शिकारी अक्सर शिकार करता है तो वह अपना बचाव पहले ही कर लेता है लेकिन हम जिस शिकारी की बात कर रहे हैं वह न केवल शातिर है, बल्कि 1998 बैच के दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप सिविल सेवा (दानिक्स) अधिकारी रह चुका है। नाम है प्रेमनाथ, जिसे दिल्ली का नटवरलाल भी कहा जाता है। यह नटवरलाल दोनों हाथों से दिव्यांग है लेकिन जिस तरह के आपराधिक कृत्यों में यह शामिल रहता है उससे लगता है कि वह दिमाग से भी दिव्यांग है। दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड सहित कई राज्यों में झूठ-फरेब, छल.प्रपंच के बल पर जमकर लूट मचाने और अकूत संपत्ति का साम्राज्य खड़ा करने वाले इस भ्रष्ट अधिकारी पर केंद्र सरकार की गाज गिर चुकी है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने पिछले साल इसे जबरन सेवानिवृत्ति दे दी थी। कहते हैं कि आखिर में सत्य की ही विजय होती है और अंत में इस कदाचारी, भ्रष्टाचारी और व्यभिचारी पूर्व अधिकारी के झूठ का पर्दाफाश होता है। जिसमें पत्रकार से लेकर जज और पुलिस ऑफिसर इसके बनाए भ्रष्टतंत्र के जाल से निकल बेदाग साबित हो चुके हैं। पूर्व में देवभूमि उत्तराखण्ड में अपनी काली करतूतों के जरिए यह नाबालिक बच्ची के साथ दुराचरण मामले में महीनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहा है। अल्मोड़ा जिले के डांडा-कांडा में ‘प्लीजेंट वैली फाउंडेशन’ के जरिए भ्रष्टाचार का भवन बनाकर अपनी अवैध गतिविधियों को संचालित करने वाला यह नटवरलाल अपने कर्मों की सजा पाने के बावजूद भी बार-बार ऐसी हरकत करता रहता है जिससे अधिकारी वर्ग शर्मसार होता रहा है। फिलहाल ऐसे ही एक मामले में फिर से वह अपने ही जाल में फंस चुका है। इस बार प्रेमनाथ द्वारा जो जाल बिछाया गया वह दिल्ली सरकार में तैनात भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी वाईवीवीजे राजशेखर को फांसने का था। राजशेखर तो साफ बच गए लेकिन वही जाल अब प्रेमनाथ के लिए काल बन सामने आया है और एक बार फिर से वह जेल की सलाखों के पीछे है
घटना – एक
19 मई 2023 : नकुल कश्यप नामक एक शख्स के नाम से दिल्ली के विशेष सचिव (सेवाएं और सतर्कता) वाईवीवीजे राजशेखर पर अनुकंपा पर नियुक्ति के बदले रिश्वत मांगने और जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दिल्ली सरकार के सेवा विभाग के मंत्री सौरभ भारद्वाज को दी गई थी। इस पर वाईवीवीजे राजशेखर के खिलाफ जांच बैठाई गई।
घटना – दो
12 जून 2023 : वाईवीवीजे राजशेखर ने अपने खिलाफ कदाचार और भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले नकुल कश्यप के खिलाफ दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस थाने में दी शिकायत में अपने खिलाफ झूठे आरोप लगाने की तहरीर दी। जिसमें राजशेखर ने कहा कि नकुल कश्यप ने सेवा विभाग के मंत्री सौरभ भारद्वाज को दी शिकायत में कहा था कि वह मार्च में दिल्ली सचिवालय में उनके कार्यालय में उनसे मिलने आए थे। लेकिन बिल्डिंग के विजिटर्स रिकॉर्ड से पता चला कि वह मार्च और मई के बीच नहीं आए हैं। उन्होंने दावा किया कि विभाग के भीतर काम के आवंटन के अनुसार वह अनुकंपा के आधार पर नौकरी के मामले नहीं देख रहे थे। अपने पिता की जगह अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग करने वाले नकुल कश्यप का आवेदन उनके सामने कभी रखा ही नहीं गया था। राजशेखर ने अपनी बातों के पक्ष में सचिवालय में आगंतुक प्रबंधन प्रणाली का रखरखाव करने वाले पीडब्ल्यूडी और सेवा विभाग के जवाब संलग्न किए। साथ ही उन्होंने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए कहा कि दिल्ली पुलिस कम्प्यूटरीकृत आगंतुक प्रबंधन प्रणाली सहित दिल्ली सचिवालय के विभिन्न मंजिलों के एंट्री प्वाइंट्स के सीसीटीवी फुटेज जब्त कर जांच कर सकती है।
