दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को ईडी ( प्रवर्तन निदेशालय ) द्वारा 18 दिसंबर को समन भेजा गया था। यह समन कथित शराब घोटाले के संबंध में 21 दिसंबर को पूछताछ करने को लेकर था। लेकिन ईडी के सामने पेश होने से पहले मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दस दिनों के लिए विपश्यना के लिए चले गए है।
केजरीवाल ने ईडी द्वारा भेजे गए समन का जवाब देते हुए कहा कि मैंने अपना जीवन ईमानदारी और पारदर्शिता से जिया है, उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मुख्यमंत्री के कहने अनुसार वो हर कानूनी समन के लिए तैयार हैं ,लेकिन ईडी का यह समन पिछले समन की तरह ही गैर-कानूनी है और राजनीति से प्रेरित है।
गौरतलब है कि केजरीवाल को ईडी द्वारा पूछताछ के लिए 2 नवंबर को भी बुलाया गया था। केजरीवाल उस दौरान भी ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए थे। उस समय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के चुनाव में प्रचार के लिए गए थे। मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट का सामना करने से पहले तीन बार सम्मन छोड़ सकते हैं,अगर वो तीन बार के बाद भी समन पर नहीं पहुंचे तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार इस संदर्भ में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कहना कि जिस तरह से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी के समन से बचकर दिल्ली से बाहर चले गए हैं, उससे लगता है कि वह जांच से भाग रहे हैं। अरविन्द केजरीवाल का ईडी के दूसरे समन से बचना शराब घोटाले में शामिल होने की उनकी स्वीकारोक्ति को दर्शाता है।

