उत्तराखण्ड में यूनिफार्म सिविल कोड लागू किए जाने के बाद से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देश के एक बड़े नेता के तौर पर उभर रहे हैं। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एसडीसी सूचकांक में उत्तराखण्ड को बड़ी सफलता मिली है। उत्तराखण्ड देश में अव्वल आ चुका है। रिपोर्ट बताती है कि उत्तराखण्ड तेजी से विकास की राह पर है। इस सबके बावजूद सीएम धामी अपने वजीरों के कारनामों पर अंकुश लगाने में नाकाम दिख रहे हैं। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के अधीन खाद्यान्न विभाग लूट का केंद्र बन गया है। जहां गरीबों के निवाले पर सरेआम डाका डालने का मामला सामने आया है। अकेले ऊधमसिंह नगर की किच्छा तहसील में ही करोड़ों रुपए के राशन की लूट हुई है। जिस अधिकारी पर फर्जी तरीके से सस्ते गल्ले की दुकान और राशन कार्ड बनाकर घोटाला किए जाने के आरोप हैं उसको मंत्री रेखा आर्या का वरदहस्त प्राप्त है। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर चुकी रेखा आर्या को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे को पुख्ता कर पाएंगे?
दिनांक 15 मार्च 2024
उत्तराखण्ड में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ‘लोकसभा चुनाव 2024 एवं जनहित’ के दृष्टिगत एक आदेश विभाग के प्रमुख सचिव एस. फैनई को देती हैं। कद्दावर मंत्री का ‘जनहित’ में दिया गया आदेश एक जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या को जनपद ऊधमसिंह नगर में तत्काल तैनात करने का था। मंत्री महोदया के लिखित आदेश पाते ही विभागीय अनुभाग अधिकारी उक्त जिला आपूर्ति अधिकारी की पोस्टिंग ऑर्डर 16 मार्च को ही तैयार कर देते हैं और 16 मार्च को ही सचिवालय में बैठे अधिकारीगण बिजली की गति से पोस्टिंग ऑर्डर पर हस्ताक्षर करते जाते हैं। 16 मार्च को ही प्रमुख सचिव इस आदेश को लागू कर उक्त जिला आपूर्ति अधिकारी की तैनाती जनपद ऊधमसिंह नगर में कर देते हैं।
दिनांक 03 जुलाई 2024
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दिनांक 26 जून 2024 को दायर की जाती है जिसमें राज्य की खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री द्वारा ‘जनहित’ में एक व्यक्ति विशेष को जनपद ऊधमसिंह नगर का जिला आपूर्ति अधिकारी बनाए जाने सम्बंधी आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित 03 जुलाई 2024 को सुनवाई के बाद इस ट्रांसफर ऑर्डर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा देते हैं।
पटकथा
उच्च न्यायालय द्वारा मंत्री रेखा आर्या के आदेश पर किए गए ट्रांसफर पर रोक लगाया जाना ‘दि संडे पोस्ट’ की पड़ताल का कारण बनता है। मंत्री रेखा आर्या द्वारा ‘जनहित’ में किए गए जिस ट्रांसफर पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाई गई है उसकी बुनियाद में एक बड़ा घोटाला छिपा हुआ है। यह घोटाला है गरीब जनता के लिए सस्ती दरों में दिए जाने वाले राशन की लूट का। इस लूट का सरगना वही व्यक्ति श्याम आर्या है जिसका ट्रांसफर मंत्री रेखा आर्या ने ‘जनहित’ का प्रकरण बताते हुए उसी जनपद में कर डाला जहां इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। इस व्यक्ति को वापस उसी जनपद का जिला आपूर्ति अधिकारी बनाना ‘हित विरोधिता’ ;ब्वदसिपबज व िप्दजमतमेजद्ध की श्रेणी में आता है क्योंकि अब दोषी अपराधी खुद की बाबत चल रही जांच टीम का हिस्सा बन जाता है।
