Uttarakhand

फिर विवादों में गणेश

अक्सर विवादों में रहने वाले उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर चर्चाओं में हैं। कारण उनकी आय में अप्रत्याशित इजाफा होना है। तीन बार विधायक रहते उन्हें 36 लाख का वेतन मिला लेकिन सम्पत्ति करोड़ों में हो गई। सोशल एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने आरटीआई और एडीआर रिपोर्ट के हवाले से गणेश जोशी पर आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। सवाल है कि मंत्री ने कई करोड़ कैसे कमाए और वे दर्जनभर से अधिक मकान प्लॉट के स्वामी कैसे बन गए? याद रहे कि ये वही कैबिनेट मंत्री हैं जिनके विभाग में पहले ही करोड़ों के घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों चलते सीबीआई जांच भी जारी है

धामी सरकार में मंत्रियों के विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर आय से अधिक सम्पत्ति का मामला सामने आया है जिसमें आरोप है कि महज 15 वर्ष के भीतर ही गणेश जोशी ने करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित की है जबकि उनके चुनावी हलफनामे में किसी कारोबार के न होने की बात की गई है। बावजूद इसके उनका करोड़ों की सम्पत्ति का मालिक बन जाना सवालों के घेरे में है। धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी कृषि, उद्यान और औद्योगिक विकास ग्राम्य विकास जैसे बड़े और अहम विभागों के मंत्री हैं। इनके कृषि और उद्यान विभाग में पहले ही करोड़ों के घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं जिसमें उद्यान विभाग के मामलों में तो सीबीआई जांच भी चल रही है। साथ ही ग्राम्य विकास विभाग में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के मामले में भी भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लग चुके हैं। अब स्वयं गणेश जोशी पर आय से अधिक सम्पत्तियों के मामले ने सियासी सरगर्मियां बढ़ा दी हैं।

देहरादून के आरटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा सूचना के अधिकार तथा एडीआर रिपोर्ट से प्राप्त तथ्यों के आधार पर इस मामले का खुलासा किया है। इसके साथ ही प्राप्त प्रमाणों के साथ देश के प्रधानमंत्री और सतर्कता विभाग में इसकी शिकायत भी की है। सरकार के कैबिनेट मंत्री के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर लग रहे आरोपों से प्रदेश की राजनीति में खासी हलचल मच गई है। कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी और राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी द्वारा इस मामले में सरकार पर अपने मंत्री के खिलाफ जांच करवाने की मांग की जा रही है।

अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा सतर्कता विभाग में दी गई शिकायत में मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं जिसमें कहा गया है कि 2011 से लेकर 2022 तक गणेश जोशी के द्वारा 5 करोड़ 8 लाख 89 हजार 510 रुपए की सम्पत्ति अपनी पत्नी निर्मला जोशी, पुत्र मयंक जोशी और पुत्री नेहा जोशी के नाम से खरीदी है। इन सभी सम्पत्तियों की कुल कीमत 4 करोड़ 67 लाख 8 हजार 630 रुपए तथा इनकी रजिस्ट्री में 41 लाख 80 हजार 880 रुपए की स्टाम्प ड्यूटी चुकाई गई है। गौर करने वाली बात यह है कि महज 11 वर्ष में ही मंत्री पर एक दर्जन प्लाट और दुकानें खरीदने के आरोप हैं। गणेश जोशी का कोई कारोबार न होना और न ही खेती-किसानी करना फिर भी कुछ ही वर्षों में करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित कर लेना सवालों में है।

आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी

विकेश नेगी द्वारा कई अन्य गंभीर आरोप भी कैबिनेट मंत्री पर लगाए गए हैं। जिसमें मंत्री और विधायक रहते हुए उन्हें सिर्फ 36 लाख का वेतन मिला जबकि 2022 के चुनाव में निर्वाचन आयोग को दिए गए शपथ पत्र में आय 9 करोड़ बताई है। खुलासा यह भी किया गया है कि जब इन सम्पत्तियों को खरीदा गया तब उनके पुत्र और पुत्री उनके आश्रित ही थे। वर्ष 2007 के चुनावी हलफनामे में गणेश जोशी द्वारा अपने और अपनी पत्नी के नाम कुल 42 लाख की सम्पत्तियों की जानकारी दी गई थी। साथ ही इस जानकारी में 29 जून 2005 को 7 लाख 81 हजार की कीमत से खरीदी गई सम्पत्ति का विवरण निर्वाचन आयोग से छुपाए जाने का भी आरोप है। यह सम्पत्ति गणेश जोशी और कौलागढ़ देहरादून निवासी अरुण गुप्ता व चेतना पंत अद्वेेतानंद मार्ग ऋषिकेश के साथ साझेदारी में अमृतपाल सिंह चड्डा क्रॉस रोड देहरादून से खरीदी गई थी। इस सम्पत्ति को 2011 में 34 लाख 40 हजार में बेच दिया गया। गणेश जोशी का इसमें एक तिहाई हिस्सा था। 2017 में उनकी पत्नी निर्मला जोशी द्वारा 2 करोड़ 52 लाख 5 हजार की दो सम्पत्तियों को बेचा गया। इन दोनों ही सम्पत्तियों में गणेश जोशी का चौथाई हिस्सा था। यानी उनको 51 लाख 31 हजार की धनराशि इन सौदों के तहत प्राप्त हुई।

दिलचस्प बात यह है कि गणेश जोशी के दामाद जो कि उनकी पुत्री नेहा जोशी के पति हैं, ने 2 करोड़ 76 लाख कीमत की सम्पत्ति अपनी पत्नी को उपहार में दी जिसको नेहा जोशी ने अपने भाई मयंक जोशी दान कर दिया। अधिवक्ता विकेश नेगी के अनुसार यह पूरा मामला मनी लॅन्ड्रिंग से जुड़ा है। यह भी खुलासा किया गया है कि कि मयंक जोशी ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पूर्व ओएसडी रहे धीरेंद्र पवार के साथ सिडकुल में 45 लाख 85 हजार मूल्य का एक प्लाट पट्टे पर लिया गया है।

आरोप हैं कि वर्ष 2011 में गणेश जोशी द्वारा आयकर विवरणी में अपनी वार्षिक आय महज 3 लाख 90 हजार 692 रुपए ही घोषित की गई हैं और सभी बैंकों में 10 जमा पूंजी तथा एफडी और एनएससी से 10 लाख की आय प्राप्त होने की घोषण कर रहे हैं। इसके अलावा बच्चों की शिक्षा ऋण और अन्य कर्ज पर 29 लाख का ऋण भी उन पर बकाया था। जोशी ने 2012 के चुनाव में 9 लाख 55 हजार, 2017 के चुनाव में 24 लाख 2 हजार तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में 29 लाख 99 हजार रुपए का खर्च दिखाया गया है।

ऐसा नहीं है कि प्रदेश के सत्ताधारी नेताओं पर इस तरह के आरोप पहली बार लग रहे हैं। पूर्व में अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा के खिलाफ कई प्रमाणों के साथ आय से अधिक सम्पत्तियों के खरीदने के आरोप लग चुके हैं जिसके लिए सतर्कता विभाग में भी शिकायत की गई है लेकिन आज तक जांच के आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। इसी प्रकार राज्य के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और उनके पुत्र पर भी कई भूखंड खरीदने के आरोप लग चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि सभी आरोपों पर आरटीआई से प्राप्त जानकारी के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं और सतर्कता विभाग से इसकी शिकायत की गई है लेकिन शिकायतों पर कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हो पाई है। मंत्री गणेश जोशी के मामले में भी सतर्कता विभाग में शिकायत की गई है लेकिन पूर्व के मामलांे की ही तरह इस मामले में भी कोई जांच होगी या नहीं कहा नहीं जा सकता। अब देखना दिलचस्प होगा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली पुष्कर सिंह धामी सरकार मंत्री गणेश जोशी पर लगे आरोपों की जांच करती है या नहीं?

