प्रधानमंत्री मोदी लंबे अर्से से देश भर में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एक साथ चुनाव कराने की वकालत कर रहे हैं। पीएम का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने से भारी आर्थिक बचत के साथ-साथ सरकार चलाने भी सुविधा होगी। लेकिन झारखण्ड में हरियाणा और महाराष्ट्र के साथ ही चुनाव कराने की इच्छुक भाजपा नजर नहीं आ रही। महाराष्ट्र और हरियाणा में अक्टूबर तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होनी है। जबकि झारखण्ड में विधानसभा का कार्यकाल जनवरी तक है। ऐसे में माना जा रहा था कि भाजपा तीनों राज्यों में एक साथ चुनाव कराने का प्रयास करेगी। अब लेकिन ऐसा संभव नहीं प्रतीत होता। दरअसल झारखण्ड में भाजपा बहुत मजबूत विकेट में नजर नहीं आ रही। यही कारण है कि 12 सितंबर को स्वयं पीएम वहां कई बड़ी परियोजनाओं की नींव रखने जा रहे हैं। राज्य विधानसभा दो अक्टूबर के दिन गांधी जी का डेढ सौंवी जयंती पर एक विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। यदि इन ये राज्यों संग झारखण्ड में चुनाव कराए जाते हैं तो चुनावी आचार संहित के चलते ये दो कार्यक्रम संभव नहीं। ऐसे में पीएम मोदी और भाजपा अपने घोषित राज्य ‘वन कंट्री-वन इलेक्शन’ से पीछे हटती नजर आ रही है।
वन कंट्री, वन इलेक्शन पर पीछे हटती भाजपा

