Uttarakhand

फुल एक्शन मोड में धामी

 

मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट

प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने, निकाय चुनावों में दमदार प्रदर्शन और राष्ट्रीय खेलों के शानदार आगाज के बाद अब खबर है कि प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल में बहुप्रतिक्षित फेरबदल करने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यह फेरबदल रिक्त पड़े मंत्री पदों को भरने तक ही नहीं सीमित रहेगा, बल्कि कई कद्दावर विवादित मंत्रियों पर भी गाज गिराने का मन धामी बना चुके हैं। यह भी तय है कि धामी सरकार निगमों एवं समितियों में भाजपा नेताओं की बड़े पैमाने पर नियुक्ति भी अब करने जा रही है

प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में बड़ी हलचल मचना तय मानी जा रही है। स्थानीय निकाय चुनाव नतीजे आ चुके हैं जिनमें भाजपा का पलड़ा भारी रहा है। माना जा रहा है कि फरवरी माह में धामी सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है जिसमें कई नए चेहरों को मौका मिल सकता है, साथ ही यह भी सम्भावना जताई जा रही है कि भाजपा नेताओं को ही सरकार में शामिल किया जाएगा जबकि कांग्रेसी मूल के आयातीत नेताओं को सरकार से बाहर करने के कयास भी लगाए जा रहे हैं।

राजनीतिक हलकांे से जो जानकारी छनकर आ रही है उसके मुताबिक धामी सरकार में कई ऐसे मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है जिनके विभागों में भ्रष्टाचार और घोटालों के गम्भीर आरोप लग चुके हैं। इनमें कई मामलों में सीबीआई जांच तक चल रही है जिसके चलते सरकार और भाजपा संगठन को कई बार असहज होना पड़ा है। सूत्रों की मानंे तो ऐसे मंत्रियों को सरकार से बाहर करके उनको पार्टी और संगठन में एडजेस्ट किया जा सकता है।

धन सिंह रावत: मंत्रिमंडल से बाहर होने वाले ऐसे मंत्रियों में सबसे बड़ा नाम धन सिंह रावत का बताया जा रहा है। धन सिंह रावत पार्टी में एक बड़े नेता के तौर पर जाने जाते हैं। संगठन से लेकर सरकार तक में अपनी बड़ी भूमिका निभाने वाले धन सिंह रावत 2017 से लगातार महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री हैं। त्रिवेंद्र रावत सरकार में उनके पास स्वास्थ्य विभाग नहीं था लेकिन शिक्षा और सहकारिता जैसे विभाग थे। तीरथ सिंह रावत सरकार मंे उनके पास स्वास्थ्य और चिकित्सा स्वास्थ्य जैसे विभाग भी आए थे। धामी सरकार के पहले कार्यकाल में उनके विभागों को यथावत रखते हुए दूसरे कार्यकाल में भी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा और सहकारिता जैसे अहम विभाग दिए गए।

खास बात यह है कि धन सिंह रावत के करीब -करीब हर विभाग पर गम्भीर सवाल खड़े होते रहे हैं। चाहे विद्यालयी शिक्षा की बात हो या उच्च शिक्षा में अनियमितता और योजनाओं के क्रियान्वयन की बात हो, दोनों ही विभाग हमेशा से सवालों के घेरे में रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद आज भी स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पाई हैं। इसका सबसे ज्वंलत प्रमाण पौड़ी देहलचौरी मोटर मार्ग दुघर्टना के दौरान देखा गया जब पौड़ी के सरकारी अस्पताल में घायलों को घंटों इलाज के लिए तरसना पड़ा। यहां तक कि टॉर्च की रोशनी में घायलों का उपचार किया गया। इस मामले में सरकार की खासी किरकिरी भी हुई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मामले का संज्ञान लेते हुए पौड़ी के सरकारी अस्पताल को पीपीपी मोड़ से वापस लेने का निर्णय लेना पड़ा। गौर करने वाली बात यह है कि पौड़ी जिला धन सिंह रावत का गृह जनपद है और वे जिले की श्रीनगर विधानससभा से लगातार दो बार चुनाव जीत कर विधायक बने हैं।

मंत्री धन सिंह रावत का सहकारिता विभाग भी एक के बाद एक घोटालों और भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोपांे में घिरा हुआ है। विभाग में बड़े पैमाने पर भर्ती घोटाला सामने आया जिसकी जांच भी हो चुकी है। ‘दि संडे पोस्ट’ ने 4 जनवरी 2025 के अंक में ‘घोटालों की सहकारिता’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था जिसमें सहकारिता विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार के कई मामलों का प्रमाण सहित खुलासा किया था। हैरत की बात यह है कि सहकारिता विभाग के कई मामलांे पर हाईकोर्ट नैनीताल द्वारा भी फटकार लगने के बावजूद सहकारिता विभाग में घोटाले और घपलों का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। यह सीधे तौर पर मंत्री धन सिंह रावत को ही कठघरे में खड़ा करता है।

