लद्दाख में पिछले कई महीनों से वहां के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन की शुरुआत फेमस क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगुचक ने 6 मार्च से की है। जिसके बाद से ही वह लगातार आमरण अनशन कर रहे हैं। मार्च की शुरुआत में वांचुक द्वारा 21 दिन तक इस अनशन की शुरुआत की गई थी जिसको आज 14 दिन हो चुके हैं। वांगुचक और लद्दाख के लोगों के द्वारा यह प्रदर्शन वहां के पहाड़ों को बचाने और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में पहले पूरे राज्य के लोगों द्वारा कैंडल मार्च निकला गया था और अब बीते सोमवार यानी 18 मार्च को लद्दाख के लोगों ने वांचुक के इस कैंपेन का साथ देते हुए एक दिवसीय भूख हड़ताल भी की गई है। हैरानी की बात तो यह है कि जहां देश के लगभग 1500 से अधिक लोग एक लम्बे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर आंखें मूंद कर बैठी है।
देश भर से लोग हो रहे शामिल
हालांकि इस प्रदर्शन की वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिसको लेकर लोग देश भर से इस कैंपेन में शामिल हो रहे हैं। इन वीडियोज में देखा जा सकता है कि वांचुक के साथ-साथ करीब 250 लोग भी उनके साथ बने हुए हैं और सरकार को टैग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब लद्दाख से धारा को 370 को हटाया गया था तब उनसे सरकार द्वारा कुछ वायदे किये गए लेकिन धारा 370 को हटे काफी समय बीत गया लेकिन सरकार द्वारा लद्दाख के लोगों के लिए कुछ भी कदम नहीं उठाये गए हैं। दरअसल, सोनम वांगुचक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। अनुसूची छः में लद्दाख के शामिल होने के बाद प्रदेश के स्थानीय लोगों को आदिवासी इलाके में एडमिनिस्ट्रेशन का अधिकार मिल जायेगा।
संस्कृति को बचाना है मकसद
संविधान की छठी अनुसूची की मांग करते हुए सोनम वांगुचक का कहना है कि जब विविधता में एकता की बात आती है, तो संविधान की छठी अनुसूची भारत की उदारता का प्रमाण है। यह महान राष्ट्र न सिर्फ विविधता को सहन करता है, बल्कि उसे प्रोत्साहित भी करता है। हमने यह अनशन इसकी मांग क्र चलते किया है यदि सरकार ने हमारी मांगे पूरी इस समय अवधि में नहीं की तो हम इस अनशन को आगे बढ़ाते जायेंगे और जब तक बढ़ाएंगे तब तक सरकार हमारी मांगों और किये गए वायदों को पूरा न कर दें। छठी अनुसूची का मकसद सिर्फ बाहरी लोगों को ही रोकना नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी संवेदनशील इलाके या संस्कृतियां-जनजातियां सभी को स्थानीय लोगों से भी बचाना है।
लद्दाख कैसे बनेगा केंद्र शासित प्रदेश
कुछ वर्ष पहले जब कश्मीर से धारा 370 को हटाया गया उस समय लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। यानी लद्दाख की कोई स्थानीय काउंसिल नहीं है, जिस तरह कश्मीर में भी नहीं है। अनुसूची छः की मांग के पूरे होने के बाद लद्दाख के लोग स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदें बना सकेंगे।

