जदयू नेता नीतीश कुमार हों, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह हों या फिर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महिलाओं को लेकर इनका नजरिया लगभग एक समान नजर आता है। गत् पखवाड़े बिहार विधानसभा में ही नहीं बल्कि राज्यसभा में भी महिला नेताओं का अपमान देखने को मिला। बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बोल बिगड़े तो राज्यसभा में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिस तरीके के सम्बोधित किया वो सुनने के बाद महिलाओं को लेकर उनका नजरिया भी सामने आ गया। महिलाओं के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने से ये नेता सवालों व आलोचनाओं के घेरे में आ चुके हैं। नीतीश कुमार ने राजेडी विधायक रेखा देवी और ललन सिंह ने बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकीं राबड़ी देवी को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया वो हैरान करने वाला है
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक विकासपरक सोच-विचार रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। लेकिन अब महिलाओं के हितचिंतक रहने वाले नीतीश कुमार पर प्रश्न खड़े होने लगे हैं। हाल ही में 24 जुलाई को बिहार विधानसभा में राज्य के संशोधित आरक्षण कानून को संविधान की नौवीं अनसूचि में शामिल किए जाने की मांग को लेकर चल रहे विपक्ष के हंगामे के बीच आरजेडी विधायक रेखा देवी को नीतीश कुमार ने खरी-खोटी सुना दी। जिसके बाद से उनका यह बयान लोक विवादित हो गया। मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में आरक्षण संबंधी मामले पर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बताया कि आरक्षण की सीमा बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बिहार मुख्यमंत्री सदन में आरजेडी पर आरोप लगाते हुए बोल रहे थे कि इस पार्टी ने साल 2005 के बाद महिलाओं को आगे नहीं बढ़ाया। इसी बीच राजद नेता रेखा देवी ने नीतीश कुमार के आरोप पर अपनी राय रखना चाहीं। लेकिन रेखा देवी का ऐसे बीच में हस्तक्षेप करना मुख्यमंत्री को रास नहीं आया। उन्होंने रेखा देवी की तरफ ऊंगली उठाते हुए कहा कि ‘अरे महिला हो, कुछ जानती नहीं हो, हम कह रहे हैं चुपचाप सुनो। इन लोगों (राजद) ने किसी महिला को आगे बढ़ाया था 2005 के बाद हमने महिलाओं को आगे बढ़ाया है। बोल रही हो, फालतू बात… इसलिए कह रहे हैं, चुपचाप सुनो।’

नीतीश कुमार की इस टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा मच गया। हालांकि बाद में जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उनके भाषण को राजनीतिक उदेश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए इसके बजाय उसे पूरा सुना जाना चाहिए। लेकिन नीतीश द्वारा महिला विधायक के सामने इस लहजे से पेश आने को लेकर विपक्ष उनकी लगातार आलोचना कर रहा है। सदन में नीतीश कुमार के दिए इस बयान की क्लिप को साझा करते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखते हुए कहा कि ‘महिला हो कुछ जानती हो? महिलाओं पर ओछी, गैर वांछित, असभ्य, अशिष्ट एवं निम्नस्तरीय टिप्पणियां करना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आदत में शुमार हो चुका है। प्रदेश के लिए यह अत्यधिक गंभीर व चिंतनीय विषय है। ‘सीएम ने कुछ दिन पहले भी आदिवासी वर्ग की भाजपा की महिला विधायक पर भी सुंदरता संबंधित भद्दी टिप्पणी की थी। आज अनुसूचित जाति की दो बार से महिला विधायक रेखा पासवान पर टिप्पणी की।’ उन्होंने नीतीश कुमार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि ‘सृष्टि के सबसे बड़े ज्ञाता, ध्याता, व्याख्याता और रचयिता तो आदरणीय नीतीश जी बन चुके है। इनको छोड़ कर किसी को कुछ पता नहीं, किसी को कुछ आता-जाता नहीं।’
दूसरी तरह सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई कार्य किए हैं। उनकी सरकार द्वारा लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ाने के लिए महिलाओं के लिए पचास फीसदी की आरक्षण की व्यवस्था की गई। स्कूली शिक्षा के लिए लड़कियों को प्रोत्साहित किए जाने को लेकर सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए। महिलाओं को सामाजिक पारिवारिक जटिलताओं के हिंसा से बचाने के लिए शराबबंदी का वादा भी नीतीश कुमार ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के एक कार्यक्रम में किया था। इसके अलावा ‘भ्रूण हत्या पर रोक’, ‘जीविका’, ‘विधवा पुनर्विवाह अनुदान’, ‘सामाजिक पुनर्वास कोष’, ‘बाल विवाह तथा दहेज प्रथा उन्मूलन’, ‘पोशाक योजना’, ‘साइकिल योजना’ आदि के माध्यम से महिलाओं की तकदीर व तस्वीर बदलने का भी नीतीश सरकार ने काम किया है। नीतीश कुमार की ‘जीविका योजना’, ‘साइकिल योजना’ जैसे सरकारी स्कीम की बदौलत बार-बार महिलाओं के वोट बड़ी संख्या में उन्हें मिलते रहे हैं।
पूर्व में भी की थी अमर्यादित टिपण्णी
