Uttarakhand

सड़क चौड़ीकरण और हल्द्वानी का अतिक्रमण

 

उत्तराखण्ड की आर्थिक राजधानी और कुमाऊं का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी की सूरत संवारने की कवायद ने शहर के उन व्यापारियों की नींद उड़ा दी है जिनकी दुकानें अतिक्रमण की जद में आ रही हैं जिन्हें तोड़कर ओके होटल चौराहे से लेकिर मंगल पड़ाव तक अब सड़क को चौड़ा किया जाना है। ऐसे में अतिक्रमण की जद में आ रही 20 दुकानों के मालिकों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है

अतिक्रमण का मुद्दा हल्द्वानी शहर के लिए नया नहीं है। इस शहर ने अतिक्रमण हटाने के अभियान को देखा है जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह के समय नैनीताल और कालाढूंगी रोड पर एक बड़े पैमाने में अतिक्रमणों को ढहाया गया था। आज नैनीताल और कालाढूंगी रोड जितनी चौड़ी नजर आती हैं ये जिलाधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह की सख्ती का ही परिणाम है। उस ‘अतिक्रमण हटाओ’ अभियान के चलते हल्द्वानी के राजनीतिक हल्कों में भी भूचाल आ गया था क्योंकि उस ‘अतिक्रमण हटाओ’ अभियान ने प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण तो ध्वस्त करने थे साथ ही उनके शक्तिशाली होने का गुमान भी ध्वस्त हो गया था।

उस वक्त डॉ. सूर्य प्रताप सिंह शायद राष्ट्रपति शासन के चलते अतिक्रमण के खिलाफ इतनी सख्ती कर पाए थे क्योंकि राजनीतिक दलों के शासन में अट्टिाकारियों पर भी काफी दबाव होता है। शायद इसी का परिणाम था कि उस समय के बाद हल्द्वानी में कोई बड़ा अतिक्रमण हटाने का अभियान नहीं चला। अगर छिटपुट अभियान चलाए भी गए तो वो राजनेताओं के दबाव की भेंट चढ़ गए। देखा जाए तो हल्द्वानी में अतिक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है। जैसे-जैसे शहर का विस्तार होता गया जनसंख्या बढ़ती गई तो अतिक्रमण का दायरा भी बढ़ता गया। नजूल भूमि पर बसे हल्द्वानी शहर में अतिक्रमण की सीमा तय कर पाना कठिन है क्योंकि पूर्व में नजूल भूमि पर ही नक्शे स्वीकृत हुए हैं और भवन निर्माण भी हुए हैं। हालांकि अब नए निर्माण के लिए जमीन का फ्री होल्ड होना जरूरी है।

नैनीताल रोड के चौड़ीकरण के साथ जिला प्रशासन ने कई अतिक्रमण चिन्ह्ति किए जो नैनीताल रोड के चौड़ीकरण में बाधा बने हैं। नैनीताल रोड के चौड़ीकरण के साथ उन मुख्य चौराहों और तिराहों को भी चौड़ा किया जा रहा है जहां पर जाम लगने के साथ निर्बाध यातायात प्रभावित रहता है। पीलीकोठी चौराहा, लालडॉट तिराहा, कुसुमखेड़ा तिराहा से अतिक्रमण हटाने के बाद चौराहा चौड़ा करने का असर लामाचौड़ चौराहे तक नजर आ रहा है। हल्द्वानी में वाहनों के दबाव के चलते सड़कों और चौराहों को चौड़ा करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी लेकिन पहल करने में प्रशासन हिचकता रहा। नैनीताल की वर्तमान जिलाधिकारी वंदना सिंह के आने के बाद इस काम में तेजी आई है।

काठगोदाम से लेकर मंगल पड़ाव चौराहे तक सड़क को चौड़ा करने में कई सरकारी सम्पत्तियां भी ‘अतिक्रमण हटाओ’ अभियान के जद में आई हैं। इन सरकारी संपत्तियों से अतिक्रमण हटाना जरूर आसान रहा। काठगोदाम में कुमाऊं मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह तो पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया साथ ही हल्द्वानी के मिनी स्टेडियम, राज्य सहकारी बैंक के मुख्यालय और सरस मार्केट की चाहरदीवारी के साथ ही बेस अस्पताल के एक हिस्से से अतिक्रमण हटा चाहरदीवारी को पीछे खिसका दिया गया। काठगोदाम से लेकर रोडवेज स्टेशन तक सड़क चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाने का काम संबंधित विभागों ने बिना प्रतिरोध के निपटा लिया लेकिन अब असली अड़चन बेस अस्पताल से लेकर मंगल पड़ाव तक की है जो हल्द्वानी का व्यस्तम इलाका है।