घटना – तीन
16 जून 2023 : जिस नकुल कश्यप के नाम से राजशेखर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था उसी नकुल ने दिल्ली के आईपी स्टेट थाने में प्रेमनाथ के खिलाफ आईपीसी के तहत धारा 417 (धोखाधड़ी), 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 468 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने) 471 (जालसाजी का उपयोग करके धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज कराई जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि राजशेखर के खिलाफ झूठी शिकायत करने के लिए उन्हें दिल्ली सरकार के एक अधिकारी प्रेमनाथ ने प्रेरित किया था। उन्होंने उसे वाईवीवीजे राजशेखर के खिलाफ एससी,एसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा था। इसके लिए एवी प्रेमनाथ ने नकुल कश्यप की फर्जी ई-मेल आईडी बनाई थी और दिल्ली सरकार के विभिन्न अधिकारियों को वाईवीवीजे राजशेखर के खिलाफ नकुल कश्यप के नाम से झूठी शिकायत मेल की थी।
घटना – चार
3 नवंबर 2023 : वाईवीवीजे राजशेखर के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए आरोपों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत करार दिया है। अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर शिकायतों में धमकी देने, परेशान करने, पद का दुरुपयोग करने और इस तरह के अन्य कृत्यों में शामिल रहने का आरोप लगाया गया है। समिति की जांच रिपोर्ट कहती है कि राजशेखर के खिलाफ शिकायतों में लगाए गए आरोप बेबुनियाद, मनगढ़ंत और काल्पनिक हैं तथा ये अधिकारी पर कीचड़ उछालने की प्रकृति के हैं।
घटना – पांच
22 जनवरी 2024 : एवी प्रेमनाथ ने एफआईआर को रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। कई बार नोटिस देने के बावजूद प्रेमनाथ जांच में शामिल नहीं हुआ। वह भूमिगत हो गया और सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया। लेकिन उसे भी कोर्ट द्वारा 21 फरवरी को खारिज कर दिया गया। फिर 22 फरवरी को ट्रायल कोर्ट से आरोपी एवी प्रेमनाथ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया। उसका पता लगाने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई और कई जगहों पर छापेमारी की गई। निरंतर प्रयासों के बाद भी एवी प्रेमनाथ का पता नहीं लगाया जा सका।
घटना – छह
5 मार्च 2024 : आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में बच्ची राम के नाम से प्रेमनाथ फर्जी टिकट पर तिरुपति के लिए यात्रा कर रहा था। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तीस हजारी कोर्ट में पेश किया। जहां मजिस्ट्रेट दिव्या गुप्ता ने प्रेमनाथ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गौरतलब है कि बच्ची राम प्रेमनाथ क संस्था प्लीजेंट वैली फाउंडेशन में कार्यरत कर्मचारी और प्रेमनाथ की विश्वस्त सहयोगी बताया जाता है।
नकुल कश्यप का कथन
