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ग़ाज़ा में युद्ध के शिकार होते नवजात बच्चे 

इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध अपने छठे महीने में आ पहुंचा है। युद्ध की स्थिति ने हमेशा भय ,भूंख और अकाल की स्थिति उत्पन्न की है, जिसका शिकार बच्चें भी हो रहे हैं । संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसियों के अनुसार ग़ाज़ा में पाँच महीने की सघन इसराइली बमबारी और सहायता आपूर्ति के लगातार बाधा पहुँचने के कारण भुखमरी बढ़ रही है और इन हालातों में नवजात शिशुओं मौत की संख्या बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशुओं की मौत वजन कम होने से हो रही है। दरअसल डब्ल्यूएचओ की प्रवक्ता पदाधिकारी डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने कहा कि चिकित्सक और चिकित्सा कर्मचारी जो जानकारी दे रहे हैं, उससे मालूम होता है कि वो पूर्ण खाद्य अभाव और भुखमरी के प्रभाव देख रहे हैं। नवजात शिशुओं की मौत केवल इसलिए हो रही है क्योंकि जन्म के समय उनका वज़न बहुत कम था। इसके अलावा ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो मौत के निकट पहुँच रहे हैं और जिन्हें तुरन्त माँ के दूध या भोजन की जरूरत है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि लगातार खाद्य अभाव या भूख संकट का सामना कर पाने में असमर्थ नवजात शिशुओं और छोटी उम्र के बच्चों की संख्या बढ़ रही है। दूसरी तरफ़ चिकित्सा टीमें खतरनाक स्तर पर कम वजन वाली गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में भर्ती कर रही हैं। डॉक्टर मार्गरेट हैरिस के कहने अनुसार ये जटिलताएँ, गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण नहीं होने के कारण उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में अकाल के जोखिम की ये स्थिति,पूरी तरह युद्ध का नतीजा है। गौरतलब है कि वैश्विक पोषण विशेषज्ञों ने भी ग़ाज़ा को लेकर आगाह किया था कि इसके उत्तरी इलाक़े में, किसी भी समय अकाल पड़ सकता है। 18 मार्च को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क द्वारा ग़ज़ा पर प्रकाशित आईपीसी की रिपोर्ट के नतीजों के बारे में ज़ोर देकर कहा है कि “भूख, भुखमरी और अकाल”, इसराइल द्वारा मानवीय सहायता आपूर्ति और व्यावसायिक चीज़ों के प्रवेश पर लगाए गए व्यापक प्रतिबन्धों, व्यापक आबादी का विस्थापन और अहम बुनियादी ढाँचे के विध्वंस का नतीजा है।

 

भुखमरी की वजह से अधिकतर परिवारों ने इस उम्मीद से अपने बच्चों को अकेले ही दक्षिण इलाके की ओर भेजना शुरू कर दिया है, कि वहाँ कोई भोजन मिल सकता है । हालांकि वहां पहले से ही 18 लाख विस्थापित लोग एकत्र है।इजरायल और हम्मास के बीच जारी युद्ध से ग़ाज़ा पट्टी में रह रहे लोगों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। युद्ध की चपेट में मासूम बच्चों तक की बलि चढ़ रही है। ग़ज़ा में यूएन की और पहुँचाई जा रही मानव सहायताओं को भी इजरायल बाधित कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इजराइल सरकार से “पूरे ग़ाज़ा में मानवीय ज़रूरतों के सामान की निर्बाध और पूर्ण आपूति व पहुँच सुनिश्चित करने” की अपील की थी। यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि “ग़ाज़ा में फिलिस्तीनी लोग भयानक स्तर के खाद्य अभाव और तकलीफों का सामना कर रहे हैं। यह पूर्णतः मानव-निर्मित आपदा है ,और इसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तत्काल एक मानवीय युद्ध विराम लागू किए जाने की ज़रूरत को दर्शाती है।

 

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