Uttarakhand

टूटे मिथक, बने रिकॉर्ड

किसी भी देश या राज्य की नियति का फैसला वहां की सरकार की नीयत से ही तय होता है। उत्तराखण्ड में इस साल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की साफ नीयत और दूरदर्शी सोच पिछली सरकार के मुकाबले दो कदम आगे दिखाई दी। पुष्कर राज में तमाम तरह के बदलाव देखने को मिले। पारदर्शी और सुशासन के साथ ही भ्रष्टाचार और भयमुक्त माहौल बनाने पर केंद्रित रहा। जिस भूमाफिया यशपाल तोमर को यूपी पुलिस नहीं पकड़ पाई उसे राज्य की एसटीएफ ने सलाखों के पीछे डाल कर ‘जीरो टॉलरेंस’ को चरितार्थ किया। प्रदेश में पहले भी नौकरशाहों पर आरोप तो लगते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार हुआ जब आईएएस और आईएफएस अफसरों की करप्शन के आरोप में गिरफ्तारी हुई। यह साल जहां धामी के धाकड़ फैसलों के लिए जाना जाएगा वहीं कुछ मामले ऐसे भी रहे जिनसे वे यू-टर्न लेते भी दिखे

 

पुलिस फंड का फंडा

7 जनवरी को उत्तराखण्ड सरकार ने दावा किया कि उसने एक बहुत पुराने मामले का समाधान कर दिया है। उत्तराखण्ड पुलिस के पहले बैच यानी 2001 बैच के कॉस्टेबलों के फंसे हुए फंड के मामले में सरकार ने सभी पुलिस कॉन्स्टेबल को एकमुश्त 2-2 लाख रुपए देने का आदेश जारी किया। हालांकि पुलिस जवानों की मांग 4600 ग्रेड पे की थी। ग्रेड पे की मांग को लेकर 2001 बैच के सिपाहियों के परिजन इस साल दो बार सड़क पर उतर चुके थे। याद रहे कि 21 अक्टूबर 2021 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 20 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके उत्तराखण्ड पुलिस के सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे की सौगात दी थी। पुलिस स्मृति दिवस पर दून में रेसकोर्स स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में धामी ने बकायदा इसका एलान किया था। अगर ग्रेड पे में बढ़ोतरी होती तो सरकार के खजाने पर इस साल 4.6 करोड़ रुपये और अगले साल से 15 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ता। धामी सरकार के इस फैसले से पुलिसकर्मी संतुष्ट नहीं दिखे हैं।

खत्म किया तोमर का तिलिस्म 12 जनवरी 2022 को यशपाल तोमर को उत्तराखण्ड की एसटीएफ ने हरियाणा के गुरुग्राम से धर दबोचा था। हरिद्वार के  ज्वालापुर की चर्चित 56 बीघा जमीन मामले में दिल्ली निवासी गिरधारी लाल  ने एक मुकदमा ज्वालापुर कोतवाली में दर्ज कराया था। फिलहाल यशपाल तोमर हरिद्वार की जेल में है। हरिद्वार जिला प्रशासन ने तोमर की 165 करोड़ की सम्पत्ति जब्त कर ली है। जिस काम को उत्तर प्रदेश की तेज तर्रार पुलिस नहीं कर पाई उसे उत्तराखण्ड की एसटीएफ ने कर दिखाया। अरबपति भू-माफिया और गैंगेस्टर यशपाल तोमर की जमीनों पर कब्जे के जरिए अकूत संपत्ति का साम्राज्य पश्चिमी यूपी से लेकर उत्तराखण्ड तक फैला हुआ है। भू-माफिया यशपाल तोमर ने अवैध तरीके से अरबों की जमीन पर कब्जा किया और इस खेल में खाकी, खादी से लेकर सुरा और सुंदरियों का भी जमकर इस्तेमाल हुआ। यशपाल ने सिंडिकेट बनाकर कई राज्यों में जमीन हड़पने का काम किया है। अकेले ग्रेटर नोएडा के चिटहरा गांव के ही 12 लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर वह उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और राजस्थान में जेल की हवा खिला चुका था।

 

 

