पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर हालात ठीक नहीं हैं।ऐसे में चालबाज चीन की चालाकी को जवाब देने के लिए भारतीय सेना हर मोर्चे पर सतर्क है। इस बीच पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस से आए पांच राफेल लड़ाकू विमान औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हुए। इस दौरान अंबाला एयरबेस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली भी मौजूद रहीं।
राफेल लड़ाकू विमान की भारतीय वायुसेना के बेड़े में एंट्री पूरी प्रक्रिया के साथ की गई। जहां सबसे पहले सर्वधर्म पूजा की गई, जिसके बाद फ्लाईपास्ट किया गया। इस दौरान तेजस, सुखोई समेत कई अन्य वायुसेना के विमानों ने एयर शो में हिस्सा लिया और अंच में वाटर कैनेन सैल्यूट के साथ राफेल लड़ाकू विमान को सलामी दी गई। वायुसेना में जब भी कोई नया लड़ाकू विमान शामिल होता है, तो इसी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, फ्रांस के उनके समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख आर के एस भदौरिया और रक्षा सचिव अजय कुमार ने शिरकत की ।
अंबाला एयरबेस पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में एयरफोर्स को 5 राफेल सौंप दिए गए । इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ फ्रांस की रक्षा मंत्री भी समारोह में शिरकत की । हरियाणा के अंबाला स्थित वायु सेना स्टेशन में एक शानदार समारोह में यह विमान वायु सेना के गोल्डन एरो स्क्वाड्रन का हिस्सा बना । अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही भारतीय वायु सेना के लिए इस दिन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदलने की ताकत रखने वाला राफेल उसके लड़ाकू विमानों के बेड़े की शान बनेगा।
इससे पहले वायु सेना के लिए तुरूप का इक्का माने जाने वाले पांच राफेल विमानों की पहली खेप 27 जुलाई को ही भारत आई थी। वायु सेना ने 59 हजार करोड़ रुपये की लागत से फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद का सौदा किया है। चार और राफेल विमानों की अगली खेप के अक्टूबर में आने की संभावना है।
इस समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी, रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन, वायु सेना प्रमुख एरिक ऑटेलेट, फ्रांसीसी वायु सेना के उप प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारीयों ने किया । राफेल विमान बनाने वाली डसॉल्ट एविएशन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रैपीयर और एमबीडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक बेरांगर समेत फ्रांसीसी रक्षा उद्योग के कई अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी वहां मौजूद रहा ।आयोजन के बाद भारतीय और फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल की द्विपक्षीय बैठक होगी।