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‘प्रेरणादायक रोल करना चाहती हूं’

उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले की रहने वाली अंकिता परिहार फिल्मी दुनिया की उभरती हुई अभिनेत्री हैं। इनकी कुमाऊंनी फिल्म ‘माटी पछ्याण’ और गढ़वाली फिल्म ‘यु कनु रिस्ता’ को दर्शकों ने बहुत सराहा है। इस फिल्म को हरियाणा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट जूरी च्वाइस अवार्ड भी मिल चुका है। यह फिल्म अरावली इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल के लिए चुनी गई है। अंकिता परिहार डांसर हैं। ‘माटी पछ्याण’ से इन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इनके डांस के कई वीडियो यू ट्यूब पर उपलब्ध हैं। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए अंकिता को इसी माह 11वां उत्तराखण्ड सिने अवार्ड मिला है। इस फिल्म को अन्य कैटगरी में भी अहम स्थान दिया गया है। ‘दि संडे पोस्ट’ संवाददाता अमित कुमार संग बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘लड़कियों को सही रास्ता मिलना चाहिए। मैं उन लड़कियों से कहना चाहती हूं जो एक्टिंग करना चाहती हैं वे अपनी बुद्धि और विवेक न खोएं। जल्दी प्रसिद्ध होने की इच्छा न रखें। दुनिया के आगे अपना नाम लाने के लिए काफी समय लगता है। इसके लिए पेशेंस जरूरी है। जल्दबाजी में जो लोग राई का पहाड़ बनाते हैं। हम तुम्हेें ऐसी हिरोइन बना देंगे। ये प्रोजेक्ट हैं। इतने लाखों में खेलोगे उनकी बातों में नहीं आना। अभिनय की इस लाइन में सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है

आप ने कब निर्णय लिया कि आपको अभिनेत्री बनना है?
मैंने बचपन से तो कभी नहीं सोचा था कि मैं एक एक्ट्रेस बनूंगी। मेरा डांसर बनने का मन था। मेरी टेªनिंग भी डांसर के लिए हुई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक्टिंग फील्ड में जाऊंगी। लेकिन 2018 में ऐसा कुछ हुआ कि कुमाऊंनी फिल्म ‘माटी पछ्याण’ का क्रू कोटाबाग में आ चुका था। इस फिल्म के लिए जो अभिनेत्री साइन हुई थी वह सेट पर नहीं आई। मैं उस समय रामनगर में थियेटर कर रही थी तो उनकी टीम ने जहुर आलम सर से कहा कि उत्तराखण्ड से एक फिमेल एक्ट्रेस चाहिए। सर ने मेरे नाम को आगे बढ़ाया। ‘माटी पछ्याण’ क्रू का मेरे पास फोन आया तो मैंने मना कर दिया। क्योंकि मुझे नहीं लगता था कि मैं कैमरा फेस कर सकती हूं। मैंने उनको बोला कि सर मैं एक्टिंग नहीं कर सकती हूं। मैं एक डांसर हूं। लेकिन फिल्म के जो डायरेक्टर हैं उन्होंने कहा आप ये सब छोड़ो बस आप एक बार आ जाओ। फिर मैं ‘माटी पछ्याण’ टीम में पहुंची। उसके बाद मैंने यह प्रोजेक्ट साइन भी किया और उसको पूरा भी कर लिया। मुझे एक आर्टिस्ट यह अहसास हुआ कि मैं डांसर हूं सिंगर हूं और अब अभिनेत्री भी हूं, एक्टिंग फील्ड में अभिनय में मुझे तीन चीजें महसूस भी होती हैं। उसमें डांस भी है। गाना भी है और अभिनय भी है।

क्या इससे पहले आपने कोई एलबम या गाना प्ले किया है?
मैं केवल डांस वीडियो बनाती थी। मेरा एक डांस स्टूडियो हुआ करता था काशीपुर में। जिसमंे मैं बच्चों को सिखाती थी। मेरी अपनी डांस क्रू टीम थी। तो हम सब लोग डांस कोरियाग्राफी रिकॉर्ड करते थे और यूट्यूब चैनल पर अपलोड करते थे। एक्टिंग का तो मैंने कभी सोचा नहीं था। मैंने कभी इसके लिए ऑडिशन भी नहीं दिया। ‘माटी पछच्याण’ में भी ऑडिशन नहीं दिया था। लिटरली बस ये लोगों ने मुझे बुला लिया कि आप आ जाओ।

अभिनय के अलावा आपको और क्या पसंद है?

सबसे ज्यादा तो मुझे डांस पसंद है। लेकिन पढ़ाई सिंगिंग में की है। कभी-कभी काम पूरा करके गा लेती हूं। लेकिन प्रोफेशनल नहीं गाती हूं। फुल ऑर्न आर्टिस्ट हूं। सिर्फ आर्टस को लेकर ही बचपन से जी रही हूं, सीख रही हूं।

आपने संगीत का कोई कोर्स किया है?

ये भी मेरी लाईफ का एक यूटर्न था। मेरी लाईफ में कई सारे यूटर्न आए। मैं कॉमर्स की छात्रा थी 12वीं तक। उसके बाद बी.कॉम में इंडिपेंडेंस डे का आयोजन हुआ तो मैं स्टेज पर देश भक्ति गीत गाने चली गई। अंजली यादव वहां कॉलेज में म्यूजिक टीचर थीं। वो मेरे पास आकर बोली बेटा आपकी आवाज बहुत अच्छी है। आप संगीत सीखो। मैं मैडम से बोली मुझे तो पता ही नहीं ऐसा कोई कोर्स भी होता है। मैडम ने मुझे संगीत की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। मैंने कॉमर्स से अपना नाम हटाकर संगीत से बीए, फिर एमए किया।

कभी बॉलीवुड में जाने की कोशिश की है?

डेफिनेटली सोचा है क्योंकि थियेटर से मेरी शुरुआत हुई। रामलीला से शुरुआत हुई। जैसे-जैसे अभिनय का स्केल बढ़ रहा है मन हो रहा है। अभिनय का बॉलीवुड मैं मौका मिलेगा तो जरूर करूंगी। लेकिन मैंने सोचा है कि मैं स्ट्रगल करने मुंबई नहीं जाऊंगी। क्योंकि अब उत्तराखण्ड में इतने कास्टिंग कोच आने लगे है वहां पर ऑडिशन क्लीयर करके। चाहे वो दिल्ली हो या मुंबई काम किया और वापस आ गये हैं। मलतब यह है कि मैं अपना उत्तराखण्ड नहीं छोडूंगी।

अभी तक कितनी फिल्में आ चुकी हैं आपकी और किस फिल्म की भूमिका आपको ज्यादा पसंद है?

मेरी दो फीचर फिल्म आ चुकी हैं। एक कुमाऊंनी फिल्म ‘माटी पछ्याण’ दूसरी गढ़वाली फिल्म ‘यू कनु रिस्ता’। तीसरी हिंदी फिल्म ‘दोही बात’ रिलीज होने वाली है जो एक शॉर्ट फिल्म है जिसका मैं इंतजार कर रही हूं। इसके अलावा बहुत सारे हिंदी प्रोजेक्ट हैं जो पाईपलाईन में हैं। अभी भी मैं शूटिंग सेट से ही आपसे बात कर रही हूं। यह एक हिंदी प्रोजेक्ट है। जो पैन इंडिया रिलीज होगी और ओटीटी पर भी आएगी। नाम अभी डिसक्लोज नहीं कर सकती हूं।

अभी तक ऐसा कोई किरदार जो चुनौतीपूर्ण रहा हो?

कुमाऊंनी फिल्म ‘माटी पछ्याण’ में जो किरदार था माधुरी का वो बहुत ही रियल था। एक पहाड़ की बच्ची हूं। मैं ऐसी ही हूं। जैसी माधुरी थी। तो इतना ज्यादा चैलेंज नहीं थे। लेकिन टेक्निकल चैलेंज थे क्योंकि मैं पहली बार कैमरा फेस कर रही थी। कैमरा के किस एंगल को क्या बोलते हैं। मेकिंग क्या होती है। यह मैंने उस सैटस से सीखा। जो मेरे डीओपी के फारूख सर हैं उन्होंने मुझे बहुत अच्छे से इसमें कंपोज किया। वो मेरी दूसरी फिल्म थी। वो बहुत बड़ा चैलेंज था। जो एक रियल करेक्टर है। सरोजनी रावत जिनका रोल मैं स्क्रीन प्ले कर रही थी। मैंने जब उनसे मिलने की इच्छा की तो मैंने फिल्म वालों से भी बोला कि मुझे इनसे मिलना है। लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया। मैंने उनकी कहानी स्क्रीन पर रखी। वो मेरा एक बहुत बड़ा चैलेंज था। मैं अभी भी घबराती हूं कि कभी वो फिल्म देखेंगी कि इसने मेरा रोल लिया है क्या मैं इसको जस्टिफाई कर पाई हूं। इसको तो सरोजनी रावत जी ही बता सकती हैं।