किशोर का जाना, धन सिंह और यशपाल का आना
27 जनवरी के दिन उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। उत्तराखण्ड के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भाजपा में शामिल हो गए। इससे पहले 26 जनवरी को कांग्रेस ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। किशोर उपाध्याय कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते थे। वह कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2002 और 2007 के चुनाव में उन्होंने टिहरी विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2012 में इसी सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में किशोर उपाध्याय को भाजपा ने टिहरी से टिकट दिया जहां उन्होंने जीत दर्ज कराई। हालांकि किशोर के भाजपा में जाने के एक दिन बाद ही भाजपा को भी उस समय झटका लगा था जब टिहरी के विधायक धन सिंह नेगी ने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा पार्टी के उम्मीदवारों के एलान ने धन सिंह नेगी को कांग्रेस का दामन थामने को मजबूर किया। क्योंकि जिस टिहरी सीट से नेगी विधायक थे उस पर भाजपा ने किशोर उपाध्याय को अपना कैंडिडेट घोषित कर दिया था। भाजपा को उस समय भी करारा झटका लगा था जब विधानसभा चुनाव होने से कुछ समय पहले ही तत्कालीन कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य कांग्रेस में आ गए थे।

साल 2022 की शुरुआत में जब 14 फरवरी को राज्य में विधानसभा चुनाव हुए तो अधिकतर को यकीन नहीं था कि इस बार भाजपा मिथक तोड़ने जा रही है। दरअसल उत्तराखण्ड के इतिहास में अब तक कोई दल लगातार दोबारा सरकार नहीं बना पाया था। लेकिन एक मिथक बरकरार रहा वह था कि राज्य में मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई भी मुख्यमंत्री रहते विधानसभा का अपना चुनाव नहीं जीत पाया।राज्य में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला लेकिन मुख्यमंत्री धामी अपनी विधानसभा सीट खटीमा से चुनाव हार गए। बावजूद इसके भाजपा ने धामी पर ही विश्वास कायम रखा। यही कारण रहा कि चुनाव हारने के बाद भी धामी 23 मई को सूबे के सीएम बन गए। इसके बाद हुए उपचुनाव में धामी चंपावत से रिकॉर्ड मतों से जीते। इस तरह देखें तो प्रदेश में 2022 का साल राजनीति के लिहाज से खास रहा। पहली बार विधानसभा में ऋतु खण्डूरी को पहली महिला स्पीकर बनाया गया। भाजपा और कांग्रेस दोनों को नए प्रदेश अध्यक्ष मिले, भाजपा ने महेंद्र भट्ट तो कांग्रेस ने करन माहरा को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी। दोनों में खास बात यह रही कि दोनों ही विधायक का चुनाव हार गए थे।

धामी के धाकड़ फैसले
2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 3 बड़े फैसले ऐसे लिए गए जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए। इनमें सबसे पहला समान नागरिक संहिता कानून (यूनिफॉर्म सिविल कोड) है। जिसे लागू करने की दिशा में पहल कर कमेटी गठित की है। धामी ने अपने पहले कार्यकाल में प्रदेश की जनता से यह वायदा किया गया था कि चुनाव जीतते ही सबसे पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किया जाएगा। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई। जिसमें चार अन्य सदस्यों में दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, राज्य के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के अलावा टैक्स पेयर एसोसिएशन के मनु गौर और शिक्षाविद सुरेखा डंगवाल को शामिल किया गया। समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार कर रही विशेषज्ञों की समिति का कार्यकाल अगले साल 27 मई तक बढ़ाया गया है। धामी ने एलान किया है कि ड्राफ्ट तैयार होते ही इसे देश में सबसे पहले लागू कर दिया जाएगा। जिसमें 6 माह का समय लग सकता है।

इसके अलावा धामी सरकार ने विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी विधेयक पेश किया। इसमें गैर-कानूनी तरीके से होने वाले धर्मांतरण को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम तीन साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। उत्तराखण्ड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022 में कैद की सजा के अलावा दोषियों पर कम से कम 50,000 रुपए जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। तीसरे फैसले में सीएम धामी ने आधी आबादी को बड़ी सौगात देते हुए राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की घोषणा की है। जो कि ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। हाईकोर्ट में शासनादेशों पर रोक के बाद से महिला क्षैतिज आरक्षण को लेकर संशय बना हुआ था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद शासन ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। कोर्ट से स्थगन आदेश लेने के साथ ही अधिनियम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया। गत 30 नवंबर को सरकार ने विधानसभा में इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करा लिया है। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा।

भगत का विवादास्पद बयान
उत्तराखण्ड के भाजपा विधायक बंशीधर भगत एक बार फिर से अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में रहे। उन्होंने हिंदू देवी-देवतओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘विद्या मांगो तो सरस्वती को पटाओ, बल मांगो-शक्ति मांगो तो दुर्गा को पटाओ। अगर धन चाहिए तो लक्ष्मी को पटाओ’ यानी सब महिलाओं को दे दिए। आदमी के पास है क्या, एक शिवजी हैं, वह पहाड़ में पड़े हुए हैं। उनके पास कपड़े-लत्ते कुछ नहीं हैं, ऊपर से गले में सांप पड़ा हुआ है। वहीं गंगा जी भी अपने सिर पर लेकर घूम रहे हैं। एक विष्णु भगवान हैं, वह समुद्र की गहराइयों में छिपे हुए हैं। भाजपा विधायक ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तो भगवान ने पहले ही कर दी थी। हल्द्वानी में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बीजेपी मंत्री ने यह बयान दिया था, जिसे सुनकर कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं हैरान रह गईं। उनके इस बयान की राजनीतिक गलियारों में भी खूब आलोचना हुई।

घास पर रार
जुलाई में एक-दो घस्यारी महिलाओं के वीडियो वायरल के बाद स्थानीय जनता में सरकार के प्रति आक्रोश उत्पन्न हो गया था। वायरल वीडियो में 15 जुलाई को जोशीमठ के हेलंग गांव में जंगल से घास ला रही महिलाओं से उनके घास के गठरी छीनते पुलिस व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान दिख रहे थे। जिसमें एक महिला रो रही थी तो दूसरी के साथ छीना-झपटी हो रही थी। राजकीय पर्व हरेला के अवसर पर घटित हुई यह घटना सरकार के लिए मुश्किल भरी रही। हेलंग गांव में आंदोलन हुए। आंदोलनकारियों का कहना था कि न सिर्फ हरियाली नष्ट की जा रही है, बल्कि उस हरियाली के रक्षकों के साथ भी बदसलूकी की गई उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनका चालान किया गया। लोगां ने एक सुर में आवाज उठाई कि डम्पिंग जोन के नाम पर पर्यावरण के मानकों की अनदेखी करते हुए नदी के ठीक ऊपर आबादी के नजदीक ऐसे एक विद्युत कंपनी को कार्य की स्वीकृति देना खतरनाक है।

भट्ट बने प्रदेश अध्यक्ष
महेंद्र भट्ट 2022 में बद्रीनाथ विधानसभा से चुनाव हारे थे। भाजपा संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। इन सब समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा हाईकमान ने 31 जुलाई के दिन महेंद्र भट्ट को उत्तराखण्ड भाजपा की कमान सौंपी। क्यांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ठाकुर हैं और कुमाऊं मंडल से आते हैं। इसके चलते गढ़वाल और ब्राह्मण फैक्टर भी भट्ट की ताजपोशी के लिए महत्वपूर्ण कारक बना।

नकल माफिया पर नकेल
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षाओं में नकल माफिया का सीधा कब्जा बना हुआ था। नौकरियां बेची जा रही थीं। पैसे वाले नौकरी खरीद रहे थे। होनहार गरीब बच्चों का अधिकार छीना जा रहा था। राजनेताओं, नौकरशाहों और माफिया के गठजोड़ से यह खेल पिछले एक दशक से खेला जा रहा था। धामी की सख्ती से इस नापाक गठबंधन को खत्म करने की मुहिम चलाई गई। इससे जुड़े 34 सदस्य सलाखों के पीछे जा चुके हैं। आयोग के सचिव को भी सस्पेंड किया जा चुका है।

अधिकारियों की गिरफ्तारी
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर परीक्षा घोटालों की जांच कर रही एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष और आईएफएस अधिकारी आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल और पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ ने यह कार्रवाई 2016 में कराई गई वीपीडीओ भर्ती परीक्षा में हुई धांधली की जांच के बाद की है। सेवानिवृत्ति से महज आठ दिन पहले ही आईएएस रामविलास यादव को आय से 500 गुना अधिक यानी करीब 500 करोड़ रुपये की सपंत्ति अर्जित करने के आरोप में न केवल सस्पेंड किया गया बल्कि उसकी गिरफ्तारी भी हुई।