कहानी गरीबों के राशन की लूट की
जनपद ऊधमसिंह नगर की किच्छा तहसील में गरीबों के हक में डाका डालने और करोड़ों रुपयों के राशन को लूटने का प्रकरण वर्ष 2020 में सामने आया था। इस लूट को वर्ष 2019 और 2020 में अंजाम दिया गया। गौरतलब है कि वर्ष 2007 में गरीबों को सस्ती दर में राशन उपलब्ध कराने के लिए तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने एक महत्वाकांक्षी ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन’ शुरू किया था। इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी 25 दिसम्बर 2000 में ‘अंत्योेदय अन्न योजना’ की नींव रखी थी जिसका लक्ष्य ‘सबसे गरीब वर्ग’ को चिन्हित कर उन्हें 3 रुपए प्रति किलो चावल और 2 रुपए प्रति किलो गेहूं की दर से राशन उपलब्ध कराया जाना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत गरीब वर्ग को मुफ्त राशन देने का फैसला 2019 में लिया गया था। उत्तराखण्ड में लगभग 60 लाख लोग इस योजना के अंतर्गत चिन्हित किए गए थे। यही से शुरू होती है घोटाले की महागाथा। 13 अक्टूबर 2020 को सितारगंज तहसील, ऊधमसिंह नगर के निवासी निखिलेश धरामी किच्छा में इन राष्ट्रीय खाद्य योजनाओं के अंतर्गत भारी पैमाने पर फर्जी राशन कार्ड बनाए जाने की शिकायत करते हैं। कुमाऊं मंडल के तत्कालीन उप आयुक्त (खाद्य) राहुल शर्मा ने इस शिकायती पत्र को आधार बना जब जांच शुरू की तो चौंकाने वाले राज उजागर होते चले गए और करोड़ों रुपयों के राशन घोटाले की पुष्टि हो गई।
उप आयुक्त की जांच ने पकड़ा करोड़ों का राशन घोटाला
कुमाऊं मंडल के तत्कालीन उप आयुक्त खाद्य राहुल शर्मा की जांच रिपोर्ट में मुख्यतः इस प्रकार घोटाले की पुष्टि की गई है:
‘तहसील किच्छा में ‘डीटीएम’ नामक फर्जी राशन की दुकान का संचालित होना। उप आयुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस फर्जी दुकान की बाबत लिखा है- ‘जिला आपूर्ति अधिकारी, ऊधमसिंह नगर द्वारा अपने पत्र संख्या 3006 दिनांक 29 जनवरी 2021 से अवगत कराया गया है कि ‘डीटीएम किच्छा’ नाम से किसी भी दुकान की कोई पत्रावली कार्यालय अभिलेखों में धारित नहीं है, इस नाम से कोई सस्ता गल्ला दुकान संचालित नहीं है… जिला आपूर्ति अधिकारी, ऊधमसिंह नगर की उक्त आख्यानुसार प्रश्नगत् दुकान फर्जी रूप से क्रिएट किए जाने की स्पष्ट पुष्टि होती है। इस दुकान पर सम्बद्ध राशन कार्डों/यूनिटों के मालिक आवंटित खाद्यान्न का दुर्विनियोग किया जाना भी स्वतः प्रमाणित होता है। चूंकि राशन की दुकान नियमानुसार जिला आपूर्ति अधिकारी की आईडी से अप्रूव होने के उपरांत ऑनलाइन प्रदर्शित होती है तथा जिला आपूर्ति अधिकारी की आईडी से ही अप्रूव होने के उपरांत डिलीट होती है। यह उल्लेखनीय है कि ‘डीटीएम किच्छा’ के नाम से संचालित दुकान श्री श्याम आर्या, जिला आपूर्ति अधिकारी के कार्यकाल की अवधि के दौरान ऑनलाइन प्रदर्शित एवं डिलीट हुई है, फलस्वरूप इस दुकान के सम्बंध में श्री श्याम आर्या, जिला आपूर्ति अधिकारी को अवश्य जानकारी रही होगी।’
फर्जी दुकान से हुई राशन की लूट
