हजारों लोकतंत्र समर्थक सड़कों पर उतरे और सांसदों की गिरफ्तारी का विरोध किया। इस दौरान कई जगहों पर हिंसा भी हुई। आंदोलनकारियों ने सबवे स्टेशन की खिड़कियों और टिकट मशीन पर अपना गुस्सा निकाला और तोड़फोड़ की। एक अन्य घटना में तीन दर्जन से अधिक लोगों ने सुएन मुन जिले में एक शॉपिंग मॉल में तोड़फोड़ की।
इसके अलावा एक रेस्टोरेंट में भी हिंसा की घटना सामने आई है। दैनिक अखबार एपल डेली ने अपनी वेबसाइट पर एक वीडियो अपलोड किया है, जिसमें पुलिस को एक व्यक्ति को गिरफ्तार करते हुए देखा जा सकता है। मॉल में तोड़फोड़ के सिलसिले में पुलिस एक महिला समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
शनिवार को पुलिस ने छह सांसदों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। सांसदों पर आरोप है उन्होंने प्रत्यर्पण बिल पर चर्चा में बाधा पहुंचाने की कोशिश की थी।
हांगकांग प्रशासन की ओर से नियुक्त अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक पैनल ने कई खामियों को उजागर किया है। पैनल ने पाया है कि लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों से निपटने में पुलिस बल की भूमिका की जांच के लिए हांगकांग पुलिस की निगरानी करने वाली संस्था के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं।
यह भी पढ़े : हांगकांग में छात्र की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच फिर बढ़ा तनाव
हांगकांग में पिछले छह महीने से प्रदर्शन और रैलियां जारी हैं, लेकिन चीन ने ज्यादातर मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। आंदोलनकारियों की मांगों में पूरी तरह से स्वतंत्र चुनाव कराने के साथ ही पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच भी शामिल है। मुख्य कार्यकारी कैरी लैम ने कई बार स्वतंत्र जांच की मांग को खारिज किया और कहा कि वर्तमान निगरानी संस्था- स्वतंत्र पुलिस शिकायत आयोग (आईपीसीसी) इस काम में सक्षम है।
चीन ने पिछले छह महीने से हांगकांग में जारी विरोध प्रदर्शनों पर चिंता जताई है। बीजिंग ने कहा कि हांगकांग में कड़े सुरक्षा कानूनों की कमी है और इसी वजह से वहां लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। चीन ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों से निपटने के लिए कड़े सुरक्षा कानून को लागू करने की जरूरत है। इससे पहले चीन हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों को ‘डकैत’ बता चुका है।