अपना रोल मॉडल किसे मानती हैं?

मैं बचपन से ही माधुरी दीक्षित की बहुत बड़ी प्रशंसक हूं। लेकिन मैं तब्बू के एक्टिंग स्किल्स से हमेशा बहुत प्रभावित रही हूं। मैंने उनकी कोई फिल्म छोड़ी नहीं है। अभी भी ओटीटी पर फिल्म या सीरीज आए तो मैं उनके हाव-भाव करियर को देखने के लिए उत्सुक रहती हूं।

कभी आपको ऐसा किरदार निभाना पड़ा जो आपके नैतिक मूल्यों के खिलाफ हो?

मैं सीधा मना कर देती हूं। ऐसे बहुत सारे रोल्स आते हैं। बातचीत होती है। हालांकि मेरा नाम बहुत बड़ा नहीं है लोग जानते नहीं हैं। लेकिन जितने भी प्रोजेक्ट आते हैं वो अपने लिमिट्स के हिसाब से सलेक्ट करती हूं। बहुत सारे प्रोजक्टस हाथ से जा रहे हैं। क्योंकि जिस तरीके से अब सिनेमा जा रहा है वो मेरा मोटिव नहीं है। वो मैं नहीं कर सकती तो एक साफ सुथरे रोल और सामाजिक प्रेरणादायरक रोल करना चाहती हूं।

अपने सहयोगी के साथ तालमेल स्थापित करना कितना जरूरी है?

वो बहुत जरूरी है। कुछ हिंदी प्रोजेक्टस जिनमें मैंने काम किया तो तब मुझे पता चला। थियेटर में जैसे हम किसी की बेटी का रोल करते हैं या किसी की लाईफ का रोल कर रही हूं वो हम एक वर्कशॉप करते हैं। उनके साथ बैठते हैं बातचीत करते हैं। उनके नाम से नहीं पुकारते हैं तो हम उस रिलेशनशिप को बोल्ड करते हैं। सेट पर जाने से पहले तो हिंदी मूवी में ऐसा डेफिनेटली होता है कि हम लोग हफ्ता पहले मिलते हैं, बातचीत करते हैं। वो भी सिर्फ फिल्म में क्या किरदार निभा रहे हैं। कैसे करेंगे थोड़ा रीडिंग करेंगे अपने स्क्रीप्ट की बोल्डअप करते हैं। अपने एक्शन- रिएक्शन को तो रीजनल सिनेमा में नहीं होता है। लेकिन जो आपका सवाल है। इज ए वेरी इम्पोर्टेंट एक्सपेक्ट ऑन एक्टर एंड को-एक्टर कि आप जब सेट पर जा रहे हों उससे पहले आपकी केमेस्ट्री बनी होनी चाहिए।

एक अभिनेत्री के लिए महत्पूर्ण क्या है प्रतिभा या प्रशिक्षण?

मैं दोनों को ही इक्वल मानती हूं। ट्रेनिंग होनी भी जरूरी है। जैसे कि एक बिगनर थी। ट्रेनिंग तो मुझे लेनी पड़ी चाहे ऑन सेट लेनी पड़ी मैंने किसी एक्टिंग स्कूल को ज्वाइन नहीं किया था। लेकिन वो सेट ही स्कूल था मेरे लिए। उसके बिना आप कुछ भी नहीं कर सकते तो ट्रेनिंग भी जरूर होनी चाहिए। अभिनय जो हमारे अंदर होता है वो भी आपको लूज नहीं करना है। दोनों ही जरूरी हैं।

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