उत्तराखंड के रामनगर में भूमाफिया, शासन और प्रशासन के गठजोड़ को जोरदार झटका लगा है। गठजोड़ की यह तिकड़ी रामनगर की फल पट्टी की जमीन का लैंडयूज चेंज कर वहां कॉलोनी और व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे थे। दर्जनों एकड़ जमीन का लैंडयूज परिवर्तित कर उसे बेच दिया गया है। इस खेल का खुलासा करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट में आज एक पीआईएल दाखिल की गई थी। पीआईएल की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रामनगर के 26 गांवों के आसपास व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिये हैं। सिर्फ व्यवसायिक निर्माण ही नहीं बल्कि फल पट्टी में पेड़ काटने पर भी कोर्ट ने रोक लगाई है।
हाई कोर्ट ने यह रोक रामनगर के 26 गांवों के आसपास 27 एकड़ फलपट्टी क्षेत्र में लगाई है। व्यावसायिक निर्माणों पर तत्काल रोक लगाते हुए मुख्य सचिव, उद्यान सचिव, डीएम नैनीताल, एसडीएम रामनगर, जिला उद्यान अधिकारी को हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने फलपट्टी क्षेत्र में स्थित बगीचों से पेड़ काटने पर भी रोक लगाई है।
हाई कोर्ट में यह पीआईएल *दि संडे पोस्ट* के संपादक *अपूर्व जोशी* ने दायर किया था। पीआईएल में कहा गया है कि रामनगर के 26 गांवों को फलपट्टी संरक्षण एवं फलदार वृक्ष संवर्धन के तहत फलपट्टी घोषित करते हुए अधिसूचना जारी की गई थी। अधिसूचना में निजी आवास को छोड़कर कॉलोनी, उद्योग, व्यावसायिक निर्माण आदि को प्रतिबंधित किया गया था पर 2002 के बाद इसका उल्लंघन कर बगीचों में कॉलोनियों की अनुमति प्रदान की गई।
पिछले 12 साल में 27 हेक्टेयर भूमि को अकृषि कर दिया गया। यही नहीं पिछले तीन साल में रामनगर एसडीएम ने 26 हेक्टेयर भूमि का उपयोग बदल दिया। पांच माइनिंग स्टॉक, छह स्टोन क्रशर के साथ ही पेड़ों को काट कर कॉलोनी बसाने की अनुमति प्रदान की गई।
याचिका में यह भी कहा गया है कि फलपट्टी के 26 गांवों के आसपास का तीन किलोमीटर का क्षेत्र बफर जोन है, जिसमें किसी भी तरह की निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। जबकि अधिकारी भूमाफिया से मिलकर फलदार पेड़ की कटाई और कृषि भूमि को अकृषि घोषित कर रहे हैं। रामनगर का यह फलपट्टी क्षेत्र समाप्ति के कगार पर है।
आज यानी 31 अगस्त को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य सचिव एवं अन्य को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इन गांवों के आसपास उद्यान लगाने, खनन सामग्री का स्टॉक करने और आवासीय कॉलोनियों, स्टोन क्रशर लगाने पर रोक लगा दी।

