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पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाता सऊदी अरब

सऊदी अरब पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाता हुआ नजर आ रहा है। इस मुल्क ने भारत को लेकर एक विवादित बयान दिया है । सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि जम्मू कश्मीर का मुद्दा पूरे इलाके की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौतियों में से एक है।

 

उनका कहना है कि यदि जम्मू कश्मीर का मुद्दा नहीं सुलझता तो इससे पूरे इलाके अस्थिरता फैलेगी। विदेश मंत्री के अनुसार सऊदी अरब जम्मू कश्मीर के मुस्लिमों को अपना पूरा समर्थन देता है। ताकि वे अपनी इस्लामिक पहचान को बचा सकें और गरिमा को सुरक्षित रख सकें।

अल अरबिया की एक रिपोर्ट अनुसार प्रिंस फैसल का कहना है कि सऊदी अरब कश्‍मीर समेत हिंसाग्रस्‍त इलाकों में रह रहे लोगों को अपना समर्थन देता रहेगा। यह बयान संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा की बैठक के दौरान इस्‍लामिक देशों के संगठन ओआईसी की जम्‍मू कश्‍मीर पर एक बैठक के दौरान दिया गया। जहाँ उन्‍होंने कहा कि सऊदी अरब इस इलाके के सभी देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि संघर्ष को टाला जा सके और अंतरराष्‍ट्रीय प्रस्‍तावों के मुताबिक शांतिपूर्ण हल हासिल किया जा सके।

जम्‍मू-कश्‍मीर के घटनाक्रम पर नजर रखने वाले ओआईसी के महासचिव हुसैन इब्राहिम के मुताबिक यह बैठक भारत के अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म करने के 4 साल पूरे होने पर आयोजित की गई थी। ताहा ने दुनिया से गुहार लगाई कि वे जम्‍मू-कश्‍मीर विवाद को संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रस्‍तावों के मुताबिक सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाए।

सऊदी अरब ओआईसी का संस्‍थापक है और पूरे संगठन में उसका प्रभाव सबसे ज्‍यादा है। वहीं पर्दे के पीछे से पाकिस्‍तान ओआईसी को चलाता है और अक्‍सर भारत के खिलाफ साजिशें रचता रहता है। सऊदी विदेश मंत्री और ओआईसी के महासचिव ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान अभी हाल ही में भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। उन्‍होंने भारत के साथ दोस्‍ती को और मजबूत करने का वादा किया है। भारत सऊदी अरब और यूएई के जरिए मिडिल ईस्‍ट कॉरिडोर बनाना चाहता है।

क्या है भारत पाकिस्तान का विवाद

 

गौरतलब है कि अक्टूबर 1947 में कबालियों के जम्मू कश्मीर पर आक्रमण के बाद से ही कश्मीर मुद्दा भारत पाकिस्तान के बीच विवाद बना हुआ है। इस हमले के बाद जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने जम्मू कश्मीर को भारत में विलय कराने का फैसला किया जिसके बाद भारत और पकिस्तान के बीच आमने – सामने से युद्ध शुरू हो गया।

यह मुद्दा बाद में संयुक्त राष्ट्र गया जहां संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करते हुए युद्ध विराम का ऐलान किया लेकिन पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू कश्मीर भूभाग पर भारत को नियंत्रण नहीं मिल सका। इस युद्ध के बाद से ही एक ओर जहां भारत पाकिस्तान अधिकृत को अपना अभिन्न अंग बताते हुए वापस लौटाने की बात कहता है ,वहीं पाकिस्तान की मंशा ये है कि वो बाकी के कश्मीर पर भी अपना कब्ज़ा कर ले ।

 

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