मामले को पूरा समझने के लिए नकुल कश्यप द्वारा 16 जून 2023 को दी गई शिकायत में दिए गए विवरण को सिलसिलेवार देखना होगा जिसमें वह कहते हैं कि ‘मैं नकुल कश्यप गौतम पुरी नई दिल्ली का रहने वाला हूं और अनुसूचित जाति से संबंट्टा रखता हूं। मेरे पिता रमेश बाबू एलएनजेपी अस्पताल में सरकारी कर्मचारी थे और एक नर्सिंग अर्दली थे। 2016 में ड्यूटी पर रहते उनकी मृत्यु हो गई। मैंने अनुकंपा के आधार पर दिल्ली सचिवालय में नौकरी के लिए आवेदन किया था। अपने आवेदन के संबंट्टा में, कई वर्षों से अपनी नौकरी के बारे में पूछताछ करने के लिए दिल्ली सचिवालय आता था। इसी दौरान करीब डेढ़ साल पहले मेरे एक रिश्तेदार ने मुझे सचिवालय में काम करने वाले प्रेमनाथ नाम के एक अधिकारी से मिलवाया। प्रेमनाथ ने मुझे नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया साथ ही यह भी बताया कि वह ‘आप’ सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज को जानते हैं वह मुझे नौकरी दिलाने में मदद करेंगे। मुझे उनके आश्वासन पर विश्वास था कि वह मेरी मदद करेंगे। इस दौरान प्रेमनाथ मुझसे कई बार मिले। लगभग एक महीने पहले उन्होंने मुझे मोबाइल नंबर 8384001874 से फोन किया और मुझे पटियाला हाउस कोर्ट में नोटरी के पास बुलाया। वहां उन्होंने मुझे कुछ दस्तावेज दिए और कहा कि उन्होंने सौरभ भारद्वाज से भी बात की है और राजशेखर साहब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर हम दोनों काम करा देंगे और तुम्हें नौकरी पर रख लेंगे। उन्होंने मुझसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए और कहा कि शिकायत के बारे में ज्यादा समझने की जरूरत नहीं है, इससे तुम्हें नौकरी पाने में मदद मिलेगी। करीब 15 दिन पहले प्रेमनाथ का फोन आया कि आपकी और सौरभ भारद्वाज की मुलाकात तय हो गई है जिसके बाद मेरी मुलाकात दिल्ली सचिवालय में 7वीं मंजिल पर सौरभ भारद्वाज से हुई। उन्होंने मुझे अपनी शिकायत पर कायम रहने को कहा और मुझे नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। लेकिन आज जांच के दौरान मुझे पता चला कि उस शिकायत में यह उल्लेख किया गया था कि राज शेखर जी ने मेरे खिलाफ जाति सम्बंध टिप्पणी की थी और उन्होंने मेरा अपमान किया था, जो बिल्कुल गलत है। मैं राजशेखर जी से कभी नहीं मिला हूं और आपकी जांच में शामिल होने के बाद ही मुझे पता चला कि कई लोगों ने मेरे नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर फर्जी शिकायतें की हैं। न तो मुझे ईमेल आईडी बनानी आती है और न ही मुझे इसका उपयोग करना आता है। मेरे पास केवल एक मेल आईडी है वह मेरे फोन में है जो मैंने दुकान के मालिक से बनवाई थी, जो naculkashyap1708@gmail.com है। मैंने किसी ईमेल के माट्टयम से कोई शिकायत भी नहीं दी है। 13 जून 2023 को प्रेमनाथ ने मुझे अपने नंबर 8384001874 से व्हाट्सएप पर कुछ फोटो भेजे, जिसके साथ उन्होंने लिखा कि वाईवीवीजे राजशेखर सेवा विभाग के सचिव हैं, उनकी उम्र 55 वर्ष है और उनका कार्यालय दिल्ली सचिवालय की सातवीं मंजिल पर है। मैंने उससे पूछा कि वह कौन है। उन्होंने बताया कि ये राजशेखर है। इस व्यक्ति को पहचाने। सौरभ भारद्वाज ने ये मैसेज दिया है कि इस शख्स को पहचानिए। मैंने विधानसभा में भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी और जब 13 जून 2023 को दिल्ली विधानसभा से नोटिस आया तो मैं आर.