‘मामले की निष्पक्ष जांच हो’
मुझ पर जो भी आरोप लगाए गए हैं वह बकवास और अनर्गल हैं। मैं उत्तराखण्ड आंदोलनकारी हूं, मुझे पेंशन मिलती है जो इनकम टैक्स से मुक्त है। कहा गया है कि मुझे अभी तक 36 लाख ही वेतन मिला है जबकि आरोप लगाने वाले को यह पता ही नहीं कि मंत्री का वेतन 56 लाख रुपए है। मेरा बेटा मर्चेंट नेवी में काम करता था और बेटी का विवाह 11 साल पहले हो गया। मेरे दामाद की भी इनकम मेरी इनकम में जोड़ी जा रही है। मेरा और मेरे परिवार का पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा है। मेरी समझ में नहीं आता कि मुझ पर 5 करोड़ की सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया जा रहा है। सौ-पांच सौ करोड़ का आरोप लगता तो में इस पर रिएक्ट करता लेकिन जैसे ही मुझ पर आरोप लगाए गए मैंने तुरंत माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। मैं दोषी पाया जाता हूं तो मुझ पर एक्शन ले मेरे ऊपर जिस तरह से अनर्गल आरोप लगाए गए हैं उनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। मैं राजनीतिक व्यक्ति हूं और सरकार में मंत्री हूं। मेरे द्वारा चुनाव आयोग में जितने भी एफिडेविड दिए गए हैं वह सब पब्लिक डोमेन में हैं। कोई भी उनको पढ़ सकता है।
गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार

बात अपनी-अपनी
यह पहली बार नहीं है कि मंत्री गणेश जोशी पर इस तरह के आरोप लग रहे हों। इनके सारे विभागों में भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। इनके विभाग के घोटालों पर सीबीआई जांच के आदेश हुए जिसको रूकवाने के लिए मंत्री गणेश जोशी सुप्रीम कोर्ट तक गए लेकिन वहां से पिटा मुंह लेकर वापस आ गए। पहले भी शक्तिमान घोड़े की मौत के मामले में गणेश जोशी पर आरोप लग चुके हैं। मैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग करता हूं कि नैतिकता के आधार पर तत्काल मंत्री गणेश जोशी से त्यागपत्र लेकर उनके मामलों के खिलाफ जांच करवाएं। आय से अधिक सम्पत्ति के मामले कोई ऐसे ही नहीं लगाए गए हैं। आरटीआई और इनकम टैक्स रिटर्न से जानकारी लेकर ही आरोप लगे हैं। इन आरोपों की जांच होनी ही चाहिए और गणेश जोशी को तुरंत मंत्री पद से त्याग पत्र देना चाहिए।
करण माहरा, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखण्ड कांग्रेस कमेटी

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के पास आय से अधिक सम्पत्ति है। इसकी पुष्टि स्वयं उनके द्वारा पिछले दो-तीन चुनाव में दाखिल घोषणा पत्रों से ही हो जाती है। उनके विभाग का उद्यान घोटाला पूरेदेश में बहुचर्चित घोटाला है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इनको तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करके उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति की जांच करके कार्रवाई करनी चाहिए।
शिवप्रसाद सेमवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी

हमने विजिलेंस विभाग को सारे प्रमाण पत्र और जानकारियों के दस्तावेज सहित शिकायत दर्ज कराई है, अगर इस मामले में कोई जांच नहीं होती है तो हम माननीय न्यायालय में जाएंगे लेकिन भ्रष्टाचार के इस मामले को हम छोड़ेंगे नहीं। पहले भी हमने देहरादून के मेयर सुनिल उनियाल गामा के आय से अधिक सम्पत्तियों के पुख्ता प्रमाण सहित विजिलेंस में शिकायत दर्ज करवा चुके हैं लेकिन उसमें भी जांच नहीं हो रही है। हमें लगता है इसके लिए न्यायालय का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
विकेश नेगी, अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता, देहरादून

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