तनाव की जकड़ में मध्य पूर्व

पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार के लिए गत 16 जनवरी का दिन बेहद हैरान और परेशान करने वाला रहा। इस दिन ईरान की सेना के रिवोल्यूशनरी कोर गार्ड ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सर्जिकल स्ट्राइक कर वहां मौजूद दो आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था। हालांकि इस हमले के जवाब में 18 जनवरी को पाकिस्तान ने ईरान में मौजूद दो बलूचिस्तानी अलगाववादी संगठनों पर हमला कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह जवाबी कार्यवाही करने में समर्थ है लेकिन चौतरफा संकटों का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए ईरान के तेवर बड़ी समस्या बन सकते हैं

ईरान और पाकिस्तान के मध्य तनाव तेजी से बढ़ने लगा है। इस तनाव के पीछे जैश-अल-अद्ल नाम का एक आतंकी संगठन है जो खुद को ईरान में रह रहे सुन्नी मुसलमानों का रक्षक बताता है। ईरान ने इसी संगठन के पाकिस्तान स्थित ठिकानों पर मिसाइल हमला गत 16 जनवरी को कर दिया जिसके बाद दोनों देशों के मध्य तनाव गहरा गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान और ईरान 900 किलोमीटर की लंबी सीमा साझा करते हैं। यह सीमा ईरान के सिस्तान और पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मध्य है। दोनों ही देश लंबे समय से एक-दूसरे पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं।

बलूचिस्तान है विवाद की जड़

ईरान एक शिया बाहुल्य देश है। दूसरी तरफ पाकिस्तान सुन्नी बहुमत वाला मुस्लिम राष्ट्र है। दोनों देशों के मध्य कोई सीमा विवाद नहीं है। पाकिस्तान को बतौर राष्ट्र सबसे पहले ईरान ने ही मान्यता दी थी लेकिन बलूचिस्तान के मुद्दे पर दोनों के मध्य तनाव लंबे अर्से से रहता आया है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान का एक बड़ा वर्ग पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र राष्ट्र की मांग आजादी उपरांत से ही करता आया है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने तथा प्राकृतिक संसाधनों की यहां बहुतायत होने के बावजूद भी यह बेहद पिछड़ा और अविकसित हैं। बलूचियों को पाकिस्तान से शिकायत है कि उनके साथ उपनिवेश सरीखा व्यवहार किया जाता है। यही कारण है कि पाकिस्तान के खिलाफ यहां कई अलगाववादी संगठन सक्रिय रहते आए हैं। बलूच जनजाति की एक बड़ी तादात ईरान के सिस्तान प्रांत में भी रहती है। ईरानी बलूचों का आरोप है कि शिया बाहुल्य ईरानी सरकार उनके साथ भेदभाव की नीति अपनाती है। पाकिस्तान में सक्रिय कई आतंकी संगठन ईरानी बलूचियों के समर्थन में कई बार आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान का दावा है कि उसके खिलाफ सक्रिय आतंकी संगठन सिस्तान प्रांत में मौजूद हैं और उन्हें ईरानी सरकार का समर्थन प्राप्त है।

निशाने पर जैश-अल-अद्ल
ईरान सरकार लंबे अर्से से पाकिस्तान पर ‘जैश-अल-अद्ल’ नामक आतंकी संगठन को समर्थन देने और बलूचिस्तान में इस संगठन के ठिकाने होने का आरोप लगाती रही है। यह संगठन वर्तमान में बलूचिस्तान-सिस्तान इलाके में सक्रिय सबसे मजबूत आतंकी संगठन है। 2003 में इस संगठन ने ईरान सरकार के कई दफ्तरों में हमले किए थे और वहां के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदिनेजाद की हत्या का प्रयास भी किया था। अक्टूबर, 2009 में इस आतंकी संगठन ने ईरान के पिशिन शहर पर आतंकी हमला बोला था जिसमें ईरानी रिवोल्युश्नरी गार्ड्स के वरिष्ठ कमांडर मारे गए थे। इस हमले बाद ईरान और पाकिस्तान के संबंध खासे तल्ख हो गए। अक्टूबर, 2023 में इस संगठन ने 14 ईरानी सैनिकों की हत्या कर दी थी। इससे पहले अप्रैल, 2017 में भी फिर इसने 10 ईरानी सैनिकों को मार डाला था। 2019 में अमेरिका ने जैश- अल-अद्ल को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।

पाकिस्तान की जवाबी कार्यवाही
पाकिस्तान के लिए ईरान द्वारा किया गया हमला बेहद आश्चर्यजनक था। 16 जनवरी के दिन ही पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकड़ और ईरानी विदेश मंत्री की दावोस (स्विजरलैंड) में लंबी मुलाकात हुई थी। ऐसे में यकायक ईरान द्वारा पाकिस्तानी क्षेत्र में मिसाल हमला पाकिस्तानी हुकूमत के लिए बेहद आश्चर्यजनक बताया जा रहा है। इस हमले के बाद पाकिस्तान ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि पाकिस्तान की संप्रभुता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। 18 जनवरी की सुबह पाकिस्तानी सेना ने एक सैन्य अभियान चला ईरान में शरण लेकर रह रहे आतंकियों के ठिकानांे पर हमले कर दिए। ईरान के सिस्तान प्रांत के एक गांव में कई मिसाइल गिराई गईं जिनमें तीन महिलाओं और चार बच्चों समेत नौ लोगों की मौत हो गई। इस हमले के बाद पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ‘पाकिस्तान द्वारा ईरान को कई बार इस बाबत सबूत दिए गए कि उनके प्रांत में पाकिस्तान विरोधी आतंकी सक्रिय हैं। ईरान द्वारा कोई कार्यवाही न करने के बाद ही पाकिस्तान को यह हमला करना पड़ा।’ कुल मिलाकर ईरान-पाकिस्तान के मध्य तनाव गहराने का बड़ा असर इस क्षेत्र की शांति व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल -हमास युद्ध ने पहले से ही वैश्विक स्तर पर चिंताओं को जन्म दे दिया है, ऐसे में ईरान-पाकिस्तान के मध्य युद्ध की स्थिति आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने का कारण बन सकती है।

 

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