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देश को मिली पहली रैपिड ट्रेन

आज देश को पहली रैपिड ट्रेन मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 अक्टूबर को साहिबाबाद से पहली  रैपिड ट्रेन के कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया है। जिसका नाम वंदे भारत की तर्ज पर नमो भारत रखा गया है। उद्घाटन से पहले इस रैपिड रेल का ट्रायल किया गया था। इस ट्रेन की स्पीड 152 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा है।

राष्ट्रीय राजधानी परिवहन निगम एनसीआरटीसी के तहत इस रैपिड ट्रेन को चलाया जाएगा। आपको बता दे कि एनसीआरटीसी भारत सरकार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों की संयुक्त क्षेत्र की कंपनी है। इसका काम रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कार्यान्वयन है, ताकि इन क्षेत्रों के मध्य बेहतर संपर्क और पहुंच के माध्यम से संतुलित और टिकाऊ शहरी विकास किया जा सके।

एनसीआरटीसी प्रोजेक्ट पर काम जून 2019 में शुरू हुआ था । चार साल के भीतर ही एनसीआरटीसी रैपिडेक्स सेवाओं का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार है। एनसीआरटीसी की टीम ने प्लान के बाकी हिस्से में भी तेजी से प्रोसेस किया है। यह 2025 में निर्धारित समय सीमा के भीतर मेरठ में मेट्रो सेवाओं के साथ-साथ पूरे कॉरिडोर को परिचालित कर सकती है।

 

रैपिड ट्रेन

 

इस कॉरिडोर का प्लान रैपिड एक्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया गया है, जिसके मैनेजमेंट की जिम्मेदारी नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की होगी। पहले खंड में रैपिड रेल साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच चलेगी और यह रूट 17 किलोमीटर लंबा है। इस रूट पर साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो  पांच स्टेशन होंगे। जिसमें

 

रैपिड ट्रेन की सुविधाएं

 

यह भारत का पहला ऐसा ट्रेन सिस्टम होगा, जिसमें ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ेगी।  मोबाइल और कार्ड के माध्यम से भी यात्री टिकट खरीद सकेंगे। इसके अलावा कोच के आखिरी डिब्बे में स्ट्रेचर का इंतजाम किया गया है। अगर किसी मरीज को मेरठ से दिल्ली ले जाया जाता है, तो इसके लिए एक अलग कोच की व्यवस्था की गई है जिससे कम कीमत में मरीज को पहुंचाया जा सके। वहीं दिव्यांगों के लिए इस ट्रेन में अलग सीट तैयार की गई है। ट्रेन की सीटें काफी आरामदायक हैं। ट्रेन में एडजेस्टेबल चेयर है, इसके साथ ही खड़े होने वाले यात्रियों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। वाईफाई की सुविधा साथ ही मोबाइल-यूएसबी चार्जर भी होंगे।

ट्रेन में किराया करीब दो से तीन रुपये प्रति किमी होगा। दिल्ली मेट्रो की सात लाइनों पर रैपिड लाइन की कनेक्टिविटी होगी। इसे मुनिरका, आईएनए और एरोसिटी से जोड़ा जाएगा। आरआरटीएस प्रोजेक्ट अनुसार पूरे कॉरिडोर के साथ 24 स्टेशन बनाए जाएंगे। एजेंसी का अनुमान है कि प्रोजेक्ट 2025 में पूरा हो जाएगा, तो रोज आठ लाख यात्री इससे सफर कर सकेंगे।

 

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यह रैपिड ट्रेन दिल्ली से मेरठ एक घंटे पहुँचाएगी। दिल्ली से मेरठ के बीच पूरे रूट के निर्माण के बाद कुल 30 रैपिड ट्रेनों को चलाने की तैयारी है। गौरतलब है कि गाजियाबाद के दुहाई यार्ड में रैपिड रेल कॉरिडोर का ऑपरेशन एंड कमांड कंट्रोल सेंटर तैयार किया जा रहा है। रेल रैपिड को भारतीय रेलवे, अंतरराज्यीय बस अड्डों, हवाई अड्डों और दिल्ली मेट्रो के साथ निर्बाध रूप से समायोजित किया जाएगा, ताकि यात्री बिना किसी बाधा के एक माध्यम से दूसरे में जा सके।

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