल आइकॉन हैं। अपनी दमदार परफॉरमेंस के लिए वो पीढ़ियों से सराहे गए हैं। उन्हें बधाई और शुभकामनाएं।’
इससे पहले मिथुन को इसी वर्ष पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था। जब इस सम्मान के लिए उन्हें गृह मंत्रालय से फोन गया था वो एक मिनट के लिए शांत हो गए थे क्योंकि उनको ऐसी उम्मीद नहीं थी। अब उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने जा रहा है इसके लिए उन्होंने अपने दुनियाभर के फैंस का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा ‘सच कहूं तो इतना प्रतिष्ठित पुरस्कार पाकर मैं निःशब्द हूं। न मैं रो पा रहा हूं, न मैं मुस्कुरा पा रहा हूं। इतनी बड़ी चीज है। जहां से मैं आया हूं, उस लड़के को इतना बड़ा सम्मान मिला है, मैं सोच भी नहीं सकता। मैं ये अपने परिवार और दुनियाभर के फैंस को डेडिकेट करता हूं।’
क्या है दादा साहब फाल्के पुरस्कार
दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा जगत का सबसे बड़ा सम्मान है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा 1969 में ‘भारतीय सिनेमा के जनक’ दादा साहब फाल्के की स्मृति में दिया जाता है। उन्होंने 1913 में भारत की पहली फीचर फिल्म, ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्देशन किया था। कहा जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्होंने 15,000 रुपए खर्च किए थे, जो उस समय बहुत बड़ी राशि हुआ करती थी। उन्होंने फिल्मों को नई पहचान दिलाई। उनके योगदान को देखकर भारत सरकार ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की। इस पुरस्कार में विजेता को स्वर्ण कमल पदक के साथ प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। भारत के राष्ट्रपति विजेता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करते हैं और प्राइज के तौर पर 10,00,000 रुपए के चेक देते थे, लेकिन साल 2022 में इसे बढ़ाकर 15,00,000 रुपए का कर दिया गया। सबसे पहले दादा साहब फाल्के पुरस्कार के रूप में अभिनेत्री देविका रानी को सम्मानित किया गया था। इसके बाद पृथ्वीराज कपूर, राजकपूर, विनोद खन्ना, लता मंगेशकर, आशा पारिख, अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा समेत 53 दिग्गज इस सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। इस बार मिथुन चक्रवर्ती को 74वें सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
फिल्मी करियर की शुरुआत
कोलकाता में जन्मे मिथुन का असली नाम गौरांग चक्रवर्ती है। केमेस्ट्री से स्नातक मिथुन पढ़ाई के बाद नक्सली आंदोलन में शामिल हो कट्टर नक्सली बन गए थे। उन्होंने घर-बार सब छोड़ दिया था लेकिन भाई की एक हादसे में मृत्यु के बाद उन्होंने नक्सल आंदोलन को छोड़ अपने घर का रुख कर लिया। नक्सल से नाता तोड़ने पर उनकी जान को खतरा था लेकिन वो इससे डरे नहीं। मिथुन पढ़े-लिखे थे, अभिनय की दुनिया में करियर बनाना चाहते थे इसके लिए उन्होंने पुणे के कॉलेज से अभिनय सीखा और काम की तलाश में मुम्बई पहुंचे। मुम्बई में मिथुन ने कई दिनों तक भूखे पेट सड़कों पर रात गुजारी। काफी मेहनत के बाद उनको प्रसिद्ध अभिनेत्री हेलेन का असिस्टेंट बनने का मौका मिला। हेलेन के सहारे उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री भी मिली। उन्हें छोटे-छोटे रोल मिलने लगे। अमिताभ की फिल्म ‘दो अनजाने’ में भी उनको छोटा-सा रोल मिला था। इन छोटे रोल से मिथुन की रोजी-रोटी चलने लगी थी। फिर एक दिन की बात है जब मिथुन कॉलेज की लड़कियों को फलर्ट कर रहे थे तभी उन पर निर्माता- निर्देशक मृणाल सेन की नजर पड़ी। मृणाल सेन को मिथुन का फलर्ट करने का अंदाज बहुत पसंद आया। उन्होंने मिथुन को अपनी अगली फिल्म ‘मृगया’ के लिए साइन कर लिया। 1976 में रिलीज हुई यह फिल्म सुपरहिट रही। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए मिथुन को नेशनल अवार्ड से नवाजा गया।
सांवलेपन के चलते नहीं मिलती थी कोई हीरोइन
फिल्म ‘मृगया’ के हिट होने के बाद मिथुन की अगली फिल्म ‘सुरक्षा’ 1979 रिलीज हुई। इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और मिथुन को सुपरस्टार बना दिया। प्रोड्यूसर और डायरेक्टर की लाइन लगने लगी थी लेकिन सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे मिथुन को एक अनोखी समस्या का समाना करना पड़ा। उस दौर की स्थापित अभिनेत्रियां उनके सावले रंग की वजह से उनके साथ काम नहीं करना चाहती थी।
‘डिस्को डांसर’ ने मचाई थी धूम
मिथुन स्टार तो बन गए थे लेकिन असली पहचान उनको फिल्म ‘डिस्को डांसर’ से मिली। 1982 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए का क्लेकशन कर इतिहास रच दिया था। इस फिल्म में उनको डांस नहीं आता था लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट के मुताबिक उन्होंने डांस सीखा। फिल्म की रिलीज के बाद उनके डांस स्टैप को कॉपी किया जाने लगा। दर्शक उनके डांस स्टेप को फॉलो करने लगे थे।
लिम्का बुक में दर्ज है मिथुन का नाम
बॉलीवुड अभिनेताआंे के नाम पर कई रिकॉर्ड हैं जिसको कोई न कोई अभिनेता तोड़ता रहता है लेकिन एक ऐसा रिकॉर्ड जिसको आज तक कोई नहीं तोड़ पाया वो है मिथुन की एक साल में 19 फिल्म के रिलीज का रिकॉर्ड। ये रिकॉर्ड 1989 में बना था। मिथुन ने एक ही वर्ष में 19 फिल्मों में मुख्य भूमिका निभा एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस बात को 34 वर्ष हो गए लेकिन आज तक कोई उनका यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया।