‘डीटीएम किच्छा’ नामक फर्जी दुकान का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ऊधमसिंह नगर के जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या की आईडी से कर बड़े पैमाने पर सरकारी राशन की बंदरबांट का सच उपआयुक्त (खाद्य) की जांच में सामने आया। जनवरी 2018 से जून 2020 तक इस फर्जी दुकान को 176 कुंतल गेहूं, 288 कुंतल चावल, 12 कुंतल चीनी अंत्योदय योजना के अंतर्गत, 189 कुंतल गेहूं, 580 कुंतल चावल, 340 कंुतल चीनी बीपीएल योजना के अंतर्गत तथा प्राथमिक परिवार योजना के अंतर्गत 5705 कुंतल गेहूं तथा 722 कंुतल चावल आवंटित कर गरीबों के राशन की बंदरबांट की गई।
फर्जी राशन कार्ड भी बनाए गए
सस्ती दर के राशन की लूट केवल फर्जी सस्ते गल्ले की दुकान बनाकर ही नहीं की गई, बल्कि बड़े पैमाने पर फर्जी राशन कार्ड भी तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी ऊधमसिंह नगर श्याम आर्या ने बना डाले।
उपआयुक्त (खाद्य) ने अपनी जांच में जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा हजारों की संख्या में फर्जी राशन कार्ड बनाए जाने की पुष्टि करते हुए इस घोटाले की जांच एसआईटी से कराए जाने का प्रस्ताव शासन को दिया जिससे साफ होता है कि यदि शासन उपआयुक्त की सलाह मान इस मुद्दे पर एसआईटी गठित करता तो सम्भवतः बहुत बड़ा घोटाला सामने आ जाता। यहां यह गौरतलब है कि ऊधमसिंह नगर जनपद के तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या ने अपने मातहत अधिकारियों के साथ मिलकर न केवल बड़ा घोटाला किया, बल्कि उपआयुक्त (खाद्य) को जांच में सहयोग भी नहीं किया और घोटाले से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करने तक का प्रयास किया। उपआयुक्त (खाद्य) राहुल शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा- ‘…उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि जिला आपूर्ति अधिकारी श्री श्याम आर्या द्वारा तहसील किच्छा क्षेत्र के आपूर्ति निरीक्षक एवं राशन के दुकानदारों के साथ मिलीभगत कर राशन कार्डों/यूनिटों में मनमाने ढंग से अवैधानिक वृद्धि कर योजनावार खाद्यान्न का दुर्विनियोग किए जाने के तथ्य प्रकाश में आए हैं… जिसके लिए जिला आपूर्ति अधिकारी के साथ सम्बंधित क्षेत्र के आपूर्ति निरीक्षक भी दोषी हैं, फलस्वरूप इनके विरुद्ध कठोरतम विभागीय कार्यवाही करने की संस्तुति की जाती है तथा श्री श्याम आर्या जिला आपूर्ति अधिकारी के जनपद ऊधमसिंह नगर के पूर्ण कार्यकाल (वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सहित) सभी योजनाओं के खाद्यान्न के दुर्विनियोग किए जाने के सम्बंध में किच्छा क्षेत्र के सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं एवं उनकी दुकान से सम्बद्ध राशन कार्ड यूनिटों और इनके द्वारा उठान/वितरण खाद्यान्न का तथा डिलीट किए गए राशन कार्डों/यूनिटों की विस्तृत रूप से जांच किसी दक्ष एजेंसी से करवाई जानी उचित प्रतीत होती है, ताकि सम्पूर्ण खाद्यान्न के दुर्विनियोग किए जाने की बाजार भाव से धनराशि आंकलित कर तद्नुसार सम्बंधित दोषियों को चिन्हित कर उनसे इसकी शत-प्रतिशत वसूली की कार्यवाही की जा सके।’
शुरू हुआ जिला आपूर्ति अधिकारी को बचाने का खेला
