•      के.एस. असवाल

डेंगू जैसी महामारी में वरदान बनने वाला कीवी फल उत्तराखण्ड के मुख्य फलों में शुमार हो चुका है। इसके उत्पादन के लिए आज हजारों किसान पसीना बहा रहे हैं। ऐसा ही एक किसान परिवार चमोली जिले के लीला देवी का है जिन्होंने कीवी उत्पादन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर एक मिसाल कायम की है

कीवी उत्पादन से अपने परिवार के लिए स्वरोजगार कर रही लीला देवी क्षेत्र के लिए एक मिसाल बनी हुई है। पति के असमय मृत्यु के बाद लीला देवी के सामने अपने तीन बच्चों का भरण पोषण के साथ ही उन्हें अच्छी शिक्षा देने की चिंता बनी हुई थी। लेकिन हिम्मत न हार कर मजबूती से लीला देवी अपने पति द्वारा लगाए गए कीवी बागवानी से अपना स्वरोजगार शुरू कर क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार के लिए प्रेरणा बन रही है।
चमोली जिले के तहसील कर्णप्रयाग रानीगढ़ क्षेत्र सिदोली मुल्यागांव ग्वाड़ की रहने वाली लीला देवी ने कीवी उत्पादन कर स्वरोजगार करके क्षेत्र के लिए एक नई मिसाल पैदा की है। अपने पति विक्रम सिंह बिष्ट के असमय देहान्त होने के बाद लीला ने अपने पति की जमी जमाई विरासत को संभालना किया। विक्रम सिंह बिष्ट सिदोली क्षेत्र के विकास पुरुष माने जाते थे, उन्होंने अपने संघर्षमय जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे थे लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने जीवन में कला को अपनाया तथा एक कलाकार के रूप में उन्होंने पत्थरों व लकड़ियों की नक्कासी कर पहाड़ी और मैदानी भागों के कलाकारों को भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने वर्ष 2011 में पर्यावरण के क्षेत्र में पहली बार कीवी फल का उत्पादन करने की शुरुआत की थी और उनको इसमें सफलता भी मिली अचानक 2023 में उनका देहान्त हो गया। उनके द्वारा शुरू किए हुए नए-नए तकनीकियों के कार्य अधूरे रह गए थे।

उन्होंने 3 नाली भूमि पर 8 मादा पौधे एवं 2 नर पौधे लगाकर कीवी की एक नई नस्ल पैदा करने में कामयाबी भी हासिल की। अपने पीछे वह अपनी दो लड़कियां एवं एक लड़का बेसहारा छोड़ गए। हालांकि परिवार में उनके भाई दान सिंह, प्रेम सिंह, बलवीर सिंह एवं सागर सिंह उनकी विरासत को आगे तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। सागर सिंह शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और सुबह शाम अपने परिवार के साथ कीवी फल निकाल कर पैकिंग करके बाजार में बेचने के लिए पहुंच जाते हैं।

लीला देवी का कहना है कि अब तक वह 3 कुंतल से भी अधिक कीवी फल बेच चुकी हैं जिससे वे अपना घर का खर्चा चलाती हैं। उनके इस कार्य में उनके पति के भाई लोग भी मदद कर रहे हैं और बाजार बेचने में सहयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पति ने 2011 में कीवी के पौधे लगाए थे और 2013 में वे फल देने लगे थे। फरवरी 2023 में पति के असमय मृत्यु के बाद उन्होंने कीवी उत्पादन से स्वरोजगार अपनाकर अपने तीन बच्चों का भ्ररण पोषण किया साथ ही उनकी शिक्षा आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कीवी उत्पादन से मिल रहे लाभ से अब गांव के अन्य लोग भी इसकी ओर प्रेरित हो रहे हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD