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फिर बनेगी मस्जिद- मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड

ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के इस इरादे और बोर्ड की ओर से हो रही बयानबाजी देखकर तो ऐसा लगता है कि वह राम मन्दिर मुद्दे को यूं ही हाथ से जाने नहीं देगा। ऐसा तब है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूमि पूजन कर राम मन्दिर निर्माण की शुरूआत कर दी हो। हालांकि ऑल  इण्डिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के फिर से मस्जिद बनने वाले बयान को सोशल साइट से लेकर भाजपाई खेमे तक में खीझ की संज्ञा दी जा रही है, लेकिन सच यह है कि मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव में मुसलमानों के बीच भुनाने की रणनीति बना चुका है। तर्क भी दिए जा रहे हैं और उदाहरण भी। हालांकि मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के चर्चित अधिवक्ता और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक रहे जफरयाब जिलानी ने इस मुद्दे पर अपनी जुबान बंद रखी है, लेकिन कहा यही जा रहा है कि बोर्ड की राजनीतिक रणनीति बनाने में इनकी मुख्य भूमिका है।

बताते चलें कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन से ठीक पहले ऑल  इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड ने एक विवादित ट्वीट किया है। इस ट्वीट में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद हमेशा थी और रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए बोर्ड ने यह भी कहा है कि अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टीकरण के आधार पर भूमि का पुनर्निर्धारण करने वाला फैसला सच को बदल नहीं सकता। मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड ने ट्वीट में तुर्की के हागिया सोफिया की चर्चा करते हुए कहा कि हमारे लिए यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि स्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।

ज्ञात हो हागिया सोफिया म्यूजियम यूनेस्को की वल्र्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल था, लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसे एक बार फिर से मस्जिद में तब्दील कर दिया है। बताते चलें कि छठी शताब्दी में रोमन कैथोलिक राजा ने हागिया सोफिया का निर्माण चर्च के रूप में किया था। 15वीं शताब्दी में ऑटोमेन साम्राज्य के मेहमत (द्वितीय) ने जब इस इलाके को जीता तो उन्होंने चर्च को मस्जिद में बदल दिया था। मुस्तफा कमाल पाशा ने जब 1923 में तुर्की की बागडोर संभाली तो उन्होंने रूढ़िवादिता पर प्रहार किया और वर्ष 1934 में हागिया सोफिया को म्यूजियम में तब्दील कर दिया था। अब एर्दोगान ने उस इतिहास को पलट दिया है।

हागिया सोफिया का उदाहरण देकर पर्सनल लाॅ बोर्ड ने यह मंशा जाहिर की है कि एक दिन फिर राम मंदिर को बाबरी मस्जिद में तब्दील किया जा सकता है। बोर्ड के मोहम्मद वली रहमानी ने कहा, ‘बाबरी मस्जिद को कभी भी किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाया गया था।’  ज्ञात हो तकरीबन 500 साल तक चले अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला को दी थी जबकि मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही अन्यत्र स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया था।

इस मामले में ऑल इंडिया मजलिस- ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी ट्वीट करके कहा है कि बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। फिलहाल तो ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड की इस विवादित टिप्पणी पर अभी तक किसी भाजपाई ने प्रति उत्तर नहीं दिया है, लेकिन जल्द ही भाजपा खेमे से कमेटी के लोगों को भरपूर जवाब दिए जाने की बात कही जा रही है। स्पष्ट है कि यूपी में एक बार फिर से यह मुद्दा गरमायेगा, लेकिन वर्ग विशेष समुदायों के बीच तक ही यह मुद्दा प्रभावी नजर आ रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे का क्या असर होगा? यह तो भविष्य के गर्त में है, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड इस मुद्दे के सहारे वर्ग विशेष को एकजुट करने में जरूर कामयाब होगा।

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