कुमाऊं मंडल के खाद्य उपायुक्त ने इस घोटाले पर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट 30 मार्च, 2021 को शासन में भेजी थी। इस जांच रिपोर्ट में मुख्य आरोपी तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या को स्पष्ट तौर पर बताया गया था और दो आपूर्ति निरीक्षकों हीरा बल्लभ जोशी और चंद्रशेखर कांडपाल को भी इस घोटाले में संलिप्त पाया था। इस रिपोर्ट के बाद ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने एसडीएम किच्छा को विभागीय जांच के आदेश दिए। एसडीएम ने 10 जुलाई 2022 को अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी। इससे पूर्व उप आयुक्त खाद्य की जांच रिपोर्ट बाद दो आपूर्ति निरीक्षकों हीरा बल्लभ जोशी और चंद्रशेखर कांडपाल को निलंबित कर दिया गया था। 23 दिसंबर 2022 को ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन डीएम युगल चंद्र पंत ने एसडीएम किच्छा की विभागीय रिपोर्ट के आधार पर 11 राशन विक्रेताओं, तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या और तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक (किच्छा) हीरा बल्लभ जोशी को 10,948,468.81 रुपए राजकीय धनराशि के गबन का दोषी पाया और इन सभी से बराबर की धनराशि रुपया 8,421,89.90 वसूले जाने के निर्देश दिए। हैरानी की बात यह कि इस पूरे घोटाले के सरगना रहे तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या से भी 8,421,89.90 रुपए वसूलने के आदेश तो तत्कालीन डीएम ने दिए लेकिन गरीबों के राशन के लूटेरे पर अन्य कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस दौरान इस महाभ्रष्ट अधिकारी श्याम आर्या को किसी अन्य शिकायत चलते वर्ष 2020 में खाद्य निदेशालय, देहरादून में स्थानांतरित जरूर कर दिया गया था।
दोबारा जांच के हुए आदेश
गरीबों के राशन की लूट का पर्दाफाश होने के ढ़ाई बरस बाद और भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों तथा 11 भ्रष्ट राशन डीलरों से राजकीय धन की वसूली के आदेश होने के लगभग एक बरस बाद 18 सितम्बर 2023 को यकायक ही इस विषय पर दोबारा जांच कराए जाने के आदेश खाद्य सचिव उत्तराखण्ड द्वारा डीएम ऊधमसिंह नगर को दिए गए। इस दौरान केवल एक भ्रष्ट अधिकारी हीरा बल्लभ जोशी से ही रुपया 8,421,89.90 वसूला गया। इस घोटाले के सरगना रहे श्याम आर्या और 11 राशन विक्रेताओं से धनराशि वसूलने का कोई प्रयास नहीं हुआ। 18 सितम्बर 2023 को ऊधमसिंह नगर के वर्तमान जिलाधिकारी उदयराज सिंह ने शासन के आदेश का हवाला देते हुए घोटाले की पुनः जांच करने के लिए अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करते हुए जिले के मुख्य कोषाधिकारी और जिला आपूर्ति अधिकारी की एक समिति बनाई।
शुरू हुआ लीपापोती का हैरतनाक खेला
ऊधमसिंह नगर के वर्तमान जिलाधिकारी ने इस ‘लूट’ की पुनः जांच के लिए जो कमेटी गठित की उसकी एक भी बैठक सम्भवतः आयोजित नहीं हुई और मामले को पूरी तरह से ‘निपटाने’ के लिए एक बड़ा षड्यंत्र उच्च स्तर से रचा गया। 16 मार्च 2024 को ‘जनहित’ में मंत्री रेखा आर्या ने इस लूट के सरगना रहे पूर्व जिला आपूर्ति अधिकारी की तत्काल उसी जिले में तैनाती का आदेश दे डाला जहां रहते इस अधिकारी ने गरीबों के राशन की लूट की थी। मंत्री महोदया ने उक्त भ्रष्ट अधिकारी के ट्रांसफर सम्बंधी निर्देश 16 मार्च 2024 को विभागीय प्रमुख सचिव को दिए जिन्होंने मंत्री के आदेश पर तत्काल कार्यवाही करने का रिकॉर्ड स्थापित करते हुए 16 मार्च को ही ट्रांसफर ऑर्डर जारी भी कर दिए और इस प्रकार श्याम आर्या एक बार फिर ऊधमसिंह नगर के जिला आपूर्ति अधिकारी बन गया।
आरोपी ही बन बैठा न्यायाधीश
