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ममता का मिशन 2024 , भाजपा में हलचल 

पश्चिम बंगाल विधानसभा की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता के चलते सियासत गरमाने लगी है। राजनीतिक विशेषज्ञ उनकी सक्रियता को गंभीरता से ले रहे हैं , इससे भाजपा में हलचल होनी स्वाभाविक है। भाजपा नेता बकायदा उन पर हमले भी करने लगे हैं। दरअसल,  ममता बनर्जी  आज से पांच दिन  के दिल्ली दौर पर आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक शाम को ममता राजधानी दिल्ली पहुंचेंगी, जहां 28 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  से उनकी  मुलाकात हो सकती है।  इसके अलावा वे दिल्ली में टीएमसी संसदीय बोर्ड की बैठक में भी हिस्सा लेंगी।

 

कहा जा रहा है कि अपने  दिल्ली दौरे पर ममता बनर्जी विपक्षी नेता सोनिया गांधी और शरद पवार से भी मुलाकात कर सकती हैं। उनके दौरे को मिशन 2024 से जोड़कर भी देखा जा रहा है क्योंकि पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से चेहरा कौन होगा, इस पर लगातार मंथन चल रहा  है।  इस कड़ी में शरद पवार समेत कई नेता बैठकें भी कर चुके हैं।

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रशांत किशोर उन्हें अगले लोकसभा चुनाव में संयुक्त विपक्ष के बतौर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनाने की जमीन तैयार कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पिछले दिनों प्रशांत किशोर ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी। अब जब ममता बनर्जी दिल्ली आ रही हैं और उनका भी सोनिया गांधी सहित विपक्ष के सभी वरिष्ठ नेताओं से मिलने का कार्यक्रम है , तो उनके इस दौरे को मिशन 2024 को लेकर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

 ममता पर बीजेपी ने साधा निशाना

 


केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष

 

ममता के दौरे से दिल्ली की सियासत गरमाने लगी सत्ताधारी पार्टी के नेता लगातार उन पर इस दौरे को लेकर निशाना साध रहे  हैं।  केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ममता के दौरे पर कहा कि 2024 बहुत दूर की बात है, मुलाकातों में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी ममता पर निशाना साधा है।

दिलीप घोष ने  दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय संसाधनों का दुरुपयोग किया और अब प्रधानमंत्री से मिलना चाहती हैं ,ताकि हाथ जोड़कर धन की भीख मांग सकें।  घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य के खजाने से पैसे निकाले और अब उसे खाली कर दिया है।

घोष ने कहा कि ममता अब बंगाल को बांग्लादेश में तब्दील करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ममता को 2024 में 2019 से भी बड़ा झटका लगेगा, उसके लिए वह अभी से तैयार हो जाएं।  दिलीप घोष ने कहा कि ममता दीदी ने 16 अगस्त को ‘खेला होबे’ दिवस मनाए जाने की बात कही है, इसके पीछे की मंशा साफ है, आजादी से पहले कोलकाता में 16 अगस्त को हत्याएं हुई थी।

 

टीएमसी का पलटवार

 


टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष

 

दिलीप घोष के बयान पर सत्ताधारी टीएमसी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।  पार्टी की ओर से कहा गया कि घोष को पहले संघीय व्यवस्था की समझ होनी चाहिए, जिसके तहत राज्य का प्रमुख हमेशा प्रधानमंत्री से मिल सकता है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि क्या वह संघवाद के बारे में जानते हैं, जहां पर राज्य का प्रमुख हमेशा प्रधानमंत्री से मिल सकता है? दिलीप दा को पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए, क्योंकि बंगाल का राजस्व पहले के मुकाबले टीएमसी के शासन में बढ़ा है।

 

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दरअसल, कुछ दिन पहले यानी 21 जुलाई को केंद्र सरकार जमकर कई आरोप लगाए थे। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के गठन के बाद से हर वर्ष 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस बार इस मौके को खास मनाने के लिए ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल ने मां ,माटी और मानुष को चुना है। उन्होंने भाजपा को निशाना बना कहा कि भाजपा पूरी तरह तानाशाही पर आमादा है। त्रिपुरा में हमारे कार्यक्रम को रोका गया । क्या यह लोकतंत्र है ? वे देश की संस्थाओं को नष्ट कर रहे हैं। मोदी सरकार को प्लास्टर करने की जरूरत है। अब हमें काम शुरू करना है। उन्होंने कहा है कि सरकार पेगासस के जरिए स्पाईगीरी दिखा रही है। जासूसी के लिए पैसे खर्च कर रही है। इसमें मंत्रियों और जजों के नंबर डाले जा रहे हैं , लेकिन इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। जासूसी के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। कोरोना की दूसरी लहर में देश ने गंगा में तैरती लाशें देखी हैं। ऑक्सीजन की कमी के चलते बहुत लोगों की मौतें हुई हैं और सरकार कहती है कि ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई है।

इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने आगे कहा कि कुछ भाजपा के सदस्य मानवाधिकार सदस्य हैं उन्होंने  गलत रिपोर्ट डाली है। राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद कोई हिंसा नहीं हुई। मतदान से ठीक पहले वे हम पर कैसे दबाव बना रहे थे। हम जानते हैं अब जब तक भाजपा को बाहर नहीं करते तब तक खेला होगा। 16 अगस्त को खेला दिवस मनाएंगे। देश में परिस्थिति बहुत खराब है। मोदी जी बुरा मत मानिए , आपकी व्यक्तिगत आलोचना नहीं कर रही पर आप करते हैं। आपको सिर्फ अपनी पार्टी की चिंता है, जबकि हम देश के विकास में यकीन करते हैं। बंगाल मॉडल स्टेट है ,गुजरात नहीं। ममता का मानना है कि यदि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में उतरना है तो पूरे देश की जनता से उन्हीं की भाषा में बात करनी होगी।  इसके बाद से ही भाजपा बौखलाई हुई है।

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