इसमे दो राय नहीं कि कोरोना काल में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने अपनी प्रासंगिकता को नए सिरे से स्थापित किया है। यह भी सच है कि राहुल गांधी भारत में पहले ऐसे नेता बनकर सामने आए हैं जिन्होंने कोरोना को लेकर सरकार को सबसे पहले चेतावनी देनी शुरू कर दी थी। वो भी उस समय जब देश की नरेद्र मोदी सरकार अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत की तैयारी में जुटी थी।
तब देश में कोरोना संकट की आहट ही हुई थी। उस दौरान ही राहुल गांधी ने 12 फ़रवरी 2020 को पहली बार ट्वीट कर बोला था कि कोरोना की गंभीरता को सरकार समझ नहीं रही है। शायद तब मोदी सरकार राहुल गांधी को गंभीरता से लेती और उन्हें नजरअंदाज करने की भूल ना करती तो शायद यह संकट भरे दिन आज देखने नहीं पड़े। याद रहे कि राहुल गांधी के कोरोना पर सरकार को चेताने के बाद मोदी सरकार ने क़रीब एक महीने बाद इस पर लॉकडाऊन लागू कर तत्परता से काम करना शुरू किया था। लेकिन तब तक कोरोना महामारी का वायरस देश में अधिकतर लोगों को अपनी चपेट में ले चुका था।

कोरोना महामारी पर ही नहीं बल्कि चाहे मामला केंद्र सरकार के कर्मचारियों के भत्ते का हो, या फिर वित्त मंत्री से बैंक चोरों की मुद्दे पर सवाल हो या फिर कोरोना काल में अर्थव्यवस्था। सभी को लेकर सवाल उठाते राहुल गांधी मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनते रहे हैं। फिलहाल उन्होंने एक बार फिर भारत-चीन के सामरिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को घेरा है।
आज जब देश को चीन के सीमा विवाद पर अपने 20 जवानों को खोना पडा है तो एक बार फिर राहुल गांधी सरकार के खिलाफ तनकर खडे हो गए है। राहुल गांधी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चिर परिचित अंदाज में फिर से सवाल किया है और पूछा हैं कि पीएम चुप क्यों है। वह छुपे हुए क्यों है। दो दिन पहले देश के 20 जवान शहीद हो गए हैं और प्रधानमंत्री छुपे बैठे हैं। राहुल कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी आप कहा छुपे हुए है। आप बाहर आईए हम सब आपके साथ है। आपके साथ देश है बाहर आईए और सच्चाई बताईए।
देश के वीर शहीदों को मेरा सलाम।https://t.co/hikmIWBADa
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 17, 2020
शायद यह राहुल गांधी की हुंकार का ही असर है कि 20 जवानों की शहादत के बाद भी चुप्पी साधे बैठें प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने अब अपनी चुप्पी तोड़ी है और इसी बीच पीटीआई के हवाले से खबर आ रही है कि पीएम मोदी ने देश की सभी राजनैतिक पार्टियों की शाम को एक मीटिंग बुलाई है। जिसके लद्दाख सीमा के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। खबर के मुताबिक सभी राजनैतिक पार्टियों के अध्यक्ष पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई इस मीटिंग में भाग लेंगे।
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब चीन के विवादास्पद सामरिक मुद्दे पर राहुल गांधी ने सरकार से पहली बार सवाल किया है। बल्कि इससे पहले भी वह चीन प्रकरण पर सरकार की लगातार घेराबंदी करते रहे हैं। बार बार सवाल पूछते रहे हैं। जबकि भाजपा सरकार राहुल के सवालों का गंभीरता से जवाब देने की बजाय उनके साथ चुटकियों लेती रही तो कभी शायराना अंदाज में बयां करती रही।

बात शुरू हुई थी करीब एक पखवाडा पूर्व। जब देश के गृहमंत्री अमित शाह ने सरकार की रक्षा नीति की तारीफ की थी। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भारत की रक्षा नीति को वैश्विक स्वीकृति मिली है। पूरी दुनिया इस बात से सहमत है कि अमेरिका और इजरायल के बाद यदि कोई अन्य देश अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, तो वह भारत है। इस पर राहुल गांधी ने तंज कसते हुए ट्वीट किया था कि सब को मालूम है ‘सीमा’ की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को, ‘शाह-यद’ ये ख़्याल अच्छा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध को लेकर सरकार से सवाल करते रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सवाल किया था कि क्या सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि चीन का कोई भी सैनिक भारतीय सीमा में दाखिल नहीं हुआ है। इस मामले में हुल गांधी ने बकायदा ट्वीट करते हुए कहा कि “क्या भारत सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि कोई चीनी सैनिक भारत में नहीं आया है?” इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक समाचार रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत-चीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हवाले से पूर्वी लद्दाख में सैन्य टकराव को सुलझाने के लिए 6 जून को एक शीर्ष स्तरीय सैन्य बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उंचाई पर चीनी सैनिक मौजूद थे।

याद रहे कि इससे पहले राहुल गांधी ने 29 मई को केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी और सवाल किया था। तब एक ट्वीट में, राहुल गांधी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा था कि चीन के साथ सीमा की स्थिति के बारे में सरकार की चुप्पी संकट के समय में भारी अटकलों और अनिश्चितता को हवा दे रही है। भारत सरकार को स्पष्ट करना चाहिए और भारत को बताना चाहिए कि वास्तव में क्या हो रहा है?
एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीडिया से बातचीत के दौरान 26 मई को पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने कहा था कि भारत-चीन सीमा पर क्या हुआ, इसका विवरण सरकार को लोगों के साथ साझा करना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेपाल के साथ क्या हुआ और क्यों हुआ, लद्दाख में क्या हो रहा है ये सब स्पष्ट किया जाना चाहिए। लद्दाख और चीन का मुद्दा एक जीवंत मुद्दा है। यहां पारदर्शिता की आवश्यकता है।”

लेकिन तब शायद भाजपा सरकार ने पारदर्शिता की आवश्यकता बिल्कुल भी महसूस नहीं की और ना ही राहुल गांधी के सवालों का जवाब देना मुनासिब समझा। आज जब देश अपने 20 जवान खो चुका है तो इसका अहसास अब देश की जनता को हो रहा है। देश की जनता कह रही है कि काश! अगर पहले से ही केन्द्र सरकार राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से लेती और सीमा पर चीन के साथ कठोरता से पेश आती तो उन्हें यह दिन देखने नही पड़ते। शायद माताओं के अपनी कोख के 20 लाल खपने से बच जाते।