यूपी और अविभाजित उत्तराखंड के आईएएस ऑफिसर सूर्यप्रताप सिंह को उनकी ईमानदारी और स्पष्टता के लिए जाना जाता है। उत्तराखंड के लोग आज भी उनके कार्यकाल को याद करते हुए कहते है कि उनके बाद कोई भी आईएएस ऐसा नहीं आया जो ईमानदारी और निष्पक्षता के असूलों पर खरा उतरा हो। हालांकि, 5 साल पूर्व उन्होंने सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार के चलते स्वैच्छिक सेवानृवत्ति ले ली थी। तब से वह सरकारों खासकर यूपी सरकार के खिलाफ उनके घपले-घोटाले और कमियों को उजागर करते रहते है।
यूपी की चाहे अखिलेश यादव की सरकार रही हो या वर्तमान की योगी सरकार सभी के क्रियाकलाप और कारगुजारियों को वह उजागर करते रहते है। फिलहाल वह यूपी में बढ़ते कोरोना के मामलो को सरकार द्वारा छुपाए जाने से खासे खफा थे। यूपी सरकार की “नो टेस्ट-नो कोरोना” नीति के खिलाफ उन्होंने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोला हुआ था। जिसके चलते वह सरकार के निशाने पर आ गए। उनके खिलाफ लखनऊ में मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है।
उनका कसूर सिर्फ यह था कि उन्होंने प्रदेश के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा एक जिलाधिकारी को कोरोना टेस्ट करवाने पर हड़काया था। जिसको सूर्यप्रताप सिंह ने ट्वीट के जरिए उजागर कर दिया था। हालांकि, 9 जून को उन्होंने सबसे पहले ट्वीट किया था। जिसमे उन्होंने कहा था कि अब तक यूपी में कोरोना से 283 ने तोड़ा दम, जबकि ये आंकड़े आधे-अधूरे है। यूपी की आंकड़े छुपाने की रणनीति; नो टेस्ट -नो कोरोना।
https://twitter.com/suryapsinghias/status/1270748093479374849
10 जून को सूर्यप्रताप सिंह ने एक और ट्वीट किया। जिसमे उन्होंने लिखा कि CM योगी की Team-11 की मीटिंग के बाद क्या मुख्यसचिव ने ज्यादा Corona Tests कराने वाले कुछ DMs को हड़काया कि “क्यों इतनी तेजी पकडे हो, क्या ईनाम पाना है, जो टेस्ट-2 चिल्ला रहे हो ?” चीफ सेक्रेटरी यूपी स्थिति स्पष्ट करेंगे? यूपी की स्ट्रेटेजी: ‘नो टेस्ट-नो कोरोना
इसके बाद 11 जून को उन्होंने ट्वीट किया और कहा कि यूपी में संक्रमण को छुपाने का खेल जारी है !! ऊपर के दबाब में DMs कोरोना से मरने वालों की मृत्यू का कारण कुछ और बीमारी बता रहे हैंl यूपी में केवल कागज रंगीन हो रहे हैं, खोखले दावे, पब्लिसिटी स्टंट के बल पर सच्चाई पर पर्दा डाला जा रहा हैl
https://twitter.com/suryapsinghias/status/1270920026439036929
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में कल शाम दर्ज मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्यप्रताप सिंह के 10 जून के ट्वीट का जिक्र करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि सूर्यप्रताप सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा है, “CM योगी की Team-11 की मीटिंग के बाद क्या मुख्य सचिव ने ज्यादा Corona Tests कराने वाले कुछ DMs को हड़काया कि “क्यों इतनी तेजी पकड़े हो, क्या इनाम पाना है, जो टेस्ट-टेस्ट चिल्ला रहे हो ?”@ChiefSecyUP स्थिति स्पष्ट करेंगे?” यही नहीं बल्कि पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्वीट में गलत तथ्य और गलत जानकारी हैं और इससे बड़े पैमाने पर लोगों में डर पैदा हो रहा है। सूर्यप्रताप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने के लिए अवज्ञा), धारा 505-1 (उकसाने का इरादा), और महामारी नियंत्रण नियमों के अन्य धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
हालांकि, सरकार द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद सूर्य प्रताप सिंह ने कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा कि टीम-11 पर किए मेरे ट्वीट को लेकर सरकार ने मेरे खिलाफ मुक़दमा कर दिया है। सबसे पहले तो मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश सरकार की पॉलिसी पर दिए ‘नो टेस्ट-नो कोरोना’ वाले बयान पर मैं अडिग हूं, और सरकार से निरंतर सवाल पूछता रहूँगा।
इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया और लिखा कि मैं योगी जी और यूपी पुलिस से कहना चाहता हूँ कि मुझ पर किए गए मुकदमे की कॉपी मुझतक पहुँचाने का कष्ट करें। मैं इस पूरे प्रकरण पर प्रेस कांफ्रेंस कर सभी मुद्दों पर जवाब दूँगा और सरकार से मेरे कुछ सवाल हैं उन्हें जनता के समक्ष रखूँगा। सत्य पक्ष सत्ता पक्ष पर भारी पड़ेगा।
https://twitter.com/suryapsinghias/status/1271128130007134208
कल सूर्यप्रताप सिंह ने ट्वीट किया और कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, अगर 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले पर आवाज़ उठाने पर आप मुझसे नाराज़ हैं तो उसका बदला निकालने के लिए एक अदद ट्वीट को आधार बनाने की जरूरत नहीं है। आप सीधे ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का गला घोंटते हुए भी मुझपर मुक़दमा कर सकते थे। इसके बाद किये गए ट्वीट में उन्होंने लिखा कि 25 साल में 54 ट्रान्स्फ़र जब मेरी सदनीयत व नीतियाँ नहीं बदल सके तो एक FIR क्या बदलेगी? सत्य पक्ष हमेशा सत्ता पक्ष पर भारी पड़ता है। जय हिंद।
आज एक घंटा पहले सूर्यप्रताप सिंह ने लिखा है कि योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि अन्य राज्यों से आए बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हैं, फिर आम आदमी को जाँच कराने का अधिकार क्यूँ नहीं हैं? आर्टिकल 21 के तहत क्या यह मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है? सवाल उठाने पर मुकदमा? क्या देश की सर्वोच्च अदालत इसका संज्ञान लेगी? सरकारी आदेश पढ़िए।
https://twitter.com/suryapsinghias/status/1271370581661716482
गौरतलब है कि सूर्यप्रताप सिंह 1982 बैच के आईएएस अधिकारी हैं जो 2015 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी अंतिम पोस्टिंग यूपी सरकार के प्रधान सचिव के रूप में थी। लेकिन इस सेवानिवृत्त अधिकारी को नौकरी के दौरान भी उनके मुखर स्वभाव के लिए अधिक जाना जाता था। 2015 में सेवानिवृत्त होने से छह महीने पहले उन्होंने यह कहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी थी कि ‘एक ईमानदार अधिकारी के लिए यूपी में काम करना असंभव है’।
उस समय समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। अपने वीआरएस आवेदन से पहले, सूर्य प्रताप सिंह सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेटफार्मों पर तत्कालीन यूपी सरकार की आलोचना करने के लिए चर्चा में रहे। योगी सरकार में भी उनका यही चिर परिचित अंदाज सामने आया है। जिसका हर्जाना उन्हें मुक़दमे के रूप में भरना पड़ा है।