जे. के साथ दिल्ली विधानसभा गया था। वहां प्रेमनाथ द्वारा मुझे खान एडवोकेट एवं सौरभ भारद्वाज से मिलवाया गया। विधानसभा में मेरी ओर से अधिवक्ता ने बात रखी और सुरक्षा मांगी। मुझे तब जाकर पता चला है कि एक आपराधिक साजिश के तहत सौरभ भारद्वाज और प्रेमनाथ ने मुझे नौकरी दिलाने का झूठा वादा और धोखाधड़ी की है। मेरे नाम से एक फर्जी मेल आईडी बनाकर दिल्ली सरकार के अट्टिकारी वाईवीवीजे राजशेखर के खिलाफ झूठी शिकायत की थी। इसका फर्जी तरीके से उपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर साजिश रची गई। जिसके खिलाफ मैं कानूनी कार्रवाई करवाना चाहता हूं। मैं आज तारीख 27 मई 2023 को सबूत के तौर पर अपना एमएसजी मोबाइल आपको सौंप रहा हूं।
क्या है राजशेखर के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट
19 मई 2023 को नकुल कश्यप के नाम से आईपी स्टेट थाने में एक शिकायत की गई थी। जिसमें वाईवीवीजे राजशेखर, विशेष सचिव (सेवाएं) के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत मामला दर्ज कराया गया था। जिसमें कहा गया कि दिनांक 01 अक्टूबर 2021 को सेवा विभाग के वाईवीवीजे राजशेखर ने मेरे द्वारा दिए गए अनुकंपा नौकरी आवेदन पत्र को मेरे चेहरे पर फेंककर बहुत गुस्सा दिखाया और मेरे साथ दुर्व्यवहार किया। उस समय कमरे में सेवा विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा कि पहले से ही इतने सारे हरिजन आरक्षण के माधयम से दिल्ली सरकार में काम कर रहे हैं और अनुकंपा के आधार पर और अधिक हरिजनों को नौकरी नहीं दी जानी चाहिए। मैं उनके व्यवहार और जातिगत दुर्व्यवहार से स्तब्ट्टा था। मुझे स्टाफ के सामने अपमानित महसूस हुआ, इसलिए, उनके खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोट्टा किया गया है।
क्या कहा राजशेखर ने
वाईवीवीजे राजशेखर द्वारा 12 जून 2023 को एक शिकायती पत्र थानाध्यक्ष आईपी स्टेट को लिखा गया जिसमें कहा 10 जून 2023 की रात को मुख्य सचिव के साथ-साथ सचिव (सतर्कता) को ईमेल आईडी नकुल कश्यप 1717/हउंपसण्बवउ के माट्टयम से मोबाइल नंबर 9999442761 और स्रोत की जानकारी का उल्लेख करते हुए मेल भेजे गए थे।
वे एक फर्जी मेल आईडी है और प्रेमनाथ के आदेश पर शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। जबकि नुकुल कश्यप ने इस ईमेल आईडी के माट्टयम से ये शिकायतें दर्ज ही नहीं की हैं।
जांच में आया यह सच
वाईवीवीजे राजशेखर के उपरोक्त दावे को सत्यापित करने के लिए, ळववहसम से ईमेल आईडी विवरण सत्यापन किया गया और Google द्वारा बताया गया कि उपरोक्त ईमेल आईडी 10जून 2023 को 2405ः201ः4000ः2802ः12 से बनाई गई हैः 734f:4749:3a4c IP पता और इंटरनेट सेवा प्रदाता श्रपव से आगे सत्यापन करने पर यह पाया गया कि स्रोत Mac के लिए उपयोगकर्ता a8da.0cad.72 bc इब है और यह आरती प्रेमनाथ के नाम पर है। चूंकि उपरोक्त ई-मेल दिनांक 10 जून 2023 को बनाया गया था। जांच अधिकारियों द्वारा इसे सत्यापित करने के लिए, शिकायतकर्ता नकुल कश्यप को भी तथ्यों को सत्यापित करने के लिए बुलाया था। तथ्यों के सत्यापन के दौरान नकुल कश्यप ने जाति आट्टारित किसी भी बात से इनकार करते हुए अपना हस्तलिखित बयान भी दिया कि वाईवीवीजे राजशेखर द्वारा उनके खिलाफ की गई टिप्पणी झूठी है। और वह श्री वाईवीवीजे राजशेखर से कभी नहीं मिले। उन्होंने यह भी कहा कि ई-मेल आईडी दंबनसांलंच1717/हउंपसण्बवउ उनकी नहीं है और उनके द्वारा बनाई गई नहीं है। उनकी ई-मेल आखिरी
