अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ भड़काऊ बयान देने वाले डॉ. कफील खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाही की है। उनको सोमवार को कोर्ट के तरफ से जमानत मिली थी और वो शुक्रवार को रिहा होने वाले थे। पर अब उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
उनपर पिछले साल 12 दिसंबर को नागरिकता संसोधन खिलाफ चल रहे प्रोटेस्ट के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फाॅर्स ने कफील खान को २९ जनवरी को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने गिरफ्तार कर के अलीगढ़ लाया था। अलीगढ़ जेल में कुछ घंटे बिताने के बाद उनको मथुरा जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था।
National Security Act slapped against Dr Kafeel Khan, lodged in Mathura jail in connection with anti-CAA speech at AMU: Police
— Press Trust of India (@PTI_News) February 14, 2020
कफील खान को गिरफ्तार करने के लिए यूपी एसटीएफ लगाने पर सवाल भी उठे थे। हालांकि, उस समय पुलिस का कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत डॉक्टर कफील खान की गिरफ्तारी हुई है। उनके खिलाफ मुकदमा में कहा है कि उन्होंने अपने भाषण के दौरान कथित तौर पर कहा था कि ‘मोटा भाई’ सबको हिंदू और मुसलमान बनने की सीख दे रहे हैं। इंसान बनने की नहीं।
साथ ही कफील ने कहा था कि सीएए के खिलाफ संघर्ष हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। गिरफ्तार किए जाने के बाद कफील खान ने कहा था, “मुझे गोरखपुर के बच्चों की मौत के मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी। अब मुझको फिर से आरोपी बनाने की कोशिश की जा कर रही हैं। मैं महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि मुझे महाराष्ट्र में रहने दे। मुझको उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नहीं है।”
कुछ समय पहले गरोखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ६० बच्चो की मौत हुई थी। इसी मामले में उनको निलंबित किया गया था। उसके बाद वह सुर्खियों में आए थे। पर बाद में उनको क्लीन चीट मिल गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की शक्ति देता है।
यह अधिकार केंद्र और राज्य सरकार दोनों को समान रूप से मिले हैं। रासुका लगाकर किसी भी व्यक्ति को एक साल तक जेल में रखा जा सकता है। हालांकि, तीन महीने से ज्यादा समय तक जेल में रखने के लिए एडवाइजरी बोर्ड की मंजूरी लेनी पड़ती है। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा होने और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर रासुका लगाया जा सकता है।

