स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इशारों-इशारों में ही कह दिया है कि वे आने समय में बढ़ती जनसंख्या के खिलाफ कुछ निर्णय ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि वे क्या करने जा रहे हैं, लेकिन यह तय है कि कुछ न कुछ तो होगा ही। वैसे भी चीन के बाद दुनिया का दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। इस समय भारत की आबादी 130 करोड़ के लगभग है, जो कि देश में मौजूद संसाधनों के हिसाब से काफी ज्यादा है।
यह इससे भी जाहिर होता है कि मोदी ने ‘छोटे परिवार’ को देशभक्ति से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि छोटा परिवार रखने वालों का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। जिनका छोटा परिवार है, उनसे हमें सीखने की जरूरत है। इसके लिए सामाजिक जागरूकता की भी बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का भी खास ध्यान रखना होगा कि आबादी शिक्षित होना चाहिए साथ ही बच्चे के जन्म से पहले उसकी जरूरतों के बारे में भी सोचें। अर्थात यह भी देखें कि क्या हमारे पास जितने संसाधन हैं क्या आने वाली पीढ़ी को वे सभी सुविधाएं दे सकते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत है।
हालांकि यह भी सही है कि यदि मोदी सरकार इस दिशा में कोई फैसला लेती है तो कुछ लोग इसे भी राजनीति से जोड़कर देखेंगे। क्योंकि भाजपा के नेता हमेशा से जनसंख्या को लेकर एक वर्ग विशेष को निशाना पर लेते रहे हैं। इस संबंध में एक नारा ‘हम 5 हमारे 25’ भी समय समय पर उछलता रहता है। इस बात को इससे भी बल मिलता है कि 3 तलाक खत्म करने के कानून को भी इस वर्ग विशेष के खिलाफ फैसले से जोड़कर देखा गया था।