दंबनसांलंच1708/हउंपसण्बवउ है। उन्होंने आगे कहा कि प्रेमनाथ, जो दिल्ली सरकार में एक अट्टिकारी हैं, ने उन्हें नौकरी दिलाने का लालच देकर धोखा दिया। उनके नाम से दर्ज शिकायत के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इन साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर 16 जून 2023 को आईपीसी की धारा 417/419/468/471/129बी के तहत प्रेमनाथ पर दिल्ली स्थित आईपी स्टेट थाने में इंस्पेक्टर गणेश द्वारा मुकदमा दर्ज किया गया।
जज के खिलाफ किया था फर्जीवाड़ा
29 अगस्त 2010 को ‘दि संडे पोस्ट’ में प्रकाशित समाचार में खुलासा किया गया था कि आशा यादव नाम की महिला ने सौ नाली जमीन मैणी, हवालबाग तहसील में खरीदी है यह आशा यादव और कोई नहीं बल्कि ‘प्लीजेंट वैली फाउंडेशन’ की संचालिका आशा प्रेमनाथ हैं जो कि एवी प्रेमनाथ की पत्नी हैं। इन आशा प्रेमनाथ उर्फ आशा यादव ने फर्जी खसरा, खतौनी के जरिए खुद को उत्तराखण्ड का मूल निवासी बताते हुए यह जमीन खरीदी है। समाचार में प्रस्तुत तथ्य सही पाए गए और शासन ने इस जमीन की खरीद को खारिज कर उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी। जांच में पाया गया कि इस जमीन की खरीद के लिए प्रस्तुत पता व खतौनी दोनों गलत हैं कि मूल खतौनी में छेड़छाड़ कर भूमिधर का नाम हटाकर आशा यादव का नाम लिख दिया गया है। आशा यादव पूरी कार्रवाई के दौरान प्रकट नहीं हुईं तो शासन द्वारा उपयुक्त कार्रवाई करते हुए 2011 में उपरोक्त भूमि को सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। वर्ष 2013 में अल्मोड़ा कोतवाली में धोखाधड़ी के इस मामले में आशा यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ था। जिसके बाद पूरे मामले की सुनवाई अभिषेक कुमार श्रीवास्तव सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में चली। 15 जनवरी 2021 को सह अभियुक्त चंद्र मोहन सेठी के कनाडा जाने के कारण उनका नाम पत्रावली से अलग करने के आदेश दिए गए और आरोपी आशा यादव के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपित आशा यादव ने अपने पति एवी प्रेमनाथ और कुसुम यादव उर्फ चौधरी के साथ मिलकर सिविल जज सीनियर डिवीजन अभिषेक कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया। जिसमें कहा गया कि जज अभिषेक श्रीवास्तव व उनके परिजनों को आरोपित चंद्र मोहन सेठी दिल्ली आदि स्थानों में ले गए जिसके बाद उनका नाम फाइल से हटा दिया गया और आशा यादव के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। जनवरी 2021 में आशा यादव और उनको जमीन बेचने वाले चन्द्रमोहन सेठी की फाइल को इस आधार पर अलग किया गया कि सेठी फिलहाल कनाडा में हैं और आशा यादव के खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी कर दिया गया है।
हाईकोर्ट ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए सिविल जज सीनियर डिविजन अभिषेक कुमार श्रीवास्तव को अल्मोड़ा से निलंबित कर देहरादून अटैच कर दिया। मामले की पूरी जांच विजिलेंस को सौंप दी गई। इसके बाद कुसुम चौधरी के नाम से न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की गई। न्यायाधीश अभिषेक श्रीवास्तव के खिलाफ हाई कोर्ट को झांसे में लेने की कोशिश का विजिलेंस विभाग द्वारा पर्दाफाश किए जाने के बाद प्रेमनाथ ने विजिलेंस के ही जांच अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रेमनाथ के इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हाईकोर्ट उत्तराखण्ड की विजिलेंस जांच से सामने आ गया। इस जांच रिपोर्ट में विजिलेंस पुलिस ने जज अभिषेक श्रीवास्तव के खिलाफ लिखी गई फर्जी शिकायतों का मास्टरमाइंड एवी प्रेमनाथ को करार दिया है विजिलेंस ने जज के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करते हुए पाया कि वे झूठे और निराधार हैं। जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता कुसुम चौधरी और कोई नहीं आशा यादव की ही एक कर्मचारी है। कुसुम चौधरी मामूली पढ़ी-लिखी हैं जबकि उच्च न्यायालय को भेजा गया पत्र सधी हुई अंग्रेजी में लिखा गया था। पत्र की मूल प्रति को आशा यादव द्वारा संचालित अल्मोड़ा स्थित एनजीओ के कार्यालय के कम्यूटर में तैयार करने के भी साक्ष्य मिले। जांच में यह भी पाया कि रनकहमेवनिजजंतांंदक/ हउंपसण्बवउ की जिस मेल आईडी से जज अभिषेक कुमार श्रीवास्तव के बारे में उत्तराखण्ड के विभिन्न न्यायिक अधिकारियों को भ्रामक सूचनाएं भेजी गई वह एवी प्रेमनाथ द्वारा बनाया व संचालित था। इसी तरह के कई अन्य साक्ष्यों के आधार पर पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीद मामले की अभियुक्त आशा यादव और उनके पति एवी प्रेमनाथ ने कुसुम चौधरी के साथ मिलकर हाईकोर्ट, नैनीताल में झूठी शिकायत करने का यह षड्यंत्र रचा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद मार्च 2021 में प्रेमनाथ और उसकी पत्नी आशा प्रेमनाथ पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और दोनों के खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी किया गया है।
प्रेमनाथ हो चुका है जबरन सेवानिवृत्त
1997 बैच के दिल्ली, अंडमान, निकोबार, आइसलैंड सिविल सर्विस (दानिक्स) अधिकारी एवी प्रेमनाथ पर भ्रष्टाचार के मामले सिद्ध हो जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2023 को उसे तत्काल प्रभाव से जबरन रिटायर कर दिया है। तीन महीने का अग्रिम वेतन देकर सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। यह वही प्रेमनाथ है जिसने अल्मोड़ा जिले के डांडा-कांडा और मैणी गांव में छल, कपट कर प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के माध्यम से प्रपंच रचा। फर्जी तरीके से सैकड़ों नाली जमीन खरीदी और सरकारी जमीन पर अपने एनजीओ की बेशकीमती इमारत खड़ी कर दी।
भ्रष्टाचार में गहरे तक धंसे एवी प्रेमनाथ को दिल्ली की नौकरशाही में ‘नटवरलाल’ की संज्ञा तक दे दी गई थी। उस पर कुल पांच मामले दर्ज हैं। गत् वर्ष इस अधिकारी ने देवभूमि उत्तराखण्ड में एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की घटना को अंजाम देकर अधिकारी वर्ग को शर्मसार कर दिया था। पॉक्सो एक्ट के तहत अल्मोड़ा जेल में दो माह तक रहने के बाद जब वह जमानत पर दिल्ली आया तब तक उसे निलंबित किया जा चुका था। निलंबन से पहले प्रेमनाथ दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग में तैनात था। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2023 को प्रेमनाथ को जबरन सेवानिवृत करते हुए अपने आदेश में कहा है कि ‘वह प्रेमनाथ को सार्वजनिक हित में सेवा से सेवानिवृत्त करने के लिए मौलिक नियमों के नियम 56 (जे) के उप नियम 1 और सीसीएस (पेंशन) नियम 1965 के नियम 42 द्वारा प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं। नियमों के अनुसार केंद्र सरकार को सार्वजनिक हित में ईमानदारी की कमी और अप्रभाविता के आधार पर सरकारी अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का पूर्ण अधिकार है।’