श्याम आर्या ने पद सम्भालने के साथ ही बड़ा खेला कर डाला। स्वयं आरोपित होने के बावजूद श्याम आर्या ने 25 अप्रैल 2024 को डीएम ऊधमसिंह नगर के निर्देशों का हवाला देते हुए एक नई कमेटी का गठन कर दिया। उन्होंने इस कमेटी में तीन नए अधिकारियों को नामित किया। यह अधिकारी थे किच्छा के क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी, काशीपुर के क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी और रुद्रपुर के आपूर्ति निरीक्षक। हैरानी की बात है कि पहले से ही दोबारा जांच के लिए डीएम ऊधमसिंह नगर एक कमेटी बना चुके थे। सम्भवतः पूर्व में बनी कमेटी से मनमाफिक रिपोर्ट न मिल पाने चलते नई कमेटी का गठन किया गया। ‘दि संडे पोस्ट’ के पास वह कार्यालय आदेश पत्र उपलब्ध है जिसमें नई कमेटी बनाई जाने का आदेश स्वयं आरोपित श्याम आर्या ने जारी किया है। इससे आशंका गहराती है कि इस पूरे मामले को रफा-दफा करने में ऊधमसिंह नगर के वर्तमाान डीएम उदयराज सिंह की भूमिका भी पूरी तरह संदिग्ध है।
मामला पहुंचा हाईकोर्ट
श्याम आर्या के दोबारा जिला आपूर्ति अधिकारी, रुद्रपुर बनने और उनसे तथा आरोपित राशन विक्रेताओं से धनराशि न वसूले जाने के खिलाफ इस मामले में ही आरोपित हीरा बल्लभ जोशी ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर 26 जून 2024 को कर दी। 3 जुलाई 2024 को न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए श्याम आर्या को पुनः जनपद ऊधमसिंह नगर का जिला आपूर्ति अधिकारी बनाए जाने के आदेश पर रोक लगा दी। इस आदेश के बाद शुरू हुआ हैरतनाक और चौंकाने वाला खेला जिसमें पूरी तरह से आरोपित अधिकारी श्याम आर्या, डीएम उदयराज सिंह की मिलीभगत स्पष्ट नजर आती है और इस घोटाले को रफा-दफा करने के पीछे प्रदेश की मंत्री रेखा आर्या का प्रभाव भी स्पष्ट सामने आ जाता है।
बनाई गई फर्जी कमेटी और फर्जी रिपोर्ट
26 जून 2024 को आरोपित हीराबल्लभ जोशी ने हाईकोर्ट में रिट् याचिका दायर की थी। इस याचिका के दायर होते ही खाद्य विभाग में हड़कम्प मच गया। डीएम ऊधमसिंह नगर ने 29 जून 2024 को एक पत्र प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों को लिखा जिसमें उन्होंने प्रशासनिक फर्जीवाड़ा करते हुए 23 जुलाई 2023 की उसी रिपोर्ट के आधार पर सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर डाला जिस रिपोर्ट को एक तरह से खारिज करते हुए प्रमुख सचिव खाद्य ने दोबारा से जांच कराए जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद ही पहले तो वर्तमान डीएम उदयराज सिंह ने 18 सितम्बर 2023 को एडीएम रुद्रपुर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया और फिर मार्च 2024 में आरोपित श्याम आर्या की जनपद में दोबारा नियुक्ति पश्चात एक और नई कमेटी बना डाली। हाईकोर्ट में दायर याचिका बाद डीएम ने यकायक ही 25 जुलाई 2023 की रिपोर्ट को आधार बना सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर स्पष्ट कर दिया कि इस घोटाले में अपराधियों को बचाने वालों में वह खुद भी शामिल हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट निकली फर्जी
‘दि संडे पोस्ट’ के पास मौजूद एक्सक्लूसिव दस्तावेज हैं जिनसे साफ हो जाता है कि आरोपित पूर्व जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या ने जिस जांच कमेटी का गठन किया था उसने कोई जांच की ही नहीं, बल्कि श्याम आर्या ने अपने ऑफिस में कमेटी के सदस्यों को बुलाकर धोखे से कुछ कागजात में हस्ताक्षर करा लिए। इस कमेटी के सदस्य आशुतोष भट्ट, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी काशीपुर ने 11 जुलाई 2024 को वर्तमान जिला आपूर्ति अधिकारी, ऊधमसिंह नगर को लिखे अपने पत्र में कहा है-