हादसों का साया
उत्तराखण्ड में साल 2022 हादसों के लिहाज से भारी गुजरा है। इस साल दो सबसे बड़े हादसे हुए जिसमें 60 लोगों की जान चली गई। इस साल का सबसे बड़ा बस हादसा उत्तराखण्ड के कोटद्वार-रिखणीखाल-बीरोंखाल मार्ग पर सिमड़ी गांव के पास हुआ। जिसमें बारातियों से भरी बस में 50 लोग सवार थे, उनमें से 34 की मौत हुई। 4 अक्टूबर दोपहर करीब 12 बजे हरिद्वार जनपद के अंतर्गत लालढांग क्षेत्र के ग्राम कटेबड़ निवासी नंदराम के पुत्र संजीव की बारात जीएमओयू की बस से प्रखंड बीरोंखाल के अंतर्गत ग्राम कांडा तल्ला निवासी प्रकाश चंद्र के घर की ओर रवाना हुई। शाम करीब सात बजे कांडा तल्ला गांव से करीब एक किलोमीटर पहले सिमड़ी बैंड के समीप बस अनियंत्रित होकर करीब साढ़े तीन सौ मीटर गहरे खड्डे में जा गिरी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही कांडा तल्ला व सिमड़ी गांवों के ग्रामीण राहत-बचाव कार्य में जुटे। यह हादसा बारातियों से भरी बस के साथ हुआ। जो कि 500 मीटर गहरी खाई में गिरी थी। बस में करीब 50 बाराती सवार थे। जिनमें से 34 की मौत हुई। बस के दुर्घटना होने के पीछे बस चालक का नियंत्रण खोना बताया गया है। दूसरा सबसे बड़ा हादसा यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर डामटा रिखाऊं खड्डे के पास हुआ। उस बस में 30 लोग सवार थे। जिनमें से 26 शव बरामद हुए थे। 6 जून को उत्तरकाशी यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर डामटा रिखाऊं खड्डे के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ। जिसमें अनियंत्रित होकर बस खाई में जा गिरी। बस में 30 लोग सवार थे। जिनमें से 26 की जान गई और चार यात्री घायल हुए। यात्री मध्य प्रदेश के थे। जो कि चारधाम यात्रा पर निकले थे। इसके अलावा चंपावत जिले में 22 फरवरी की सुबह सुखीढांग रीठा साहिब रोड के पास एक बस के खाई में गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई। हादसे में दो अन्य लोग घायल हो गए जिन्हें अस्पताल ले जाया गया। यात्रियों का समूह बस में सवार होकर एक शादी में शामिल होने के बाद वापस लौट रहा था।

मानवता को किया शर्मसार
14 सितंबर को पिथौरागढ़ की घटना ने प्रदेश में स्वास्थ  चिकित्सा की हकीकत से रूबरू कराया। जिसमें एक बच्चे ने ओपीडी की लाइन में लगे पिता की गोद में दम तोड़ दिया। मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना ने समस्त उत्तराखण्ड को शर्म से सर झुकाने पर मजबूर कर दिया। उत्तराखण्ड स्वास्थ विभाग का ये कोई पहला मामला नहीं है, पिछले महीने अल्मोड़ा में एमरजेंसी ड्यूटी पर एक डॉक्टर साहब नशे में टुल्ल मिले थे। उत्तरकाशी में एक परिवार ने अपनी बहू और बच्चे को खोया था। उत्तराखण्ड के जर्जर विकास की पोल खोलती एक और घटना उस समय सामने आई जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत में स्कूल शौचालय की छत गिरने से एक बच्चे की मृत्यु हो गई। कई बच्चे घायल हो गए।

माणा में दिखा मोदी का धामी प्रेम
मोदी 21 अक्टूबर को जब उत्तराखण्ड आए उस समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी के कुछ विरोधी नेता लॉबिंग करने में लगे थे। लेकिन जब मोदी ने माणा के मंच से धामी की पीठ थपथपाई, उन्हें बहुत स्नेह और आशीर्वाद दिया तो विरोधियों के अरमानों पर पानी फिर गया। पीएम मोदी ने अपने भाषण में सीएम धामी के उस कथन को भी सराहा जिसमें उन्होंने सीमांत गांव को ‘अंतिम’ के बजाए ‘पहला’ गांव कहा था। मोदी ने 3400 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास भी किया।