भ्रष्टाचार उन्मूलन एक्ट के तहत हो चुका है मुकदमा दर्ज दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो ने अल्मोड़ा के डांडा-कांडा में जाकर स्थलीय निरीक्षण कर संपत्ति का मूल्यांकन किया। जहां प्रारंभिक मूल्यांकन से पता चला है कि परियोजना में 12.31 करोड़ रुपए का भारी निवेश किया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने अपनी जांच में प्रेमनाथ को कुल सेवा काल के दौरान (1 मई 1998 से 31 मार्च 2023 का वेतन भत्ता आदि) सबकुछ मिलाकर कुल 1 करोड़ 75 लाख के आय का आकलन किया है। ऐसे में 10 करोड़ रुपया कहा से और कैसे जुटाया गया यह जांच का विषय है। साथ ही एवी प्रेमनाथ के परिवार के सदस्यों के नाम पर भी उत्तराखण्ड के साथ ही देश के कई राज्यों में अकूत सम्पत्तियां अर्जित करने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। एंटी करप्शन ब्यूरो को यह जांच आगे जारी कर संपत्ति का सही मूल्यांकन किया जाना था जिसमें ‘प्लीजेंट वैली फाउंडेशन’ के निर्माण कार्यों की लागत कई गुना बढ़ने की संभावना थी लेकिन उत्तराखण्ड सरकार के असहयोग चलते जांच टीम जांच को आगे बढ़ाने में सफल नहीं हो सकी। जांच में प्रेमनाथ की नामी-बेनामी अकूत संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा सामने आने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने 16 जून 2023 को भ्रष्टाचार उन्मूलन एक्ट के तहत प्रेमनाथ पर मुकदमा दर्ज कर लिया।
‘आप’ के मंत्री सौरभ भारद्वाज और राजशेखर


वाईवीवीजे राजशेखर वहीं अधिकारी हैं जिन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय के खिलाफ फर्जीवाड़े के मामले में दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक पत्र के आधार पर शुरुआती जांच करने के बाद विभाग के विशेष सचिव राजशेखर ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। आईएएस अधिकारी राजशेखर ने ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास में करोड़ों रुपए से रेनोवेशन मामले की जांच की थी और पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट उन्होंने उपराज्यपाल को सौंप दी है। इसके अलावा सरकार में घोटाले की कई शिकायतों की जांच राजशेखर कर रहे हैं।
शायद यह राजशेखर का आम आदमी पार्टी के खिलाफ जांच का ही नतीजा रहा कि मंत्री सौरभ भारद्वाज उन पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे हैं। राजशेखर पर नकुल कश्यप द्वारा की गई कथित शिकायत मामले में भी सौरभ भारद्वाज का नाम आया है। यही नहीं बल्कि राजशेखर पर सौरभ भारद्वाज आरोप लगा चुके हैं कि राजशेखर का सीबीआई, सीवीसी और सतर्कता के रडार पर रहने का इतिहास रहा है। साथ ही संवेदनशील फाइलों को अनाधिकृत रूप से अपने कब्जे में रखने की उनकी आदत रही है। गत दिनों जब सर्विसेस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पक्ष में आदेश दिया था, तब दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने राजशेखर से जिम्मेदारी वापस ले ली थी। हालांकि बाद में दिल्ली के उपराज्यपाल ने उन्हें बहाल कर दिया था।

नाबालिग बच्ची संग दुराचरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर लगी रोक हटा दी है लेकिन उत्तराखण्ड सरकार अभी भी
खामोश है।