गौरतलब है कि नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं के लिए इस तरह के अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल पहले भी किया गया है। इससे पहले साल 2023 के दौरान बिहार विधानसभा में ही जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर बोलते हुए वो आपत्तिजनक और असंसदीय भाषा का प्रयोग कर चुके हैं। जातिगत गणना के दौरान हुए आर्थिक सर्वेक्षण पर अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला और पुरुष के शारीरिक संबंधों, आर्थिक सर्वेक्षण में महिलाओं की बढ़ रही साक्षरता और प्रजनन दर को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे विपक्ष ने अश्लील और अपमानजनक बताया था। हालांकि उन्होंने बाद में अपने इस बयान पर माफी मांग ली थी। नीतीश कुमार कई बार अपने प्रतिद्वंद्वी नेता और उनके परिवार के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां सार्वजनिक मंच से कर चुके हैं। नीतीश कुमार ही नहीं जदयू के ही अन्य नेता ललन सिंह ने भी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लेकर विवादित बयान दिया था। उनका कहना था कि बजट जैसी चीज राबड़ी देवी की समझ से बाहर है, उन्हें हस्ताक्षर करना नहीं आता, बजट पर क्या बोलेंगी। दरअसल 23 जुलाई को बजट पेश होने के बाद राबड़ी देवी ने सरकार पर ‘झुनझुना पकड़ाने’ का आरोप लगाया था।
जिस पर ललन सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि ‘राबड़ी देवी हस्ताक्षर कितना लंबा करती हैं, कभी वो भी देख लीजिए…तो बजट उनको कहां समझ में आएगा।’ जिसका जवाब देते हुए राबड़ी देवी ने कहा कि ललन सिंह को बताना चाहिए कि ‘उन्होंने अपनी मां-बहन और पत्नी को कितना पढ़ाया है।’ यही नहीं राबड़ी देवी ने जदयू नेता पर हमला करते हुए कहा कि ‘नीतीश कुमार और ललन सिंह ने महिलाओं का अपमान किया है इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। ललन सिंह की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी पढाई लिखाई के बारे में बोलकर बिहार की दलित महिला का अपमान किया गया है।’ वहीं नीतीश कुमार को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी शुरू से ही आदत है। हम तो सब जानते हैं कि वो महिला को कैसा मान सम्मान देते हैं। महिलाओं को बढ़ावा देने की बात बस दिखावट है। रेखा देवी को सही ठहराते हुए उनका कहना है कि हमने रेखा को मंत्री बनाया। जैसे घर में काम होता है वैसे ही वह सदन में काम कर रही थी। विकास के बारे में, बिजली पानी के बारे में आवाज उठाना सवाल पूछना विपक्ष का काम है। नीतीश कुमार को लेकर उन्होंने कहा कि उनको समझना चाहिए था। ज्यादा पढ़े लिखे हैं, विद्वान हैं। उनको ये बात नहीं बोलनी चाहिए थी।
कांग्रेस अध्यक्ष भी पीछे नहीं
बिहार विधानसभा सरीखा दृश्य राज्यसभा में भी देखने को मिला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर विवादित टिप्पणी की। बजट पर संसद के दोनों सदनों में चल रही चर्चा के दौरान राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस बार के बजट में केवल दो राज्यों को ही सरकार ने दिया है, बाकी किसी को कुछ नहीं मिला है। इसी बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने बोला कि वित्त मंत्री आपके सवाल का जवाब देंगी। सभापति की बात पर मल्लिकार्जुन खड़गे बीच में ही बोल पड़े। उन्होंने कहा कि ‘मैं बोल लेता हूं… क्योंकि वो तो बोलने में एक्सपर्ट हैं… माताजी बोलने में तो एक्सपर्ट हैं… वो तो बोल ही देंगी।’ जिस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आपकी बेटी के बराबर हैं।
खड़गे द्वारा लगाए गए आरोपों पर वित्तमंत्री सीतारमण ने पलटवार कर कहा कि बजट भाषण में सभी राज्यों का नाम लेना सम्भव नहीं है। कांग्र्रेस देश की जनता को जान-बूझकर गुमराह कर रही है। वहीं खड़गे के वित्तमंत्री को माताजी कहने पर भाजपा आक्रामक हो गई है और उनसे माफी मांगने को कह रही है। यही नहीं खड़गे पिछले साल भी महिलाओं को लेकर अमर्यादित बयान दे चुके हैं। संसद में महिला आरक्षण को लेकर मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन’ के नाम से बिल पेश किया था। तब राज्यसभा में नेता विपक्ष खड़गे ने कहा कि महिलाओं की बात होती है तो पार्टियां कमजोर को ही मौका देती हैं। ऐसी महिलाओं को अवसर नहीं मिलता जो सशक्त होती हैं और अपनी बात को मजबूती के साथ रखने में सक्षम हों।
इस मामले पर काफी बवाल हुआ। वित्तमंत्री सीतामरण ने कहा कि आपने यह गलत बात कही है। आपकी पार्टी की तो मुखिया भी लम्बे समय से एक महिला ही रही हैं तो क्या वो कमजोर महिला थीं। बात यहां भी नहीं रुकी और खड़गे ने कहा कि आपकी बात अलग है। मैं कहता हूं कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं से क्या होता है। इस पर भी सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी जनजाति समुदाय से हैं। क्या वह कमजोर हैं। तब भी कमजोर महिलाओं वाले बयान पर खड़गे की काफी आलोचना हुई थी।

