कोरोना की मार से त्रस्त देश का अब केंद्र सरकार और भाजपा से मोहभंग होने लगा है। भाजपा शासित राज्यों में हालात इतने भयावह हैं कि स्थानीय भाजपा नेताओं तक ने अपनी ही सरकारों के खिलाफ स्वर बुलंद करने शुरू कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से खफा कई सांसद, विधायक खुलकर सरकारी इंतेजामात पर टिका-टिप्पणी कर रहे हैं। केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने अपने गृह क्षेत्र बरेली में आॅक्सीजन की कमी को लेकर न केवल योगी को खत लिखा, बल्कि उसे सार्वजनिक भी कर डाला। कर्नाटक में भी येदियुरप्पा सरकार की विफलता के चलते भाजपा विधायकों में भारी बेचैनी पसर चुकी है। गोवा में सीएम प्रमोद सावंत की कार्यशैली पर वहां के स्वास्थ मंत्री मोर्चा खोल चुके हैं। ऐसे में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मदद से ‘सकारात्मक सोच’ का माहौल बनाने की तैयारी कर रहा है ताकि केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके। खबर है कि संघ प्रमुख ‘पाॅजीटिविटी अनलिमिटेड’ के नाम पर बजरिए टेलीविजन शो में बातचीत करने वाले हैं जिनमें कठिन समय में सकारात्मक रहने की सीख वे जनता को देंगे। खबर यह भी है कि हर माह अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस माह पीएम मोदी भी ‘सकारात्मकता की ताकत’ विषय पर बोलने वाले हैं। जानकारों का दावा है कि केंद्र सरकार हर शाम जारी होने वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड बुलेटिन में भी कुछ फेरबदल करने का मन बना रही है। सूत्रों की मानें तो इस बुलेटिन में ज्यादा जोर उन मरीजों पर दिया जाएगा जो कोविड निगेटिव हो चुके हैं। यानी सकारात्मक खबरें ही सामने लाने का प्रयास होगा। चर्चा जोरों पर है कि केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व सबसे ज्यादा परेशान सोशल मीडिया से है जो सच्चाई छुपाने के सारे प्रयासों को धता बताने का काम कर रहा है।
अब सकारात्मकता भरोसे सरकार-संघ

