गभग डेढ़ साल से जारी इजरायल और हमास के मध्य चल रहा युद्ध अंततः समाप्ति की ओर जाता नजर आ रहा है। इसकी शुरुआत 19 जनवरी 2025 को युद्धविराम की घोषणा के साथ हुई है। हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस युद्धविराम को अस्थायी करार देते हुए चेतावनी भी दी है कि यदि हमास ने समझौते का उल्लंघन किया तो इजरायल पुनः सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। गौरतलब है कि इजराइल-हमास संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंताओं को जन्म दिया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि युद्धविराम एक सकारात्मक कदम है, लेकिन स्थायी शांति के लिए दीर्घकालिक प्रयासों की आवश्यकता होगी और इसमें अमेरिका समेत अंतररष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
युद्ध के कारण
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल पर यकायक ही हमला कर दिया था जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए और 240 से अधिक लोगों को हमास ने अगवा कर बंदी बना डाला था। हमास ने इस हमले को गाजा की नाकाबंदी, अवैध इजरायली बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजरायली कार्रवाइयों के खिलाफ उठाया कदम तब बताया था। इसके जवाब में इजरायल ने गाजा पट्टी पर व्यापक हवाई हमले और जमीनी अभियान शुरू कर जंग छेड़ डाली। यह युद्ध लगभग डेढ़ बरस तक चला, जिसमें गाजा पट्टी में रहने वाले नागरिक और हमास के लड़ाकों को मिलाकर लगभग 45,000 से अधिक लोग मारे गए जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। करीब 15 लाख लोग विस्थापित हुए और गाजा में मानवीय संकट गहरा गया।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विभाजित कर दिया है। ज्यादातर पश्चिमी देशों ने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, जबकि अधिकांश मुस्लिम देश इजरायल को नरसंहार का दोषी मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय युद्धविराम की अपील की, लेकिन सुरक्षा परिषद में इस पर सहमति नहीं बन सकी।
युद्धविराम और भविष्य की स्थिति
19 जनवरी 2025 को घोषित युद्धविराम के तहत दोनों पक्षों ने तीन महीने की अवधि के लिए शांति स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। इस दौरान मानवीय सहायता में वृद्धि, बंधकों की रिहाई और गाजा में पुनर्निर्माण कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हालांकि स्थायी शांति के लिए राजनीतिक समाधान, दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली आवश्यक होगी।
इजरायल-हमास विवाद का इतिहास
इजराइल और हमास के बीच का संघर्ष दशकों पुरानी इजराइल- फिलस्तीन विवाद का हिस्सा है। यह संघर्ष जटिल ऐतिहासिक, धार्मिक, राजनीतिक और भौगोलिक कारणों पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि 1948 में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के जरिए इजराइल की स्थापना हुई थी इस फैसले का अरब देशों द्वारा विरोध किया गया था क्योंकि फिलस्तीनी भूमि को यहूदियों और अरबों के बीच विभाजित किया गया था। इसके गठन के साथ ही अरब-इजरायल युद्ध हुआ, जिसमें फिलस्तीनी लाखों की संख्या में विस्थापित हो गए। इसे फिलस्तीनियों के लिए ‘नकबा’ (आपदा) कहा जाता है। 1967 के ‘छह-दिनों के युद्ध’ में इजराइल ने गाजा पट्टी, पश्चिमी तट, पूर्वी येरुशलम और गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया। गाजा पट्टी पर इजरायल का सैन्य नियंत्रण बना रहा, जिससे वहां फिलस्तीनी निवासियों के बीच असंतोष बढ़ता गया।
हमास का उदय
हमास एक इस्लामिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1987 में हुई। यह फिलिस्तीनी क्षेत्रों को ‘आजाद’ करने और इजराइल को समाप्त करने की विचारधारा पर आधारित है। हमास ने इजरायल के खिलाफ कई सैन्य और आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें रॉकेट हमले और आत्मघाती हमले शामिल हैं।
ओस्लो समझौता
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति स्थापित करने के उद्देश्य से 1993 और 1995 में दो समझौते हुए जिन्हें ओस्लो समझौता कहा जाता है। लेकिन इन समझौतों के बावजूद, स्थायी समाधान नहीं निकला। फिलिस्तीन लगातार इजराइल पर अवैध बस्तियों का विस्तार करने और शांति प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाता रहा है।
गाजा नाकाबंदी
2006 में हमास ने फिलिस्तीन के संसदीय चुनाव में जीत हासिल की और 2007 में गाजा पट्टी का पूर्ण नियंत्रण ले लिया। इसके बाद इजरायल ने गाजा पर नाकाबंदी कर दी, जिससे मानवीय संकट गहराने लगा।
धार्मिक-सांस्कृतिक विभाजन
येरुशलम का धार्मिक महत्व दोनों पक्षों के बीच संघर्ष का केंद्र है। अल-अक्सा मस्जिद और यहूदी धार्मिक स्थलों के अधिकार को लेकर विवाद तनाव को और बढ़ाता रहा है।
युद्ध की आशंका बरकरार
हाल ही में हुए इस संघर्ष विराम के बावजूद, इजरायल और हमास के बीच फिर से संघर्ष शुरू होने की आशंका पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बीच लम्बे समय से चले आ रहे तनाव और अविश्वास के कारण स्थिति नाजुक बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास और शत्रुता की भावना बनी हुई है, जो किसी भी समय संघर्ष को पुनः भड़का सकती है और युद्ध विराम समझौते के सभी प्रावधानों का सही ढंग से पालन न होने से भी तनाव बढ़ सकता है।
शांति की दिशा में प्रयास
संघर्ष विराम के बाद कुछ सकारात्मक कदम भी उठाए गए हैं, जैसे कि:
लोगों की वापसी: इजरायल ने गाजा पट्टी के उत्तरी क्षेत्र में फिलिस्तीनियों को लौटने की अनुमति दी है, जो शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बंधकों की रिहाई: हमास ने इजरायली बंधकों को रिहा किया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ाने में मदद मिली है। हमास ने अब तक 8 बंधकों को रिहा किया है, जिनमें 3 इजरायली नागरिक और 5 थाई नागरिक शामिल हैं। इनके बदले में इजराइल ने 110 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया है, जिनमें से 30 को घातक हमलों का दोषी ठहराया गया था। कुछ कैदियों को वेस्ट बैंक में उनके घरों को लौटने दिया गया, जबकि अन्य को मिस्र भेजा गया।
समझौते के कार्यान्वयन में चुनौतियां: समझौते के पहले चरण के बाद, हमास ने अंतिम महिला नागरिक बंधक को रिहा न करके समझौते का उल्लंघन करने की कोशिश की। इसके बावजूद इजरायल ने समझौते को जारी रखने का निर्णय लिया, ताकि सभी बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य की दिशा
इस संघर्ष विराम और कैदियों की अदला-बदली से गाजा में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है, और स्थायी शांति के लिए आगे की वार्ताओं की आवश्यकता होगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका, मिस्र और कतर इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
इस समझौते के बाद गाजा के निवासियों ने अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया है। हालांकि उत्तरी गाजा में अभी भी कम संख्या में लोग वापस आए हैं। स्थिति की स्थिरता और शांति की दिशा में आगे के कदमों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी और समर्थन महत्वपूर्ण होंगे।
कुल मिलाकर इजरायल और हमास के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदें बढ़ाई हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक होगा।

