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मां के गहने गिरवी रख वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलने पहुंचे संजीव

कुछ करने का जनुन हो तो उम्र और कोई भी खेल मायने नहीं रखता। आदमी चाहे तो हर मुकाम को हासिल कर सकता है। ऐसा ही कुछ करके दिखा रहा है वर्ल्ड पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी संजीव कुमार।

जहां एक ओर हमारे देश में खेल को एक धर्म की तरह पूजा जाता है और खिलाडियों को तमाम पुरस्कार और सरकारी नौकरी तक दी जाती रही है ,वहीं कुछ खेलों में खिलाडियों को नजरअंदाज किया जाता रहा है।

अपने खर्च पर जाकर वर्ल्ड पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में तीन बार गाेल्ड मेडल जीत चुके संजीव कुमार को सीएम कैप्टन अमरिंदर आज  महाराजा रणजीत सिंह अवाॅर्ड से सम्मानित करेंगे। 2017, 18 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीत चुके संजीव ने कहा कि उन्हें मेडल मिलने की खुशी है, पर सरकार से नाैकरी की भी दरकार है। अवाॅर्ड में जितने पैसे मिलते हैं, उससे ज्यादा विदेश में एक मैच खेलने में खर्च हो जाते हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने संजीव कुमार काे जनवरी में एक लाख रुपए की राशि देकर सरकारी नौकरी का वादा किया था पर छह महीने बाद भी नाैकरी नहीं मिल पाई। जनवरी 2019 में पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ ने संजीव की सीएम से मुलाकात करवाई थी।
संजीव  ने ओलिंपिक क्वालीफायर टूर्नांमेंट खेलने से पहले 12 मार्च को खेल विभाग को एक पत्र लिखकर उसे सहयोग करने की अपील की थी। इस पर खेल विभाग और पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा 29 मार्च को उन्हें एक लेटर भेजा गया जिसमें लिखा था कि आपको साल 2015-16 और 2016-17 सेशन के दौरान जीते गए मेडल का 3 लाख 50 हजार रुपए कैश अवाॅर्ड और वित्तीय सहायता पहले ही भेज दी गई है। इसलिए पंजाब स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल अाैर ज्यादा वित्तीय सहायता देने में असमर्थ है। संजीव ने रोष जताते हुए कहा कि अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को विभाग से सहयोग नहीं मिलता।

संजीव कुमार ने खेल मंत्री गुरमीत सिंह राणा सोढी के साथ मुलाकात कर आर्थिक सहयोग की मांग की थी। सोढी ने आश्वासन दिया था पर असल में कुछ नहीं हुअा। वह लाेगाें से उधार लेकर अाैर घर का साेना गिरवी रखकर क्वालीफायर मैच खेल रहे हैं। संजीव काे मलाल है कि जहां क्रिकेट में फर्जी डिग्री वाली प्लेयर काे शतक बनाने पर पंजाब सरकार ने डीएसपी की नौकरी दे दी वहीं देश के लिए कई गाेल्ड अाैर अन्य मेडल जीत चुके प्लेयर की अनदेखी की जा रही है। इस कारण पंजाब के खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ रहे हैं ।

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