आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों की समस्या सुलझने के बजाय उलझती जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्वाति मालीवाल राज्यसभा सांसदी पद से इस्तीफा नहीं देंगी। वे केजरीवाल और पार्टी के ऊपर लाख आरोप लगाएं लेकिन ऐसी नैतिकता नहीं दिखाने वाली हैं कि राज्यसभा सीट छोड़ दें। राज्यसभा सीट के लिए इतना घमासान हुआ है। लेकिन ऐसा नहीं है कि वे इकलौती राज्यसभा सांसद हैं, जिनसे पार्टी को समस्या हो रही है। दूसरे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा हैं, जो वैसे तो लंदन से लौट आए हैं लेकिन अभी तक चुनाव प्रचार में नहीं उतरे हैं और ऐसा नहीं लग रहा है कि वे नैतिक समर्थन देने के अलावा कुछ और करने जा रहे हैं। पंजाब में लोकसभा की 13 सीटों के लिए मतदान नजदीक आ रहे हैं लेकिन पार्टी के सात में से एक भी राज्यसभा सांसद प्रचार में नहीं उतरा है। राघव चड्ढा पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं। उनके अलावा पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह को केजरीवाल ने राज्यसभा भेजा है। लेकिन शपथ लेने के बाद से ही वे सक्रिय राजनीति से गायब हैं। चुनाव रणनीतिकार संदीप पाठक भी पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। लेकिन वे परदे के पीछे से ही काम कर रहे हैं। बाकी पांच सांसद भी लापता हैं। एक यूनिवर्सिटी के मालिक हैं तो एक बड़े उद्योगपति हैं तो एक धार्मिक गुरू किस्म के व्यक्ति हैं, जिनको केजरीवाल ने राज्यसभा सीट दी है। लेकिन कोई भी उनके प्रचार में नहीं उतर रहा है। पंजाब का चुनाव लगभग पूरी तरह से मुख्यमंत्री भगवंत मान के हवाले है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि केजरीवाल ने राज्यससभा के लिए अपनी टीम का चुनाव किस आधार पर किया?

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