पिछले कुछ दिनों से कनाडा और भारत के बीच तनाव बढ़ते जा रहे हैं। जो उद्योगों के साथ – साथ अब छात्रों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह विवाद कनाडा में पढाई कर रहे छात्रों के लिए तो चिंता का विषय है ही साथ ही वे बच्चे जो सितम्बर और दिसम्बर-जनवरी में शुरू होने वाले सेशन के लिए वहां जाने की तैयारी में लगे थे, उनके सामने भी यह एक बड़े संकट के रूप में उभरा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षा से जुड़े परामर्श देने वाली कई एजेंसियों का कहना है कि उन्हें कई छात्र और उनके अभिभावक फोन कर रहे हैं। ये वैसे लोग हैं जिन्होंने कनाडा के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए पहले से ही सितंबर के सीजन और सर्दियों के सीजन में प्रवेश लेने के लिए अपना पंजीकरण कराया है।
कनाडा में पढ़ना कर रहे पसंद
शिक्षा के क्षेत्र में कनाडा मेडिकल, फार्मेसी, फाइनेंस और टेक्नोलॉजिकल जैसे कोर्स के लिए मशहूर है जहाँ कई विदेशी छात्र अपने उज्जवल भविष्य के सपने लेकर जाते हैं। कैनेडियन ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन (सीबीआईई) की रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा में पड़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। साल 2019 में यहां 6 लाख 37 हजार 860 विदेशी छात्र थे, जो साल 2022 में बढ़कर करीब 8 लाख 7 हजार 750 हो गए ।

टोरंटो की एक कंपनी हायर एजुकेशन स्ट्रैटेजी एसोसिएट्स (एचईएसए) के एक अनुसार कनाडा की सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत ओंटारियो जैसी जगहों की शिक्षा व्यवस्था में भारतीय छात्रों का योगदान, वहां की सरकार के हिस्से से अधिक और कनाडा के छात्रों से दोगुना है। वहीं एक अध्ययन के मुताबिक अधिकतर पंजाबी कनाडा जाकर पढाई करना पसंद करते हैं। इसका एक दूसरा कारन यह भी है ली पढाई के साथ – साथ वहां की नागरिकता प्राप्त करना भी आसान है। कनाडा में पंजाबियों की गिनती 2.6 फीसदी है और 9.50 लाख सिख व पंजाबी बस रहे हैं। जिनमें 7.70 लाख पंजाबी हैं।
क्यों बढ़ा विवाद
दरअसल जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए कनाडा के प्रधानमंत्री ‘जस्टिन ट्रूडो’ के निजी विमान ख़राब होने की वजह से दो दिनों तक भारत में ही फंसे रह गए थे। लेकिन उनके स्वदेश पहुंचते ही ख़बर आई कि कनाडा ने भारत के साथ ट्रेड मिशन को रोकने का ऐलान कर दिया है। कनाडाई वाणिज्य मंत्री मैरी एनजी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि कनाडा ने द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत भी रोक दी है।
वहीं कनाडा संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में एक बयान में ट्रूडो ने कहा है कि, ‘कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां ऐसे ठोस आरोपों की जांच कर रही हैं कि एक कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के जासूसों का हाथ है। कनाडा की धरती पर एक कनाडाई नागरिक की हत्या में किसी विदेशी सरकार की भूमिका हमारी संप्रभुता का उल्लंघन है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया राज्य के सरी इलाके में हरदीप सिंह निज्जर की एक गुरुद्वारे के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। भारत सरकार निज्जर को आतंकवादी मानती थी और उन्हें उग्रवादी अलगाववादी संगठन का नेता भी बताती है। हालांकि निज्जर के समर्थक इसे सरासर गलत बताते हैं। ट्रुडो के इस बयान के बाद से ही भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया है।
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