गणेश जोशी: धामी सरकार में शामिल मंत्री गणेश जोशी का नाम भी चर्चाओं में है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के फेरबदल में गणेश जोशी की भी छुट्टी हो सकती है। गणेश जोशी धामी सरकार के ऐसे मंत्रियों में शामिल हैं जिन पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप लग चुके हैं और हाईकोर्ट में याचिका तक दखिल हो चुकी है। साथ ही उनके विभागों के कई घोटाले सामने आ चुके हैं। उद्यान विभाग के घोटालों पर सीबीआई जांच भी चल रही है। कई अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई मुकदमा दर्ज कर चुकी है।

गणेश जोशी के कृषि विभाग में भी फर्जीवाड़े के मामले चर्चाओं में रहे हैं। कृषि विभाग की सरकारी योजनाओं में फर्जी आंकडे और घटिया बीज तथा दवाओं की आपूर्ति के मामले सामने आने के बावजूद कार्यवाही कभी नहीं की गई है। हाल ही में रूद्रप्रयाग जिले में नींबू के पौधों के नाम पर किसानों को जम्भीरी नींबू की पौध सप्लाई करने के मामले में मंत्री द्वारा सप्लाई करने वाली संजीवनी नर्सरी को ब्लैक लिस्ट करके मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा मंत्री के आदेश को रद्दी की टोकरी में तो डाला ही गया, साथ ही उसी संजीवनी नर्सरी को फिर से पौध सप्लाई का काम सौंप दिया गया। इससे एक बात साफ हो गई है कि गणेश जोशी के मंत्रालयों में नियुक्त विभागीय अधिकारी पूरी तरह से बेलगाम हो चुके हैं।

गणेश जोशी के पास सैनिक कल्याण मंत्रालय भी है जिसके अधीन देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। केंद्र सरकार के फंड से करोड़ों रुपए खर्च करके सैन्य धाम का निर्माण हो रहा है लेकिन इसके निर्माण में अनियमितता और बजट को बढ़ाने के आरोप भी लग रहे हैं।

अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी द्वारा इस मामले में घोटाले होने की शिकायत प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री को की गई है। कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले पर राज्य सरकार पर सैन्य प्रदेश होने के बावजूद सैन्य धाम निर्माण में घोटाला करने के आरोप लगाए हैं। विकेश नेगी ने तो सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त प्रमाणों के आधार पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप लगाते हुए राज्य सतर्कता विभाग में शिकायत तक दर्ज करवाई है। सतर्कता विभाग द्वारा मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए सरकार से अनुमति मांगी गई है। लेकिन सरकार द्वारा अनुमति नहीं दी गई। अब यह मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है।

इस मामले में खास बात यह है कि अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा सैन्यधाम में किए जा रहे भ्रष्टाचार और गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का मामला उठाने पर विकेश नेगी को दून पुलिस द्वारा अपराधी घोषित करके तत्कालीन जिलाधिकारी सोनिका द्वारा जिला बदर की कार्यवाही तक की गई। इस मामले में सरकार की खासी फजीहत भी हुई जिसके बाद आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डे द्वारा विकेश नेगी के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही को रद्द करना पड़ा।

इन सब कारणांे के चलते गणेश जोशी धामी सरकार के सबसे चर्चित मंत्री बन चुके हैं जिसका असर धामी सरकार के मंत्रिमंडल फेरबदल में भी देखने को मिल सकता है। गणेश जोशी की मंत्री पद से विदाई होने की सबसे प्रबल सम्भावना है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो गणेश जोशी के विभागांे, खास तौर पर कृषि और उद्यान विभाग के साथ-साथ सैन्य धाम में बरती जा रही अनियमितता के आरोप चलते प्रधानमंत्री कार्यालय भी खासा नाराज है जिसके चलते जोशी मंत्रिमंडल से बाहर किए जा सकते हैं।

प्रेमचंद अग्रवाल: धामी सरकार के तीसरे मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी हैं जिन पर मंत्रिमंडल से विदाई की खबरें तैर रही हैं। ऋषिकेश विधानसभा सीट से लगातार चार बार चुनाव जीतने वाले अग्रवाल धामी सरकार में वित्त और शहरी विकास जैसे बड़े विभागों के मंत्री हैं जबकि त्रिवेंद्र सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। अपने कार्यकाल में विधानसभा सचिवालय में भर्ती घोटाले के आरोप अग्रवाल पर लग चुके हैं जिसमें अपने चहेतों को पिछले दरवाजे से भर्ती करने का आरोप लगा है। हाईकोर्ट के आदेश बाद इन सभी भर्तियों को रद्द करना पड़ा था। यही नहीं अपनी पुत्री को अपने ही वित्त विभाग में तमाम नियम-कानूनों को ताक पर रखकर नियुक्ति देने और अपने पुत्र को सरकारी विभाग में तैनात करने के लिए मुख्यमंत्री तक से सिफारिश लगाने के आरोप अग्रवाल पर लग चुके हैं।
पिछले वर्ष मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर एक पूर्व आरएसएस के कार्यकर्ता के साथ बीच सड़क पर मारपीट करने का भी आरोप लगा जिसका वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ। इस मामले से भी धामी सरकार की खासी फजीहत हुई थी। कुछ वर्ष पूर्व ऋषिकेश में ही केंद्रीय मंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान प्रेमचंद अग्रवाल और भाजपा के एक तत्कालीन दयित्वधारी राज्य मंत्री भगतराम कोठारी के बीच भारी वाद-विवाद और गाली-गलौच का मामला भी सामने आ चुका है जिसका वीडियो आज भी सोशल मीडिया में देखा जा रहा है।