केदारनाथ का कीर्तिमान
वर्ष 2013 की त्रासदी में केदारनाथ उजड़ गया था। शंका की जाने लगी थी कि शायद ही भगवान शिव की इस नगरी में फिर कभी भक्तों की बहार आए। लेकिन केदार के द्वार में इस बार आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। यात्रा ने तमाम रिकॉर्ड तोड़ नए कीर्तिमान स्थापित किए। पहली बार 15 लाख 61 हजार यात्री केदार दर्शन को पहुंचे। इस दौरान करीब 400 करोड़ का कारोबार हुआ। इससे जहां स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, वहीं सरकार को भी 8 करोड़ से अधिक का राजस्व मिला। कोरोनाकाल के बाद इस यात्रा से राज्य में पर्यटन तेजी से पटरी पर लौट आया है। चारधाम यात्रा पहाड़ की आर्थिकी की मेरुदंड रही है। इस यात्रा से लाखों लोगों का रोजगार भी जुड़ा हुआ है। कोरोनाकाल से पहले वर्ष 2019 में चारधाम की यात्रा के साथ ही शीतकाल में भी तीर्थाटन एवं पर्यटन व्यवसाय अच्छा चल रहा था। जिससे लोगों की आर्थिकी भी मजबूत हुई। लेकिन अचानक से वर्ष 2020 में वैश्विक महामारी कोरोना बीमारी से सब चौपट हो गया। जिससे उबरने में दो साल का समय लग गया। जिसके चलते 2020 में केवल चारों धामों के कपाट पूजा अर्चना के लिए खोले गए। तीर्थयात्रियों एवं स्थानीय लोगों को भी भगवान दर्शन नहीं दे पाए। जबकि वर्ष 2021 में कोविड गाइड लाइन से चारधाम में श्रद्धालुओं ने सीमित संख्या में भगवान के दर्शन किए।

केदारनाथ में सरकार का स्याह पक्ष
केदारनाथ में तीर्थयात्रियों की मौत के मामले में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा, केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान में करीब 164 लोगां की मौत हो गई। केदारनाथ में वर्ष 2012 में 72 यात्रियों की मौत हुई थी, यह आंकड़ा छह महीने के दौरान केदारनाथ यात्रा का है। लेकिन इस वर्ष मात्र डेढ़ महीने की यात्रा में ही मरने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 75 पार कर गई थी। तीर्थयात्रियों की मौत पर विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह यात्रियों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे सकी जिसके चलते अधिकतर यात्री ऑक्सीजन और हार्टअटैक से मरे। जबकि पहली बार बड़ी संख्या में घोड़ा-खच्चर की भी मौत हुई। इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी प्रदेश सरकार पर पशुओं की मौत पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

पूर्व सीएम के विरोधी सुर
राज्य की राजनीति में भाजपा के अंदर बवंडर भी मचा जब धामी सरकार के खिलाफ उनके अपने ही विरोधी सुर अलापते नजर आए। जिसकी शुरुआत तीरथ सिंह रावत ने यह कहकर कि राज्य में बिना कमीशन के कोई काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में बिना परसेंटेज, कमीशन के कोई अपना काम नहीं करवा सकता है। तीरथ सिंह रावत के इस बयान को धामी सरकार पर हमला करने से जोड़ा गया। तीरथ के बाद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने भी धामी सरकार के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी के कामों पर सवाल उठाए। कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत को भी भाजपा और धामी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया। इसी के साथ सूबे के दो पूर्व सीएम और धामी के बीच राजनीतिक रिश्ते खराब होने की चर्चा शुरू हो गई।

चर्चाओं में रहा त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा
7 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की तो तरह-तरह की सियासी चर्चा शुरू हो गई। जिसकी व्याख्या त्रिवेंद्र के विरोधी और राजनीतिक समर्थक दोनों ने अपनी-अपनी तरह से की। राजनीतिक के जानकार कहते-सुने गए कि उत्तराखण्ड भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक त्रिवेंद्र की सबसे बड़ी नाराजगी यूकेएसएससी घोटाले में शामिल हाकम सिंह को उनका करीबी बताए जाने को लेकर रही। यूकेएसएससी घोटाले के मुख्य आरोपी हाकम सिंह की वैसे तो हर भाजपा नेता के साथ तस्वीर थी। लेकिन सबसे ज्यादा वायरल त्रिवेंद्र सिंह के साथ ही हुई थी।

