पाक्सितान और अफगानिस्तान के बीच टकराहट पिछले महीने सीमा संघर्ष को लेकर और भी बढ़ गई है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने तीन अक्टूबर को एक घोषणा कर कहा कि पाकिस्तान में रह रहे अवैध अप्रवासी मुल्क छोड़ कर चले जाए। पाकिस्तान सरकार अपनी इस घोषणा में उन अफगानी नागरिकों की ओर संकेत की है जो पाकिस्तान में रह रहे हैं।
पाकिस्तान में 17 लाख से ज्यादा अफगानिस्तानी नागरिक रह रहे हैं। आदेश के अनुसार अप्रवासियों को 1 नवंबर तक की डेडलाइन दी गई है। यदि वो अपने आप से देश नहीं छोड़ते तो उन्हें सरकार द्वारा निष्काषित किया जायेगा। यह फैसला उस दौरान किया गया है जब इस साल पाकिस्तान में 24 आत्मघाती हमले हुए। जिनमें से 14 हमले अफगानी नागरिकों द्वारा अंजाम दिया गया।

पाकिस्तान सरकार के मुताबिक इस मुल्क में 1.73 मिलियन अफगानी नागरिक जिनके पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है। आंतरिक मामलों के मंत्री सरफराज बुगती के कहने अनुसार 4.4 मिलियन अफगानी शरणार्थी पाकिस्तान में रह रहे हैं।
बुगती का कहना है कि कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान पर हमला अफगानिस्तान के भीतर से हुआ है। इसके सबूत भी हैं कि इन हमलों में अफगानी नागरिक शामिल है। गौरतलब है कि 1979 में काबुल पर सोवियत संघ द्वारा हमला किया गया था। जिसके बाद से ही पाकिस्तान में अफगानी शरणार्थी बढ़ते गए।

टीटीपी यानि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान कट्टरपंथी सुन्नी इस्लामवादी आतंकियों का गुट है। इन स्थानीय तालिबानी आतंकयों के गुट ने पिछले साल युद्ध विराम रद्द कर दिया था। जिसके बाद से हिंसात्मक हमले बढ़ने लगे। टीटीपी का एक मात्र उद्देश्य रहा है कि वह पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंके यह इस्लामिक कानून के तहत पाकिस्तान में शख्त शासन लागू करवाने चाहता है।