एक तरफ प्रेमचंद अग्रवाल अपने पुत्र को बेरोजगार बताते हुए उसे सरकारी विभाग में संविदा पर नियुक्ति दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री से सिफारिश करवाने का काम करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनके पुत्र के खिलाफ करोड़ों के भूखंड खरीदने के आरोप भी लगते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी भी इन भूखंडांे को अपने पुत्र के नाम खरीदने पर अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का अरोप लगा चुकी है। हाल ही में अग्रवाल के पुत्र पीयूष अग्रवाल पर अपने रिसोर्ट में संरक्षित प्रजाति के पेड़ांे को काटने का आरोप लगा जिसकी जांच में मामला सही पाया गया। माना जा रहा है कि धामी सरकार से प्रेमचंद अग्रवाल की विदाई की पठकथा लिखी जा चुकी है।

सुबोध उनियाल: धामी सरकार में वन मंत्री सुबोध उनियाल भी आजकल खासी चर्चाओं में हैं। उनियाल के भी मंत्रिमंडल से बाहर होने की आशंका जताई जा रही है। कृषि और उद्यान विभाग के जिन घोटालांे और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं और जिनमें सीबीआई जांच चल रही है, वह सभी मामले सुबोध उनियाल के कार्यकाल के बताए जा रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार में सुबोध उनियाल कृषि मंत्री थे। ऐसा नहीं है कि यह मामले तब सामने नहीं आए थे। किंतु अपने पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल में सुबोध उनियाल ने इन पर कार्यवाही करने की जहमत तक नहीं उठाई। धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल में घोटाले सार्वजनिक हुए और हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज से होते हुए आखिरकार सीबीआई जांच तक जा पहुंचे।

हालांकि इन घोटालों में तत्कलीन कृषि और उद्यान मंत्री का नाम सीधे तो नहीं आया है लेकिन कृषि विभाग में योजनाओं के नाम पर केंद्र सरकार के बजट को ठिकाने लगाने का काम होता रहा है। जिसका सबसे बड़ा प्रमाण टिहरी जिले के नरेंद्र नगर स्थित करीब नौ करोड़ की लागत से कृषि उत्पादन और मंडी भवन का निर्माण कहा जा सकता है। स्थानीय किसानांे की उपज को बाजार दिए जाने के लिए इस भव्य भवन का निर्माण किया गया। जबकि 2019 से आज तक यह मंडी भवन बंद ही पड़ा हुआ है। उद्घाटन के समय ही केवल यह मंडी भवन खोला गया था। उसके बाद कभी खोला ही नहीं गया। गौर करने वाली बात यह है कि भवन उनियाल की विधानसभा क्षेत्र में है। इस मंडी भवन से किसानों को कोई लाभ भले ही नहीं पहुंचा हो लेकिन स्थानीय नेताओं और सुबोध समर्थकांे को इसका राजनीतिक लाभ जरूर मिला है और एक उनियाल समर्थक को मंडी समिति का अध्यक्ष बनाया जा चुका है।

मंत्री सुबोध उनियाल और विवाद का आपस में गहरा नाता भी रहा है। पुरोला के भाजपा विधायक दुर्गेश लाल और सुबोध उनियल के बीच विवाद का मामला कुछ समय पहले सामने आया था। इस मामले में दुर्गेश लाल अपने समर्थकों के साथ मंत्री आवास में ही धरने पर बैठ गए थे। अपनी ही सरकार के मंत्री और अपनी ही पार्टी के विधायक के बीच चले इस घमासान से सरकार और सगठन दोनों की जमकर फजीहत भी हुई। पिछले वर्ष भीमताल में बाघ द्वारा एक बालिका की मौत पर आंदोलनकारियों से फोन पर बातचीत के दौरान मंत्री जी ने अपना आपा इस कदर खो दिया कि न्यायालय पर ही अनर्गल टिप्पणी तक कर दी। इसका वीडियो भी जमकर वायरल हो चुका है। जबकि विधानसभा में रोजगार के लिए मांग करने वाले योग प्रशिक्षुओं को अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उनको हड़काने का वीडियो भी सोशल मीडिया में आज भी देखा जा सकता है।

 

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