इस कार्ययोजना के अनुसार सड़क के मध्य से दोनों ओर 12 मीटर जगह चिन्हित की गई है जिसमें 10 मीटर में डामर की सड़क और 2 मीटर फुटपाथ व अन्य कार्यों जैसे बिजली के खम्बों लिए जगह की आवश्यकता बताई गई है। रोडवेज स्टेशन से मंगल पड़ाव तक के इलाके में प्रशासन को व्यापारियों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों के समूह ने हाईकोर्ट नैनीताल में जनहित याचिका के माध्यम से न्याय की अपील की है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को प्रभावितों का पक्ष सुनकर ही कार्रवाई करने के आदेश दिया है।

गौरतलब है कि प्रशासन ने इस संबंध में एक कमेटी का गठन भी किया है। जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, नगर आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के अट्टिाशासी अभियंता शामिल हैं। यह कमेटी ही अतिक्रमण का निर्धारण करेगी। बहरहाल, प्रशासन ने पहले दो दिन की मोहल्लत दे अतिक्रमण हटाने का फरमान जारी कर दिया लेकिन फिर वो अवधि बढ़ाकर 10 दिन कर दी। इस बीच फ्री होल्ड धारक एक पक्ष और कुछ अन्य प्रभावितों के फिर से हाईकोर्ट जाने के बाद फिलहाल हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए जाने का आदेश दिया है। प्रभावितों का कहना है कि कई मामलों में प्रशासन स्वयं ही दिगभ्रमित है। फ्री होल्ड और भूमिधरी अधिकार वाले मामलों को भी वो अतिक्रमण की श्रेणी में गिन रहा है जबकि इन मामलों में भूमिअधिग्रहण के नियम के तहत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। ये भूमि अधिग्रहण कानून के तहत स्पष्ट है कि एक नियमित जानी चाहिए थी। भूमि अधिग्रहण कानून के तहत स्पष्ट है कि एक नियमित प्रक्रिया अपनाए जाने के बाद मुआवजा देने के बाद ही जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है। प्रशासन खुद स्वीकार करता है कि 9 लोग ऐसे हैं जो फ्री होल्ड और भूमिधरी भूमि पर काबिज हैं तथा शेष सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर काबिज हैं।

खास बात ये है कि इनमें नगर निगम की वो दुकानंे भी शामिल हैं जिनको नगर निगम ने किराए पर दिया है। ऐसे में तो नगर निगम स्वयं अतिक्रमणकारी की श्रेणी में आ गया इसमें उसके किराएदारों का क्या दोष? प्रशासन स्वयं स्वीकार करता है कि अतिक्रमण की जद में नगर निगम की 12 दुकानें और 8 निजी दुकानें हैं जो 12 मीटर के दायरे में आ रही हैं। बाकी दुकाने आर्थिक रूप से प्रभावित होंगी। जो फ्री होल्ड और भूमिधरी अधिकार वाली जमीनें हैं उस पर प्रशासन मुआवजा देने की बात कह रहा है। प्रशासन मानता है कि इससे 20 के लगभग व्यापारी प्रभावित होंगे। लेकिन इन 20 प्रभावितों के लिए क्या प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक योजना है, खासकर उनके लिए जो नगर निगम की दुकानों में किराएदार हैं। प्रशासन के सड़क चौड़ीकरण के पक्ष में अपने कई तर्क हैं। उसका कहना है कि बेस और महिला अस्पताल जैसे मुख्य अस्पताल इस रोड में स्थित हैं। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि उसके सर्वे में इस मार्ग पर पैसेंजर कार यूनिट यानी पीसीयू लगभग 45 हजार पाए गए जो पर्यटन सीजन में लगभग 50 हजार हो जाते हैं। परिवहन मंत्रालय 15 हजार पीसीयू होने पर फोर लेन रोड का मानक मानता है।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि पहले तीन पानी से काठगोदाम की सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत आती थी इसकी देख-रेख राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग करता था लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों पर शराब की दुकानों और बार के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा तय मानकों से बचने के लिए इसे राष्ट्रीय राजमार्ग की श्रेणी से हटाकर उत्तराखण्ड लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया गया। फिलहाल अब अतिक्रमण हटाने और रोड चौड़ीकरण का मामला फिर हाईकोर्ट में है। इससे प्रभावितों को कितनी राहत मिल पाएगी ये उच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगा। सड़क चौड़ीकरण की इस प्रक्रिया में लेकिन हल्द्वानी की राजनीतिक आवाजें अपेक्षाकृत शांत हैं। हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश जरूर विधानसभा और स्थानीय स्तर पर इस मामले में मुखर रहे हैं। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा की इस मामले में मौन क्या किसी राजनीति का इशारा है? लेकिन जमीन के मामले में रेरा नियमों का मिलकर विरोट्टा करने वाले समाजसेवी, भाजपा और कांग्रेस के धुरंधर, व्यापारियों के इस मुद्दे पर चुप्पी साट्टो बैठे हैं।

