पाकिस्तानी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान आईएमएफ द्वारा आखिरी किश्त पाकिस्तान को दिए जाने का विरोध करते रहे हैं। इमरान खान ने इस विरोध में आईएमएफ को चिट्ठी लिखते हुए अपील की थी कि वो ऐसा न करें। लेकिन अब पाकिस्तान और आईएमएफ यानि अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बीच पाकिस्तान को आखिरी किश्त देने पर सहमति बन गई है। आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 20 मार्च को कर्ज देने के लिए दूसरी और आखिरी समीक्षा पर एक समझौता हुआ। आईएमएफ द्वारा इसके जानकारी दी गई है। पाकिस्तान के लिए स्टैंड-बाय व्यवस्था के तहत 3 अरब डॉलर के ऋण की आखिरी किश्त मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस कर्ज के तहत इस देश को 1.1 अरब डॉलर मिलेंगे। आईएमएफ से कर्ज की मंजूरी को जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई चीफ इमरान खान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया हाउस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा कहा गया है कि पाकिस्तान के आर्थिक कार्यक्रम की दूसरी समीक्षा पर चर्चा के लिए आईएमएफ की टीम ने 14 से 19 मार्च तक इस्लामाबाद का दौरा किया था। मुद्रा कोष ने कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक और वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। आईएमएफ ने कहा कि पाकिस्तान चालू वित्त वर्ष के दौरान सर्कुलर ऋण को सहमत स्तर पर रखने के लिए गैस और बिजली की कीमतों में और वृद्धि करेगा। गौरतलब है कि पाकिस्तानी जनता लगातार बढ़ रही महगाई की मार पहले ही झेल रही है। जिसका विरोध पाकिस्तानी जनता करती नजर आती है। आईएमएफ के मुताबिक पाकिस्तान ने एक नया मध्यम अवधि का बेलआउट पैकेज लेने में रुचि दिखाई है और आने वाले महीनों में इस पर चर्चा शुरू होगी।
क्यों नहीं चाहते इमरान पाकिस्तान को कर्ज मिले
पीटीआई के समर्थक पाकिस्तान को लोन न देने की मांग को लेकर वाशिंगटन में आईएमएफ के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे । पिछले महीने ही इमरान खान ने आईएमएफ को चिठ्ठी लिखते हुए मांग की थी कि पाकिस्तान को कोई कर्ज देने से पहले चुनाव परिणामों की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा इमरान खान के अनुसार यह कर्ज पाकिस्तान को गरीबी की ओर ले जाएगा और पहले से ज्यादा कंगाल देश पर बोझ बढ़ेगा। हालांकि आईएमएफ ने लोन पर सहमति दे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इरादों पर पानी फेर दिया है।
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