भारत जोड़ो न्याय यात्रा

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर से सड़क पर हैं। ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के जरिए राहुल का लक्ष्य 15 राज्यों के 110 जिलों में पहुंचना है। मकर संक्रांति के दिन मणिपुर से शुरू हुई 66 दिन की इस यात्रा के दौरान राहुल 6,200 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। पूर्वोत्तर के राज्यों मणिपुर, नागालैंड, असम और मेद्यालय से होते हुए यात्रा पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से गुजरते हुए 20 मार्च को महाराष्ट्र में समाप्त होगी। कांग्रेस ‘न्याय का हक मिलने तक’ का नारा दे भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को इस यात्रा के जरिए घेरने की रणनीति पर काम कर रही है तो भाजपा राहुल की इस यात्रा को चुनावी नौटंकी कह मोदी के नेतृत्व में असली न्याय जनता तक पहुंचाने का दावा कर रही है

सात सितंबर, 2022 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की उपस्थिति में राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा का आगाज किया था। 136 दिनों तक चली इस पद यात्रा के दौरान राहुल ने 6713 किलोमीटर का सफर 66 दिनों में पूरा कर एक रिकॉर्ड स्थापित करने का काम तो किया ही था, कांग्रेस संगठन में भी इस यात्रा ने नई स्फूर्ति तब पैदा की थी। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल ने भाजपा शासनकाल के दौरान कथित तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों में आ रही गिरावट, बेरोजगारी तथा धर्म के नाम पर समाज को बांटने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जनता का ध्यान आकर्षित किया था। यह यात्रा 30 जनवरी, 2023 को श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक में ‘महंगाई से नाता जोड़ो, मिलकर भारत जोड़ा और ‘नफरत छोड़ो, भारत जोड़ो’ जैसे नारों के साथ समाप्त हुई थी। इस यात्रा के ठीक एक बरस बाद और लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले राहुल का दोबारा यात्रा पर निकलना भाजपा के लिए चिंता का बायस तो कांग्रेस के मृतप्राय संगठन में जान फूंकने की कवायद बतौर देखा जा रहा है।

राहुल की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों की राय में राहुल और कांग्रेस का लक्ष्य इस यात्रा के जरिए 355 लोकसभा सीटों पर पार्टी को मजबूत करने का है। इनमें से वर्तमान में भाजपा के पास 236 सीटें हैं जबकि कांग्रेस 2019 में मात्र 14 सीटें जीत पाई थीं। कांग्रेस रणनीतिकारों ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत मणिपुर से कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि पूर्वोत्तर के राज्यांे के मुद्दों पर वह संवेदनशील है और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मणिपुर में चल रहे जातीय तनाव को नजरअंदाज करने का पुरजोर विरोध करती है। राहुल की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की धूम मची है। हिंदी पट्टी के राज्य विशेष रूप से पूरी तरह राममय हो चले हैं। यह स्पष्ट है कि भाजपा की रणनीति 2024 के लोकसभा चुनाव में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण पर केंद्रित है। ऐसे में कांग्रेस इस यात्रा के जरिए भाजपा के पक्ष में बने माहौल की धार कुंद करने का प्रयास कर रही है।

