पटना से लेकर दिल्ली तक आजकल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर, खासकर उनकी दिमागी हालात को लेकर नाना प्रकार की चर्चाओं का बाजार गर्म है। इन चर्चाओं के पीछे है बिहारी बाबू का गाहे-बगाहे किसी के भी पैर छू लेना। लोकसभा चुनाव के बाद हुई एनडीए गठबंधन की बैठक दौरान नीतीश कुमार ने यकायक ही पीएम मोदी के पैर छू कर सबको हैरान करने का काम कर डाला था। यह सर्वविदित है कि मोदी को नीतीश बाबू पसंद नहीं करते हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक मंच पर मोदी का चरण स्पर्श कर नीतीश कुमार ने सबको चौंका दिया था। इसके बाद तो सीएम साहब को मानो पैर छूने की बीमारी लग गई। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में शामिल अशोक चौधरी के पैर छू लिए तो कुछ अर्सा पहले वे अपने करीबी मित्र और जद(यू) कोर्ट से केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के चरण स्पर्श करने लगे। हद तो यह कि एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान एक इंजीनियर के पैरों की तरफ वे लपक गए। गत् 3 नवंबर को चित्रगुप्त पूजा कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने एक भाजपा नेता का चरण स्पर्श कर इन आकांक्षाओं को बलवती कर डाला है कि उनके साथ कुछ न कुछ तो गड़बड़ है। जानकारों की मानें तो जद(यू) भीतर इस बात पर गहरा मंथन शुरू हो चला है कि नीतीश बाबू के स्थान पर किसे नया नेता चुना जाए।
नीतीश को आखिर क्या हुआ है?

