कहते हैं कि राजनीति बदलाव का नाम है। पुरानी दोस्ती राजनीति में टूटती है और नए रिश्ते बनते हैं। जो पहले दुश्मन होता है राजनीति में कब दोस्त बन जाए कोई नहीं जानता। जैसे-जैसे पार्टियों का एक-दूसरे से गठबंधन बनता है व्यवहार का तरीका भी बदल जाता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी आदतं बड़ी मुश्किल से जाती हैं। यही हाल आजकल महाराष्ट्र में संजय राउत का है।
राउत पहले भी कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के लिए तीखी आलोचना कर सिरदर्द बने रहते थे पर वो कोई बात थी। अब महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस का गठबंधन है। ऐसे में कोई आलोचना करे तो गंठबंधन के लिए मुश्किल खड़ी हो जाती है। हाल में संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला के मुलाकात को लेकर बयान दिया था।
यह बयान उनका ऐसे समय आया जब भाजपा कांग्रेस को अपराध, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाकर हमलावर थी। जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में राउत के बयान पर सख्त रुख अपनाते हुए आपत्ति जताई तो राउत को आनन-फानन में माफी मांगनी पड़ी। माफी मांगने से पहले राउत ने पहले तो दाएं-बाएं किया फिर मुद्दे पर आए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ही नेता पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन और व्यक्तित्व के बारे में बहुत कम जानते हैं।
उन्होंने दावा किया कि इंदिरा गांधी ने अंडरवर्ल्ड डॉन से नहीं पठानों के नेता करीम लाला से मुलाकात की ताकि पश्तून समुदाय के लोग कांग्रेस के पक्ष में आएं। उन्होंने मामला खराब होने से पहले माफी तो मांग ली थी पर शिवसेना को डर सताने लगा है कि अगर संजय राउत का ऐसा व्यवहार रहा तो गठबंधन को लेने के देने पड़ जाएंगे।

