भाजपा इस बार हर कीमत पर जदयू से ज्यादा सीटें लाकर अपना मुख्यमंत्री राज्य में चाह रही है। भले ही पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लाख दावा करें कि सीटें अधिक आने पर भी सीएम नीतीश कुमार ही बनेंगे, भीतरखाने चर्चा जोरों पर है कि चिराग पासवान और मुकेश साहनी को भाजपा का पूरा समर्थन दिया जा रहा है ताकि चुनाव बाद भाजपा को मुख्यमंत्री बनाने में दिक्कत न हों।

चिराग पासवान की लोजपा नीतीश कुमार को सीएम बनाने के लिए अपना समर्थन देने से रही। उनके विरोध को सामने रख इस बार भाजपा एनडीए गठबंधन की सरकार का नेतृत्व कर सकती है। इसी प्रकार मुकेश साहनी की वीआईपी पार्टी को ग्यारह सीटें देकर भाजपा बिहार में अपने राजनीतिक समीकरणों को विस्तार देने में जुट गई है।

मल्लाह जाति के मुकेश साहनी राजीनति में नौसिखिया हैं। उनकी पार्टी मात्र दो बरस पुरानी है। इसके बावजूद अपने कोटे से उन्हें ग्यारह सीटें देकर भाजपा ने अति पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को साधने का दांव चल दिया है। बिहार में इस जाति का लगभग 7 से 10 प्रतिशत वोट बैंक हैं। मुकेश साहनी को आगे कर भाजपा नीतीश के इस वोट बैंक पर सेंधमारी का प्रयास यदि रंग लाया तो निश्चित ही नीतीश के लिए यह बड़े खतरे के समान होगा। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि ये चुनाव नीतीश की राजनीतिक यात्रा के अंत का कारण बन सकने वाले चुनाव साबित होने जा रहे हैं।

