महाराष्ट्र के सत्ता गलियारों में इन दिनों खास किस्म की उत्तेजना का माहौल बना हुआ है। कहा-सुना जा रहा है कि शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार आपसी मतभेद-मनभेद भुलाकर एक होने जा रहे हैं। चर्चा जोरों पर है कि अजित पवार की मां आशा पवार ने परिवार में एकता के लिए एक बड़ा अनुष्ठान गत् दिनों किया। इसके तुरंत बाद ही अजित पवार की पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार को भगवान का दर्जा देते हुए कहा है कि यदि दोनों पवार एक होते हैं तो इससे बड़ी बात कुछ और नहीं हो सकती। जानकारों का मानना है कि दोनों परिवारों के एकीकरण का प्रयास महाराष्ट्र भाजपा के एक बड़े नेता के इशारे पर किया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा को 8 लोकसभा सांसदों और 10 विधायकों का समर्थन मिल जाएगा। कहा यहां तक जा रहा है कि यदि ऐसा हुआ तो शरद पवार की पुत्री सुप्रिया पवार को केंद्रीय मंत्री भी बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का मानना है कि सीनियर पवार अब अपनी एकमात्र संतान सुप्रिया सुले के भविष्य की बाबत सोच रहे हैं और उनका उद्देश्य सुप्रिया के राजनीतिक भविष्य को मजबूती देना है। इस कारण यदि जरूरत पड़ी तो वो कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से नाता तोड़ एनडीए का हिस्सा बनने में हिचकिचाएंगे नहीं।

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