शुरुआती चरण में सफलता
राहुल गांधी की यात्रा का मणिपुर में खासा प्रभाव रहा। जहां-जहां से यात्रा गुजरी, उन्हें सुनने और देखने के लिए भारी जनसमूह मौजूद रहा। इससे कांग्रेस भीतर उत्साह का संचार देखने को मिल रहा है। असम में प्रवेश करते ही राहुल के तेवर भाजपा के खिलाफ बेहद आक्रमक हो गए। 18 जनवरी को सिवालनगर जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं संग संवाद के दौरान राहुल ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए असम सरकार को देश की सबसे भ्रष्टतम सरकार का तमगा दे डाला। बकौल राहुल ‘असम सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है। हम यात्रा के दौरान इस सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम करेंगे।’ पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से तिलमिलाए हेमंत बिस्वा शर्मा ने गांधी परिवार पर व्यक्तिगत् हमला करते हुए उसे भ्रष्ट परिवार कह पुकारा। बिस्वा ने यात्रा को धार्मिक रंग देने का काम भी कर दिखाया। बकौल बिसवा यह यात्रा ‘न्याय यात्रा’ नहीं, बल्कि ‘मियां यात्रा’ है। असम में भी यात्रा को भारी जनसमर्थन मिलता नजर आ रहा है। इस बीच जोहर जिला पुलिस ने इस यात्रा पर तयशुदा मार्ग से अलग चलने और यातायात नियमों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए यात्रा के आयोजकों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस मुकदमें पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने कहा कि ‘असम के मुख्यमंत्री बौखला गए हैं। भारत जोड़ों न्याय यात्रा को कोई रोक नहीं सकता है। हिमंत बिस्वा सरमा पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लोग सड़क पर न आएं और राहुल गांधी को न देख पाएं। उन्हें जो कुछ करना है, करने दीजिए। हमें जो कुछ करना है, वो हम करेंगे।’

भाजपा समर्थकों का यात्रा पर हमला
‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के काफिले पर असम के सोनितपुर जिले में भाजपा समर्थकों के हमले का समाचार हालांकि राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां नहीं बना लेकिन कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाती नजर आ रही है। इस हमले के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चोटिल हो गए और पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा को इस हमले के लिए सीधे जिम्मेवार बताते हुए कहा है कि असम की सत्तारूढ़ भाजपा इस न्याय यात्रा से इतनी डरी हुई है कि उसने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा पर हमला तक कर दिया। खड़गे का कहना है कि गत् वर्ष ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कहीं भी इस प्रकार की घटना नहीं हुई थी लेकिन न्याय यात्रा से हेमंत बिस्वा सरकार डर गई है।

मंदिर प्रवेश पर रोक

22 जनवरी को असम पुलिस ने राहुल गांधी को छईबोरा गांव स्थित श्रीश्री शंकर देव मंदिर में प्रवेश करने से रोक एक नए विवाद को जन्म दे दिया। कांग्रेस का कहना है कि उन्हें मंदिर ट्रस्ट द्वारा आमंत्रण दिया गया था लेकिन हेमंत बिस्वा सरमा के आदेश पर राहुल गांधी को सुबह मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। राहुल गांधी इसके बाद काफी देर तक मंदिर के बाहर धरने पर बैठे रहे। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से यह कहकर खारिज कर दिया कि राहुल गांधी को पूर्व में ही सूचित कर दिया गया था कि वे 3 बजे के बाद दर्शन करने आएं।

उत्तर भारत पर फोकस
राहुल की यह यात्रा मध्य प्रदेश में सात दिनों के भीतर 698 किलोमीटर का सफर तय करेगी और सात जिलों से होकर गुजरेगी। मध्य प्रदेश में गत् विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद प्रदेश कांग्रेस का संगठन खासा हतोउत्साहित है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए राहुल पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा करने और पूरे दमखम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार करने का काम करेंगे। यह यात्रा सबसे अधिक 11 दिन उत्तर प्रदेश में रहने वाली है। इस दौरान प्रदेश के 20 जनपदों को 1074 किलोमीटर की दूरी तय कर कवर किया जाएगा। गौरतलब है कि लोकसभा में सबसे अधिक सांसद उत्तर प्रदेश ही भेजता है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहा उत्तर प्रदेश आज पूरी तरह से भगवामयी हो चुका है और कांग्रेस का जमीनी आधार पूरी तरह समाप्त हो चला है। 2019 के आम चुनाव में पार्टी मात्र एक सीट राय बरेली जीत पाने में सफल रही थी। स्वयं राहुल गांधी अपने गढ़ अमेठी से चुनाव हाए गए थे।

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