हरियाणा की कांग्रेस राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर की चली उठापठक से तंग आकर पार्टी हाईकमान ने तंवर की जगह कुमारी सैलजा को हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष बनाया। इससे तंवर के समर्थक नाराज थे और उन्होंने दिल्ली में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के बाहर प्रदर्शन भी किया था। लेकिन उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची में रखकर पार्टी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि कांग्रेस में तंवर की भूमिका को कमतर नहीं किया जा रहा है, पर इससे तंवर और उनके समर्थकों की नाराजगी खत्म नहीं हुई। जिसके मद्देनजर तंवर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

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तंवर का खेमा अभी भी नाराज बताया जा रहा है। उन्होंने हरियाणा कांग्रेस नेतृत्व पर टिकट की खरीद-फरोख्त और इस क्रम में मेहनती पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए सैलजा ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन के लिए पार्टी की एक प्रक्रिया है और वही टिकट बंटवारे का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी एक व्यक्ति की पार्टी नहीं है और यह एक विचारधारा के आधार पर काम करने वाली पार्टी है। लेकिन अब पार्टी को लगता है की कही तंवर घर का भेदी बनकर लंका ( हरियाणा ) न ढा दे।

शायद इसी भय के मद्देनजर अब कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और कैथल से प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अशोक तंवर को लेकर बडी बात कह दी है। सुरजेवाला ने अशोक तंवर के पार्टी छोड़कर जाने को पार्टी के लिए नुकसान बताया है। सुरजेवाला का कहना है कि उनको पार्टी में वापस लाया जाना चाहिए। साथ ही इसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने हुड्डा और शैलजा के सर पर डाल दी है। सुरजेवाला ने स्पष्ट कहा कि इसके लिए कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अशोक तंवर से बात करनी चाहिए।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अगर एक भी साथी अगर छोड़कर जाए तो नुकसान होता है। अशोक तंवर जी लंबे समय तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। कुछ वैचारिक मतभेद था जो मनभेद में बदल गया। मुझे लगता है कि नए सिर से उनको दोबारा से पार्टी में समाहित करने के लिए बात की जानी चाहिए।

तंवर ने पार्टी छोड़ने के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि कांग्रेस के अंदर कुछ लोग कांग्रेस मुक्त कर रहे हैं। बकौल तंवर, कुछ लोग पांच साल एसी कमरों में बैठते हैं, विदेशों में रहते हैं और चुनाव में प्रकट हो जाते हैं लेकिन ऐसे नेताओं के कर्म देवताओं वाले नहीं बल्कि राक्षसी वाले होते हैं। तंवर ने कहा कि हमारे ऊपर हमला तक किया गया, बावजूद इसके कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि 24 अक्टूबर को नतीजे आएंगे, 20 दिन में पता चल जाएगा कि कुछ लोग कितने बड़े नेता हैं।

अब तंवर का कहना है कि वह उन उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे, जो अच्छी छवि के हैं। तंवर ने कहा है कि शुरू में मैंने 85 पार का नारा दिया था, लेकिन अब यह कांग्रेस ही होगी जो कम से कम 85 सीटों पर हार जाएगी। हुड्डा की घेराबंदी करते हुए तंवर ने कहा कि उन्होंने फिलहाल रोहतक में अपना आधार बनाया है, बाकि हरियाणा में उनकी क्या स्थिति है यह चुनाव के बाद पता चल जायेगा।