‘दिनांक 26 जून 2024 को तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा मुझे रुद्रपुर बुलाया गया। मैं लगभग 4ः30 बजे सायं को रुद्रपुर कार्यालय पहुंचा। वहां पर तत्कालीन जिला आपूर्ति अधिकारी महोदय द्वारा मुझे एक फाइल दिखाकर कहा कि उक्त फाइल किच्छा प्रकरण से सम्बंधित है जिसे अभी जिलाधिकारी महोदय के सम्मुख प्रस्तुत करना है। मुझे जिला आपूर्ति अधिकारी श्री श्याम आर्या द्वारा बताया गयाा कि उक्त फाइल को मैं स्वयं जिलाधिकारी महोदय को अपने हस्ताक्षर से प्रस्तुत नहीं कर सकता हूं। मैंने जब फाइल देखी तो उसमें पहले से ही भरत राणा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी किच्छा, श्रीमती लता सती निरीक्षक एवं श्री मुन्ना लाल के हस्ताक्षर थे। जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा कहा गया कि फाइल अभी जिलाधिकारी महोदय के पास जानी है अतः हस्ताक्षर कर दो। प्रकरण की आकस्मिकता को देखते हुए मेरे द्वारा बिना पढ़े हस्ताक्षर कर दिए गए। महोदय किच्छा प्रकरण में मेरे द्वारा किसी समिति के सदस्य के रूप में या अन्य किसी भी प्रकार से कोई जांच नहीं की गई है।’ ठीक इसी प्रकार ‘दि संडे पोस्ट’ के पास इस समिति की एक अन्य सदस्य लता सती, आपूर्ति निरीक्षक मुख्यालय का पत्र मौजूद है जिसमें उन्होंने लिखा है-
‘अवगत कराना है कि पूर्व जिला आपूर्ति अधिकारी श्री श्याम आर्या द्वारा मुझसे किच्छा प्रकरण में अपने कक्ष में बुलाकर हस्ताक्षर कराए गए थे। परंतु मुझे जिन कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे वह मुझे पढ़ने का समय नहीं दिया गया था…. मेरे द्वारा उपरोक्त हस्ताक्षर जिला आपूर्ति अधिकारी के दबाव में किए गए थे। अब मुझे जानकारी मिली है कि वह फाइल किच्छा के दुकानदारों की जांच से सम्बंधित थी। महोदय मेरे द्वारा किच्छा के किसी भी प्रकरण में कभी भी कोई जांच में प्रतिभाग नहीं किया गया है। मेरे हस्ताक्षर दबाव में कराए गए हैं तथा मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है।’
उपसंहार
‘दि संडे पोस्ट’ की इस खोजी रिपोर्ट से यह साबित हो जाता है कि उत्तराखण्ड सरकार में शामिल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने करोड़ों के राशन घोटाले को दबाने की नीयत से महाभ्रष्ट जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या को वापस जनपद ऊधमसिंह नगर में तैनात किया। यह भी स्पष्ट हो गया है कि ऊधमसिंह नगर के वर्तमान जिलाधिकारी उदयराज सिंह ने भी इस घोटाले को रफा-दफा करने की नीयत से 29 जून 2024 को पूरी तरह गलत तथ्यों के आधार पर आरोपित अधिकारियों और राशन विक्रेताओं को दोषमुक्त करने सम्बंधी पत्र प्रमुख सचिव खाद्य को भेजा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या धाकड़ धामी मंत्री रेखा आर्या को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का साहस दिखा पाएंगे? क्या धाकड़ धामी ऊधमसिंह नगर के डीएम पर कड़ी कार्यवाही करेंगे? और इस खाद्यान्न घोटाले की जांच को सीबीआई अथवा एसआईटी से कराने का फैसला लेंगे? मुख्यमंत्री धामी हर मंच से प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का संकल्प दोहराते रहते हैं। अब धाकड़ धामी की परीक्षा का समय है। यदि वह सही में एक दमदार मुख्यमंत्री के रूप में अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें एक्शन लेना ही होगा।