हेलीकॉप्टर हादसा
17 अक्टूबर को केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ और सात लोगों की जान चली गई। खराब मौसम की वजह से यह हादसा हुआ है। इससे पहले भी मई में एक ऐसी घटना होते-होते बची थी। 31 मई 2022 को केदारनाथ में ही यात्रियों से भरे एक हेलीकॉप्टर की हार्ड लैंडिंग हुई थी। जिसके बाद जून में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने 7 और 8 जून को ऑडिट कराया। इसमें पता चला कि केदारनाथ में हेलीकॉप्टर सेवा देने वाली पांचों कंपनियां सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर रही थी। सुरक्षा संबंधी नियमों पर ध्यान कम दिया जा रहा था। जिसके बाद पांचों हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स पर डीजीसीए ने पांच- पांच लाख का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना सिर्फ सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने के लिए लगाया गया था।

द्रौपदी डांडा में मौत का तांडव
उत्तरकाशी के द्रौपदी के डांडा-2 पर्वत चोटी पर हिमस्खलन हुआ। जिसमें नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के 28 पर्वतारोही फंस गए। इनमें 10 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी गई। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रिंसिपल कर्नल बिष्ट ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हिमस्खलन में फंसे 28 में से 10 के शव बरामद हो गए हैं। जबकि 18 लोग अब भी लापता हैं।

पहाड़ पर रेल के लिए टनल निर्माण का कीर्तिमान
उत्तराखण्ड में रेल विकास निगम लिमिटेड रेल प्रोजेक्ट-2 के तहत ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे लाइन के काम ने इस साल गति पकड़ ली है। इस प्रोजेक्ट में शिवपुरी से ब्यासी तक के बीच 1 किलोमीटर टनल का काम केवल 26 दिनों में पूरा कर लिया गया। इतने कम समय में टनल का काम पूरा करना अप्रैल माह में एक नया कीर्तिमान बना। इस प्रोजेक्ट की कीमत 4200 करोड़ रुपए है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने से ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच की यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। 125 किमी लंबी इस परियोजना के दिसंबर 2024 तक पूरा होने की संभावना है। परियोजना में रेल लाइन पर 12 नए रेलवे स्टेशन एवं 17 सुरंगें होंगी, जिसके पूरा होने से उत्तराखण्ड में पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है।

बाहरी राज्यों के खनन माफिया को जोर का झटका
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माफिया के खिलाफ एक और ऐसा काम कर दिखाया जो अभी तक उत्तराखण्ड का कोई भी मुख्यमंत्री नहीं कर पाया। धामी ने बाहरी राज्यों से उपखनिजों के आयात पर रोक लगाकर खनन माफिया को जोर का झटका दिया है। ये खनन माफिया उत्तराखण्ड राज्य के नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बताए जाते हैं। धामी सरकार के इस कदम से उत्तराखण्ड को सालाना लगभग 40 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होने से बचने की उम्मीद है। सरकार के इस आदेश पर सख्ती से अमल हुआ तो यमुना जैसी नदियां उत्तराखण्ड राज्य के लिए ‘पैसों का पेड़’ साबित होंगी। कहा जा रहा है कि धामी सरकार की इस कार्रवाई से खनन माफिया की नींद उड़ी हुई है।

5 लाख रोजगार का वायदा, 6 हजार को किया बेरोजगार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव प्रचार और सरकार के गठन के बाद कई बार राज्य के युवाओं को रोजगार देने को अपनी प्राथमिकता बताया है। अपने घोषणा पत्र में पांच लाख लोगों को रोजगार देने का वायदा भी किया। लेकिन सरकार गठन के बाद से लेकर अभी तक तकरीबन 6 हजार आउटसोर्सिंग के तहत रोजगार पाने वालों को सरकार बेरोजगार कर चुकी है। वन विभाग द्वारा प्रदेश के सभी वन प्रभागों में 5 हजार स्थानीय युवाओं को वन प्रहरी के तौर पर तैनात किया गया था। यह योजना 31 मार्च तक ही थी। सात माह तक चली इस योजना को 31 मार्च को खत्म कर दिया गया जिस से 5 हजार वन प्रहरियों की सेवाएं एक ही दिन में समाप्त हो गईं। विभाग के पास केवल एक ही तर्क है कि उनके पास 31 मार्च 2022 तक का ही बजट था जो कि खत्म हो गया है। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में उपनल और पीआरडी के माध्यम से फार्मासिस्ट, नर्स, बार्ड ब्वॉय तथा अन्य संवर्गों में सैकड़ों युवाओं को तैनात किया गया था। यह नियुक्तियां एक वर्ष के अनुबंध के तहत की गई थी। अनुबंध खत्म होते ही उनकी सेवाओं से हटा दिया गया है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में 600 के करीब फार्मास्टि, नर्स और वार्ड ब्वॉय आदि पदों पर कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

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