बात अपनी-अपनी
कुछ लोग इस मामले में भ्रम फैला रहे हैं। जिन दुकानों ने अतिक्रमण किया है वह 101 नहीं है बल्कि सिर्फ 20 ही हैं। इनमें 12 दुकानें नगर निगम की हैं और 8 निजी लोगों की हैं। हमारी कमेटी ने अतिक्रमण के संबंध में पूरी जांच पड़ताल की है तब जाकर ये निर्णय हुआ है। शहर में नैनीताल रोड ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर चौराहों का चौड़ीकरण किया जाना है। िफलहाल ऐसे 14 चौराहे है। इस कार्य के लिए शासन द्वारा 16 करोड़ 89 लाख स्वीकृत किए गए हैं। कुछ चौराहों पर काम पूर्व में हो चुका है। अभी कई चौराहों का चौड़ीकरण किया जाना प्रस्तावित है।
एपी वाजपेई, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी

हम चाहते हैं कि शहर का सौंदर्यीकरण होना चाहिए, चाहे वह चौराहे हो या पार्क। फिलहाल मंगल पड़ाव से रोडवेज बस अड्डे तक सड़क चौड़ीकरण का मामला शहर में जोरों पर चल रहा है जिससे हमारे कुछ दुकानदार भाई परेशान हैं। परेशानी का कारण उनके संस्थान दुकान आदि अतिक्रमण प्रशासन द्वारा बता दिए गए हैं। हमने कुछ दिनों पहले ही जिलाधिकारी महोदया से इस बाबत समाधान निकालने की बात कही थी। तब हमने कहा था कि रोड के दोनों ओर जो आप 12-12 मीटर की दूरी तक सड़क बनाने के लिए अतिक्रमण हटा रहे हैं वह 10-10 मीटर होना चाहिए। हमने इस सम्बंध में कुछ समय प्रशासन से मांगा था लेकिन इस दौरान हमारे व्यापार मंडल के लोग कुछ निर्णय नहीं ले पाए। इसी दौरान प्रशासन ने हाईकोर्ट में एफिडेविट दे दिया कि अतिक्रमण 12-12 मीटर ही हटाया जाएगा। हमारी डीएम साहिबा से 10-10 मीटर दूरी की मांग अधूरी ही रह गई। हमें प्रशासन द्वारा मानकों की दूरी के मामले में आश्वासन भी मिला लेकिन वह पूरा नहीं हुआ।
विपिन गुप्ता, जिला अध्यक्ष, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल,नैनीताल

हमारी प्रशासन से एक ही मांग है कि वह दुकानदारों को हटाने से पहले उनके विस्थापन की व्यवस्था करे। जिन लोगों को प्रशासन अतिक्रमणकारी बता रहा है वह नगर निगम के किराएदार है। अगर अतिक्रमण किया है तो वह नगर निगम ने किया है। ऐसे में उनका क्या दोष है। इसके अलावा कई ऐसे लोग भी हैं जिनकी निजी दुकान है। उन सभी के सामने रोजी-रोटी का संकट होगा। प्रशासन से मेरी मांग है कि दुकानदारों के हित में जो भी हो सके वह किया जाए। जिससे उनकी रोजी-रोटी चलती रहे।
डिम्पल पाण्डे, महानगर अध्यक्ष, अखिल एकता उद्योग व्यापार मंडल, हल्द्वानी

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