नोट: खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या से दूरभाष पर बार-बार सम्पर्क किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
बात अपनी-अपनी
पूर्व में हमें गुमराह करके एक कमेटी बना दी गई थी जिसके आधार पर गत् जून माह में निर्णय लिया गया था। उक्त निर्णय के विपरीत अब हमने श्याम आर्या के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या खुद आरोपी हैं। ऐसे में उनके द्वारा जांच कराया जाना उचित नहीं है।
उदयराज सिंह, जिला अधिकारी ऊधमसिंह नगर
जब मैं कुमाऊं में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले में उपायुक्त था तब 50 से 60 दुकानें ऐसी चिन्हित की थी जहां अनियमितताएं होने की शंका थी। जिसमें से जांच कराने पर 12 सस्ते गल्ले की दुकानों में घोटाला निकला था। मुझे लगता है कि यह घोटाला बड़े स्तर पर किया गया है। इसलिए मैंने अपनी जांच में इसकी जांच विशेषज्ञ संस्थाओं से कराने की अपील की थी। यह तो नहीं हुआ लेकिन फर्जी जांच कमेटी अवश्य बना दी गई। मुझे यकीन है कि इस मामले में न्याय जरूर होगा।
राहुल शर्मा, तत्कालीन खाद्य उपायुक्त, कुमाऊं मंडल
जिला आपूर्ति अधिकारी श्याम आर्या द्वारा ही दर्जनों फर्जी दुकानों का एलॉटमेंट किया गया और फर्जी राशन कार्ड बनाए गए। न तो राशन डीलरों और न ही श्याम आर्या के खिलाफ कार्रवाई की गई सिर्फ मुझे ही निलम्बित किया गया। किच्छा के तत्कालीन एसडीएम ने अपनी जांच में मुझे दोषी नहीं माना है। उन्होंने केवल आंशिक रूप से माना। हाईकोर्ट से भी मुझे बहाल किया गया। लेकिन श्याम आर्या को बचाने के लिए डीएसओ
ऊधमसिंह नगर तेज्वल सिंह ने झूठ बोला। सवाल यह है कि जब एक बार जांच हो गई थी तो दोबारा क्यों और अगर दोबारा जांच होती है उसमें उसी अधिकारी से जांच क्यों कराई गई? सवाल यह भी है कि जो खुद ही दोषी हो वह जज कैसे बन जाएंगे?
हीरा बल्लभ जोशी, पूर्व आपूर्ति निरीक्षक, ऊधमसिंह नगर
मुझे फाइल पर हस्ताक्षर कराने से पहले श्याम आर्या ने स्पष्ट नहीं बताया, बल्कि भ्रमित कर मुझसे दबाव में हस्ताक्षर करा लिए। मुझे जानकारी नहीं थी कि वह फाइल किससे सम्बंधित है। मैंने किच्छा प्रकरण की कोई जांच नहीं की। मैंने झूठ की बजाय सिर्फ सच का साथ दिया।
आशुतोष भट्ट, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी, काशीपुर एवं जांच कमेटी सदस्य
एक देवेंद्र कुमार नाम का फर्जी ऑपरेटर विभाग में रखा गया था। जिसके द्वारा बाहर से ही राशन कार्ड के एलाटमेंट बनाकर भेजे जाते थे। मैंने इस बाबत डीएसओ को कई बार पत्र भी लिखे थे। बाद में मुझे तत्कालीन उपायुक्त राहुल शर्मा द्वारा नोटिस भी आया था। जिसमें मैंने अपना स्पष्टीकरण देते हुए वह पत्र भी संलग्न किए थे जिनमें मैंने लिखा था कि बाहर के लोगों से एलाटमेंट बनाए गए।
चंद्रशेखर कांडपाल, आपूर्ति निरीक्षक, ऊधमसिंह नगर
ये जो फर्जी दुकानें बनाई गईं वे सभी विपिन कुमार के कार्यकाल में बनाई गई थी। विपिन कुमार का कार्यकाल 2015 से 2017 तक रहा। इसी दौरान डीटीएम खटीमा भी बनाई गई थी। मुझ पर गलत आरोप लगाए गए हैं। यह मेरे खिलाफ सब दुष्प्रचार है।
श्याम आर्या, पूर्व जिला आपूर्ति अधिकारी, ऊधमसिंह नगर